RSS Vyakhanmala: संघ के कार्यक्रम में Mohan Bhagwat ने बताया कौन है हिंदू? भारतीयता पर भी कही मार्के की बात
RSS Vyakhanmala Mohan Bhagwat: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने आरएसएस व्याख्यानमाला के तहत देश भर में कार्यक्रम कर रहे हैं। मुंबई में आयोजित कार्यक्रम में बॉलीवुड स्टार सलमान खान ने भी हिस्सा लिया। इस दौरान संघ प्रमुख ने बताया कि आरएसएस का गठन सत्ता पाने के लिए नहीं हुआ था। उन्होंने देश में आज कौन हिंदू है और भारतीयता को लेकर भी अपने विचार रखे।
संघ प्रमुख ने मुंबई में आयोजित संघ की व्याख्यानमाला में भारत की वैश्विक भूमिका पर बात की। उन्होंने कहा कि भारत विश्व गुरु भाषणों से नहीं, बल्कि अपने आचरण और उदाहरण से बनेगा। उन्होंने युवाओं से अपने मूल आदर्शों और संस्कृति से जुड़ने की अपील की।

RSS Vyakhanmala में समझाया भारतीयता का अर्थ
आरएसएस प्रमुख ने व्याख्यान देते हुए बताया कि देश में ऐसे हिंदू भी मौजूद हैं जो अपनी जड़ों और पहचान को भूल चुके हैं। संघ प्रमुख ने कहा कि इसी वजह से ऐसे लोगों को समाज ने भी भुला दिया है। उन्होंने आगाह किया कि कुछ ताकतें ऐसी भी हैं जो इन लोगों को पूरी तरह हाशिये पर डालने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने भारतीयता की परिभाषा देते हुए कहा कि जो भी भारत में रहता है चाहे वह मुसलमान हो या ईसाई, वह इसी देश का हिस्सा है और भारतीयता उसकी पहचान है।
Mohan Bhagwat ने बताया देश में 4 तरह के हिंदू हैं
संघ प्रमुख ने कहा कि देश में हिंदुओं की चार तरह की मानसिकताएं देखने को मिलती हैं। एक ऐसे हैं जो गर्व से कहते हैं, हम हिंदू हैं। कुछ ऐसे लोग हैं जो मानते हैं कि हिंदू होना सामान्य बात है, इसमें गर्व कैसा। भागवत ने आगे कहा कि कुछ ऐसे भी लोग हैं, जो धीरे से कहते हैं कि हम हिंदू हैं और सार्वजनिक रूप से बोलने से हिचकते हैं। चौथी तरह के ऐसे लोग हैं, जो अपनी पहचान ही भूल चुके हैं या जिन्हें भुला दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि धर्मनिरपेक्षता शब्द सही नहीं है, असल शब्द पंथनिरपेक्षता होना चाहिए।
RSS-BJP के रिश्तों पर भी दिया स्पष्टीकरण
मोहन भागवत ने राजनीति और संघ के संबंधों को लेकर भी स्थिति साफ की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या बीजेपी के नेता संघ के लोग नहीं, बल्कि स्वयंसेवक हैं। बीजेपी एक राजनीतिक दल है, जबकि संघ सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन है, जिसका उद्देश्य समाज को संगठित करना है। भागवत ने कहा कि भारत में भाषाएं, पूजा पद्धतियां, खान-पान और परंपराएं भले अलग हों, लेकिन एक सांस्कृतिक पहचान सबको जोड़ती है। हिंदू ही वह सांस्कृतिक पहचान है, जो सबको जोड़कर रखती है।












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