समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने की याचिका पर 18 अप्रैल को सुनवाई, 5 जजों की पीठ गठित
समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने की याचिका पर 18 अप्रैल को सुनवाई होगी, जिसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने 5 जजों की बेंच को गठित कर दिया है।

समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने की याचिका पर 18 अप्रैल को सुनवाई होगी। इससे पहले 13 मार्च को इस मामले पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने 5 जजों की संविधान पीठ को यह मामला सौंप दिया था। अब शनिवार (15 अप्रैल) को सुप्रीम कोर्ट ने पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ को गठित किया है।
18 अप्रैल को होने वाली इस याचिका पर चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजय किशन कौल, रवींद्र भट, हेमा कोहली और पीएस नरसिम्हा सुनवाई करेंगे।
इससे पहले याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा था कि समलैंगिक विवाह से संबंधित अहम मुद्दा है और इस पर पांच-न्यायाधीशों की पीठ के विचार किए जाने की जरूरत है।
मालूम हो कि समलैंगिंक विवाह को मान्यता देने के लिए शीर्ष अदालत में कई याचिकाएं दायर की गई हैं। जिसमें स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत समलैंगिक विवाह के रजिस्ट्रेशन की मांग की गई है।
12 मार्च को भी इस मामले पर सुनवाई हुई, जिसमें केंद्र सरकार ने इस याचिका का यह कहते हुए विरोध किया था कि इससे व्यक्तिगत कानूनों और स्वीकार्य सामाजिक मूल्यों में संतुलन प्रभावित होगा।
याद दिला दें कि इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच में की जा रही थी, जिसमें जस्टिस पीएस नरसिम्हा, जस्टिस जेबी पादरीवाला शामिल थे। हालांकि अब 5 जजों की नई बेंच का गठन कर दिया गया है।












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