साध्वी प्रज्ञा- कोर्ट ने कहा मोटरसाइकिल के मालिकाना हक को नकारा नहीं जा सकता
नई दिल्ली। साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि मोटरसाइकिल के मालिकाना हक के तथ्य को इस मामले में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। मालेगांव ब्लास्ट धमाके में आरोपी प्रज्ञा ठाकुर के जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट में बहस के दौरान एनआईए ने प्रज्ञा ठाकुर की जमानत का विरोध नहीं किया था।

एनआईए ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि उसे प्रज्ञा ठाकुर के खिलाफ कोई भी सबूत नहीं मिला है। प्रज्ञा ठाकुर के लिए जो सबसे बड़ी मुसीबत है वह है इस धमाके में इस्तेमाल की गयी मोटरसाइकिल जो उनके नाम है। एनआईए ने कहा कोर्ट में कहा है कि धमाके से काफी समय पहले साध्वी ने इस मोटरसाइकिल को बेच दिया ता। लेकिन खरीददार ने मोटरसाइकिल का मालिकाना हक ट्रांसफर नहीं कराया था।
बाइक के मालिकाना हक को कोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए कहा कि इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने गवाह के बयान का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि साध्वी धमाके की जगह पर आयी थी इस बात का जायजा लेने के लिए कि उनकी गाड़ी के इस्तेमाल के बाद इतने कम लोगों की मौत क्यों हुई।
कोर्ट ने कहा कि साध्वी के खिलाफ प्रथम दृष्टया सही थे, ऐसे में कोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया। मालेगांव धमाके से पहले यहां के रहने वाले सैयद निसार अहमद जिन्होंने अपने बेटे को इस धमाके में गंवा दिया था ने इस मामले में कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
सैयद के वकील ने कहा कि साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को सिर्फ इसलिए जमानत नहीं दी जा सकती है क्योंकि जांच एजेंसी ने इसका विरोध नहीं किया है। उन्होंने कहा था कि यह कोर्ट का फैसला होगा कि साध्वी को जमानत दी जाए या नहीं।












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