संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा- केस वापसी तक नहीं खाली करेंगे प्रदर्शन स्थल
नई दिल्ली, 4 दिसंबर: मोदी सरकार ने संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन ही तीनों नए कृषि कानूनों को वापस ले लिया था। जिसके बाद से उम्मीद जताई जा रही थी कि दिल्ली से लगती सीमाओं पर किसानों का आंदोलन खत्म हो जाएगा, लेकिन किसान संगठनों की योजना कुछ और है। शनिवार को मीडिया से बात करते हुए संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने घोषणा की कि जब तक केंद्र सरकार आंदोलन के दौरान दर्ज केस को वापस नहीं लेती, तब तक वो प्रदर्शन स्थलों से नहीं हटेंगे।

ये फैसला हरियाणा और दिल्ली के बीच सिंघु सीमा पर हुई एक बैठक के बाद लिया गया। मामले में किसान नेता दर्शन पाल सिंह ने कहा कि सभी किसान संगठनों के नेताओं ने फैसला किया है कि जब तक किसानों के खिलाफ मामले वापस नहीं लिए जाते, तब तक वे वापस नहीं जाएंगे। उन्होंने इस संबंध में सरकार को स्पष्ट रूप से बता दिया है। वहीं भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत के मुताबिक संयुक्त किसान मोर्चा अब 7 दिसंबर को सुबह 11 बजे बैठक करेगा, जिसमें आंदोलन के भविष्य पर चर्चा की जाएगी।
वहीं किसानों की सबसे बड़ी मांग एमएसपी की गारंटी थी, जिस पर केंद्र सरकार ने एक समिति का गठन कर दिया था। जिसमें किसानों के 5 प्रतिनिधि शामिल होंगे। शनिवार को किसान संगठनों ने लबीर सिंह राजेवाल, गुरनाम चढ़ूनी, युद्धवीर सिंह, शिवकुमार कक्का, अशोक धावले का नाम केंद्र को भेजा, लेकिन किसान अभी भी मारे गए किसानों के मुआवजे की मांग पर अड़े हैं। मामले में किसान नेता अशोक धावले ने कहा कि बैठक में मृतकों के परिजनों के मुआवजा, लखीमपुर बवाल, दर्ज मामले वापस लेने को लेकर चर्चा हुई। जब सरकार के साथ बैठक होगी, तो वो अपनी मांगें उन्हें बता देंगे।
'अभी आंदोलन खत्म नहीं'
वहीं राकेश टिकैत ने कहा कि अभी तक सरकार ने आधिकारिक तौर पर बातचीत के लिए नहीं बुलाया है। अगर बातचीत के लिए बुलाया जाता है, तो यही 5 लोग (ऊपर दिए नाम) बातचीत के लिए जाएंगे। राकेश टिकैत ने एक बार फिर साफ कर दिया कि अभी किसान आंदोलन खत्म नहीं हुआ है और ना ही वो कहीं जा रहे हैं।












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