मसूद अजहर पर विदेश मंत्रालय ने कहा- डॉजियर आतंकवादी का बायोडेटा नहीं कि उसमें सबकुछ बताया जाए
नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित किए जाने के बाद पाकिस्तान ने पूरे मामले को नया रंग देने की कोशिश की है। उसने यह कहकर अपनी कूटनीतिक नाकामी का बचाव किया है कि प्रस्ताव में पुलवामा समेत दूसरे हमलों का जिक्र न होने के कारण मसूद के खिलाफ इस फैसले पर आम सहमति बन सकी। हालांकि भारत ने स्पष्ट किया है कि यह पाकिस्तान का नया प्रॉपेगैंडा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पाकिस्तान को बेनकाब किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के अब कोई विकल्प नहीं बचा तो वह अप्रासंगिक चीजें बता रहा है।

उन्होंने कहा कि मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित करने का फैसला सही दिशा में है। यह फैसला भारत की स्थिति के अनुकूल था। भारत ने जो जानकारी सैंक्शन कमिटी के सदस्यों को दिया था फैसला उसके अनुरूप था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि चीन ने पहले ही बता दिया कि उसने वीटो क्यों वापस लिया, हमारी मंशा मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने की रही है। इस डॉजियर में किसी घटना का नहीं बल्कि सबूतों का उल्लेख हैं जो मसूद अजहर के खिलाफ हैं, नोटिफिकेशन में सभी घटनाओं का जिक्र होना जरूरी नहीं है। यह प्रक्रिया 2009 में शुरू हुई थी जो अब पूरी हुई है।
उन्होंने कहा कि मसूद को आतंकी घोषित करने वाला डॉजियर आतंकवादी का बायोडेटा नहीं है इसलिए इसमें आतंकवादी ने क्या किया है और किन घटनाओं में आतंकवादी का रोल रहा है यह दर्शाया नहीं गया है, मसूद अजहर पर बैन लगाने के प्रस्ताव में पुलवामा घटना का बहुत अहम रोल है। उन्होंने कहा हम आतंकवाद या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों पर किसी भी देश के साथ समझौता नहीं करते। चीन ने पहले ही अपने बयान में बता दिया है कि उसने अपना फैसला क्यों पलटा। उन्होंने कहा पाकिस्तान इस फैसले से एक अजीब स्थिति में है। वह न तो इस फैसले का स्वागत कर सकता है और न ही इसकी आलोचना कर सकता है इसलिए वह अब इसमें खामियां निकालने में लगा हुआ है।












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