भारत की तरक्की का असली राज: क्या 2047 तक बिजली की कमी रोकेगी देश की रफ्तार?

अदाणी ग्रुप के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सागर अदाणी ने मंगलवार को कहा कि 21वीं सदी में किसी भी देश की मजबूती इस बात से तय होगी कि वहां ऊर्जा (Energy) की पहुंच कैसी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत के भविष्य के विकास और बड़े लक्ष्यों को हासिल करने के लिए बड़े पैमाने पर भरोसेमंद और सस्ती बिजली का बुनियादी ढांचा तैयार करना बेहद जरूरी है।

India energy resilience for 2047

नई दिल्ली में आयोजित एक इंटरनेशनल समिट में बोलते हुए सागर अदाणी ने कहा कि हाल के वैश्विक संघर्षों और सप्लाई चेन में आई बाधाओं ने यह दिखा दिया है कि एनर्जी सेक्टर में आने वाले झटके किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को रातों-रात कैसे प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि अब किसी भी देश के सामने चुनौती सिर्फ विकास की नहीं है, बल्कि संकट के समय खुद को संभाले रखने की क्षमता विकसित करने की भी है।

भारत को एक 'आकांक्षी राष्ट्र' बताते हुए उन्होंने कहा कि देश की युवा आबादी, किसान और उद्यमी एक मजबूत आर्थिक भविष्य की नींव रख रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि सिर्फ आकांक्षाओं के दम पर देश नहीं बनते, इसके लिए ऊर्जा की एक ठोस बुनियाद का होना अनिवार्य है।

सागर अदाणी के मुताबिक, भारत में विकास से जुड़ी लगभग हर बड़ी चुनौती ऊर्जा से जुड़ी है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जल सुरक्षा के लिए पानी को साफ करने और उसके वितरण के लिए बिजली चाहिए, खाद्य सुरक्षा के लिए खाद, सिंचाई और लॉजिस्टिक्स जरूरी है, वहीं डिजिटल ग्रोथ के लिए डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को भी भारी मात्रा में बिजली की जरूरत होती है।

उन्होंने इस बात की ओर भी ध्यान दिलाया कि भारत में प्रति व्यक्ति ऊर्जा की खपत अभी भी वैश्विक औसत से काफी कम है, जो भविष्य में होने वाली भारी मांग का संकेत है। उन्होंने कहा कि अगर भारत 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य रखता है, तो हमें बिजली उत्पादन क्षमता में मामूली बढ़ोतरी के बजाय एक बड़ी छलांग लगानी होगी।

सागर अदाणी ने कहा कि अगले दो दशकों में भारत को लगभग 2,000 गीगावाट नई क्षमता की जरूरत पड़ सकती है। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि यह ऊर्जा सस्ती, सुलभ और स्वच्छ (Clean Energy) हो।

दुनिया के अन्य देशों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जिन देशों ने खुद को मजबूत बनाया है, उन्होंने अपनी ऊर्जा जरूरतों को या तो आत्मनिर्भरता से या रणनीतिक साझेदारी से पूरा किया है। उन्होंने जोर दिया कि भारत को बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिफिकेशन (विद्युतीकरण) पर ध्यान देना चाहिए, ताकि आयातित ऊर्जा पर निर्भरता कम हो और देश का अपना एनर्जी बैकबोन तैयार हो सके। उनके अनुसार, लंबे समय तक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए इलेक्ट्रिफिकेशन ही सबसे भरोसेमंद रास्ता है।

सागर अदाणी ने ऊर्जा के अलग-अलग स्रोतों के इस्तेमाल की वकालत करते हुए कहा कि भारत को रिन्यूएबल एनर्जी, हाइड्रो, कुशल थर्मल और न्यूक्लियर पावर का पूरा लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हालांकि रिन्यूएबल एनर्जी तेजी से बढ़ रही है, लेकिन जमीन की उपलब्धता और निरंतरता जैसी चुनौतियों को देखते हुए एक संतुलित पोर्टफोलियो होना जरूरी है।

पिछले एक दशक में भारत की नीतिगत दिशा की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि सुधारों, बुनियादी ढांचे के विस्तार, रिन्यूएबल एनर्जी में ग्रोथ और मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क ने बिजनेस के लिए एक बेहतर माहौल तैयार किया है।

अदाणी ग्रुप की भूमिका पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि उनका समूह भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि चेयरमैन गौतम अदाणी ने एक एकीकृत निवेश रणनीति के जरिए एनर्जी ट्रांजिशन के लिए 100 अरब डॉलर से अधिक के निवेश का संकल्प लिया है।

सागर अदाणी ने कहा कि ग्रुप रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता, स्टोरेज सिस्टम, ट्रांसमिशन नेटवर्क और ग्रीन हाइड्रोजन इकोसिस्टम का विस्तार कर रहा है। उन्होंने आगे कहा कि पोर्ट्स, लॉजिस्टिक्स, एयरपोर्ट्स और डेटा सेंटर्स में किया जा रहा निवेश देश को हर मोर्चे पर मजबूत बनाने के व्यापक विजन का हिस्सा है।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि असली सवाल यह नहीं है कि क्या भारत को और अधिक ऊर्जा की जरूरत है, बल्कि सवाल यह है कि हम इसे कितनी तेजी से बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर भारत बड़े पैमाने पर सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा देने में सफल रहता है, तो यह न केवल अपना भविष्य सुरक्षित करेगा बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देगा।

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