Sameer Wankhede: केंद्रीय प्रशासनिक ट्रिब्यूनल से समीर वानखेड़े को मिली राहत, मुंबई से चेन्नई का ट्रांसफर रद्द
Sameer Wankhede: केंद्रीय प्रशासनिक ट्रिब्यूनल (CAT) ने भारतीय राजस्व सेवा (IRS) अधिकारी समीर वानखेड़े के मुंबई से चेन्नई स्थानांतरण को रद्द कर दिया है। वानखेड़े ने 2021 में अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को ड्रग्स मामले में गिरफ्तार करने के बाद विवादों में आ गए थे।
न्यायिक पैनल ने कहा कि राजस्व विभाग द्वारा मई 2022 में जारी स्थानांतरण आदेश "उनकी अपनी नीति का पालन नहीं करता" और "आवेदक के प्रति पक्षपाती होने का संकेत देता है"।

शाहरुख खान से 25 करोड़ रुपए घूस मांगने का आरोप
वानखेड़े 2008 बैच के IRS अधिकारी हैं। वे साल 2021 के अक्टूबर में मुंबई में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के क्षेत्रीय निदेशक के रूप में पोस्टेड थे। इस दौरान उन्होंने अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को गिरफ्तार किया था। इसके बाद बड़ा बवाल हुआ था।
उनके ऊपर आर्यन खान को ड्रग्स मामले में बचाने के बदले अभिनेता शाहरुख खान से 25 करोड़ रुपए घूस मांगने का भी आरोप लगा।
DGTS चेन्नई में स्थानांतरित कर दिया गया था
उनके ऊपर लगे आरोप और जांच के बीच उन्हें उनकी मूल सेवा में पुनः भेज दिया गया और 4 जनवरी 2022 को वे मुंबई में डायरेक्टरेट जनरल ऑफ एनालिटिक्स एंड रिस्क मैनेजमेंट (DGARM) के अतिरिक्त निदेशक के रूप में ज्वाइन किया। इसके बाद 30 मई 2022 को उन्हें डायरेक्टरेट जनरल ऑफ टैक्सपेयर सर्विस (DGTS), चेन्नई में स्थानांतरित कर दिया गया।
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इस वजह से ट्रांसफर रुकवाना चाहते थे समीर
इसी ट्रांसफर को रद्द कराने के लिए जून 2023 में वानखेड़े ने एक आवेदन दिया। जिसमें उन्होंने विभिन्न व्यक्तिगत और पेशेवर कारणों का हवाला दिया, जिसमें अंडरवर्ल्ड से उन्हें और उनके परिवार को मिली धमकियां शामिल थीं। जब उनके आवेदन का कोई जवाब नहीं आया, तो उन्होंने CAT से संपर्क किया।
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने याचिका का विरोध किया
राजस्व विभाग और केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने उनकी याचिका का विरोध किया। प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने दावा करते हुए कहा कि, वानखेड़े मई 2010 में सहायक आयुक्त के रूप में राजस्व सेवा में शामिल होने के बाद से जून 2022 तक मुंबई में ही पोस्टेड रहे थे और उन्होंने कभी मुंबई के बाहर काम नहीं किया।
उन्होंने यह भी बताया कि विभाग की स्थानांतरण समिति ने उनकी प्रस्तुतियों पर विचार किया था और कई शिकायतों और जांचों के चलते स्थानांतरण आदेश को रद्द नहीं किया था, और उन्हें चेन्नई में तीन साल पूरे नहीं हुए थे।
ट्रिब्यूनल ने क्या कहा?
वहीं केंद्रीय प्रशासनिक ट्रिब्यूनल ने यह कहते हुए उनके ट्रांसफर को रद्द कर दिया कि, वानखेड़े का स्थानांतरण आदेश विभाग की 2018 की स्थानांतरण नीति का उल्लंघन था। विभाग ने "अपनी नीति का पालन नहीं किया। प्रतिवादियों को अपने प्रशासनिक कार्य को निष्पक्ष और न्यायसंगत तरीके से करना चाहिए।












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