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राजनीति के जेंटलमेन कहे जाते हैं कांग्रेस से BJP में शामिल हुए एसएम कृष्णा

भारतीय राजनीति के परिदृश्य में कृष्णा को जेंटलमेन कहा जाता है। 84 वर्षीय कृष्णा ने साल 1962 में 29 साल की उम्र प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से राजनीति की शुरूआत की थी।

बेंगलुरु। कांग्रेस का एक और सूर्य अस्त हो गया। बुधवार (22 मार्च) को 46 साल से कांग्रेसी रहे एसएम कृष्णा ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की मौजूदगी में भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। हालांकि यह बात अलग है कि कांग्रेस में भी कृष्णा को जिम्मेदारी वाले पद मिले और उन्होंने इसका निर्वहन भी किया।

कानून में स्नातक और डल्लास-टेक्सास स्थित सदर्न मेथडिस्ट विश्वविद्यालय के छात्र रहे कृष्णा ने पहला चुनाव मद्दू से जीता था। कृष्णा के उस प्रत्याशी के खिलाफ खड़े थे, जिसका प्रचार करने तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू आए थे।

यहां से शुरू हुई राजनीतिक जीवन की शुरुआत

यहां से शुरू हुई राजनीतिक जीवन की शुरुआत

बता दें कि यह भी एक संयोग है कि जिस प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से कृष्णा के राजनीतिक जीवन की शुरूआत हुई, वो अब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का हिस्सा है। कृष्णा ने चौथी, पांचवीं, सातवी और आठवीं लोकसभा में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से मड्या लोकसभा क्षेत्र का संसद में प्रतिनिधित्व किया।

इंदिरा और राजीव की कैबिनेट में थे मंत्री

इंदिरा और राजीव की कैबिनेट में थे मंत्री

इसके बाद कृष्णा ने इंदिरा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस का हिस्सा बने। साल 1983 स 85 के दौरान, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के प्रधानमंत्रित्व काल में कृष्णा ने बतौर केंद्रीय मंत्री काम किया। 1996 और 2006 में कृष्णा राज्यसभा के लिए चुने गए। कृष्णा कई बार कर्नाटर विधानसभा और विधानपरिषद के सदस्य भी रहे हैं।

महाराष्ट्र के राज्यपाल

महाराष्ट्र के राज्यपाल

1999 से 2004 तक कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे कृष्णा ने साल 1989 और 1992 में विधानसभा के स्पीकर भी थे। इस दौरान कृष्णा ने राज्य के उपमुख्यमंत्री के तौर पर भी काम किया। 1999 में उन्होंने कांग्रेस की कर्नाटक इकाई के अध्यक्ष बने रहे और बीते विधानसभा चुनाव तक पार्टी का नेतृत्व किया। साल 2004 में 12 दिसंबर में कृष्णा को महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया। इस पद पर वो 5 मार्च 2008 तक रहे।

फिर दिया इस्तीफा

फिर दिया इस्तीफा

कृष्णा ने बतौर राज्यपाल अपने पद से इस्तीफा दिया था, जिसके बारे में माना जा रहा था कि वो फिर से कर्नाटक की राजनीति में वापस आना चाहते हैं। इसके बाद कृष्णा फिर राज्यसभा आए और फिर मनमोहन सिंह की सरकार में 22 मई 2009 को विदेश मंत्री बने। इसके बाद फिर कर्नाटक की राजनीति में लौटने की उम्मीद लिए उन्होने 26 अक्टूबर 2012 को इस्तीफा दे दिया। इसी साल 20 जनवरी को कृष्णा ने कांग्रेस नेताओं पर अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए पार्टी से इस्तीफा दे दिया। कृष्णा के भाजपा में आने के बाद उन्हें फिर से राज्य की राजनीति में वापस आने की उम्मीद जग गई है।

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