Ajit Singh Profile: नहीं रहे लोगों के प्यारे 'छोटे चौधरी', पढ़ें IIT खड़गपुर से संसद तक का सफर
नई दिल्ली, 06 मई। एक दुखद खबर सियासी गलियारों से हैं, आज सुबह राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) के प्रमुख व पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी अजित सिंह का निधन हो गया, वो कोरोना से संक्रमित थे। 82 वर्षीय अजीत सिंह ने गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। प्राप्त जानकारी के मुताबिक अजीत सिंह की हालत मंगलवार से काफी खराब थी, उनके फेफड़ों में संक्रमण बढ़ गया था, हालांकि तमाम कोशिशों के बावजूद अजीत सिंह को बचाया नहीं जा सका, अजीत सिंह का जाना राजनीति जगत के लिए किसी कुठाराघात से कम नहीं हैं।

'छोटे चौधरी' या 'छोटे सरकार' कहलाते थे अजीत सिंह
अजीत सिंह को किसानों और जाटों का बड़ा नेता माना जाता था। अजीत सिंह को पश्चिमी यूपी के किसान 'हुकूम' , 'छोटे चौधरी' या 'छोटे सरकार' के नाम से भी बुलाते थे। सियासी गलियारों में अजीत सिंह के लिए एक जुमला काफी मशहूर था और वो था कि 'सत्ता किसी की भी हो लेकिन मंत्री तो अजीत सिंह ही बनेंगे'। पश्चिम यूपी की राजनीति आजादी के बाद से लगातार चौधरी चरण सिंह और उनके बाद बेटे अजीत सिंह के इर्द-गिर्द ही घूमती रही है।

मेरठ में हुआ था अजीत सिंह का जन्म
देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के निधन के बाद अजीत सिंह ने कई बार अपनी राजनीति के रंग बदले लेकिन वो हमेशासियासत के चर्चित चेहरे बने रहे, वो कई दलों के साथ रहे लेकिन अपने दल की एकल अलग पहचान के साथ। यूपी के मेरठ के भडोला गांव में 12 फरवरी 1939 को संभ्रात परिवार में पैदा हुए अजीत सिंह को राजनीति विरासत में मिली। उनके पिता चरण सिंह भारत के प्रधानमंत्री रह चुके हैं, अजीत सिंह ने करियर के शुरू में इंजीनयरिंग को चुना था सियासत को नहीं।

आईआईटी खड़गपुर से पढ़े थे अजीत सिंह
लखनऊ में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद वे आईआईटी खड़गपुर में पहुंचे और इसके बाद अमेरिका से इलिनाइस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी पढ़ने के बाद 17 बरस तक वहीं के कॉरपोरेट जगत में काम किया था। साल 1980 में उन्होंने अपने पिता चरण सिंह के आग्रह पर राजनीति में कदम रखा था और फिर जीवन के अंत तक वो राजनीति से ही जुड़े रहे। मालूम हो कि अजित सिंह बागपत से 7 बार सांसद रह चुके हैं, जो कि अपने आप में बड़ी ही खास बात है।

एक नजर उनके राजनीतिक सफर पर
- अजीत सिंह साल 1986 में यूपी से राज्यसभा के लिए चुने गए थे।
- साल 1989 और साल 1991 में अजीत सिंह लोकसभा सांसद निर्वाचित हुए।
- अजीत सिंह विश्वनाथ प्रताप सिंह सरकार में 11 महीने के लिए उद्योग मंत्री थे।
- साल 1998 में बागपत का चुनाव हारने के बाद अजीत सिंह ने बड़ा कदम उठाया और राष्ट्रीय लोकदल की स्थापना की।
- अजीत सिंह साल 1999 और 2014 में दो बार भाजपा उम्मीदवार से उनकी हार को छोड़ दें तो वो लगातार बागपत सीट का प्रतिनिधित्व करते रहे, दूसरे शब्दों में कहा जाए तो बागपत सीट अजीत सिंह की पहचान थी।

हर सरकार में 'फिट' हो जाने का हुनर जानते थे
ऐसा कहा जाता था कि वो हर सरकार में 'फिट' हो जाने का हुनर जानते थे। 1989 से 2014 तक अलग-अलग पार्टियों की सरकारों में वो मंत्री रहे। साल 1989 में वीपी सिंह की सरकार, 1991 में नरसिंह राव सरकार , 1999 की वाजपेयी सरकार और 2011 की मनमोहन सिंह सरकार में वो मंत्री पद रहे।
तीन बच्चों के पिता थे अजीत सिंह
अजीत सिंह की पत्नी का नाम राधिका सिंह है और वो दो बेटियों और एक बेटे के पिता थे, उनके बेटे जयंत चौधरी भी सियासत का जाना-माना नाम है, पार्टी की जिम्मेदारी इस वक्त उनके कंधों पर है, वो मथुरा से सांसद भी रह चुके हैं।
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