बीफ खा चुके लोग भी वापस हिंदू बन सकते हैं- RSS नेता दत्तात्रेय होसबले

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के नेता दत्तात्रेय होसबले का कहना है कि बीफ खा चुके लोग वापस हिंदू बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म में वापस लौटने के लिए दरवाजा बंद नहीं किया जा सकता।

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राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले ने कहा है कि जो लोग बीफ खा चुके हैं, वह भी वापस हिंदू बन सकते हैं, उनके लिया इसका रास्ता बंद नहीं किया जा सकता। जयपुर में बुधवार को एक कार्यक्रम उन्होंने कहा है कि हिंदू शब्द हमारे देश के संविधान में प्रवेश कर चुका है। यह एक ऐतिहासिक तथ्य है। उनका कहना है कि देश में अब लोग संघ के बारे में जानने-समझने को इच्छुक हुए हैं। उनके मुताबिक हिंदू समाज के सभी लोग संघ का हिस्सा हैं।

हिंदू एक पहचान और एक संस्कृति है- दत्तात्रेय होसबले
आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले कहना है कि जो बीफ का सेवन कर चुके हैं, उन्हें भी हिंदू धर्म में वापस लिया जा सकता है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ में सर संघचालक के बाद यह सबसे प्रभावशाली नेता माने जाते हैं। जयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि 'हिंदू शब्द पहले ही हमारे संविधान और देश में प्रवेश कर चुका है। यह इतिहास का एक तथ्य है। हिंदू एक पहचान और एक संस्कृति है जिससे लोग संबंधित हैं। ' उन्होंने कहा है, 'हालांकि एमएस गोलवरकर हिंदू के सटीक परिभाषा में नहीं गए, वीर सावरकर ने अपने लेखों में कहा कि जो लोग सिंधू नदी तक की भूमि को अपनी भूमि मानते हैं, वे हिंदू हैं।'

बीफ खा चुके लोग भी वापस हिंदू बन सकते हैं-दत्तात्रेय होसबले
गोलवरकर का हवाला देकर आरएसएस नेता ने आगे कहा कि जो लोग दूसरे धर्मों में शामिल हो चुके हैं, उनके लिए हम अपने दरवाजे बंद नहीं कर सकते। उनके मुताबिक, 'गोलवलकर जी ने तो यहां तक कहा था कि जो लोग दूसरे धर्मों में परिवर्तित हो चुके हैं, उन्हें भी वापस हिंदू धर्म में लाया जा सकता है। यह भी हो सकता है कि वे किसी तरह के दबाव मे बीफ खा चुके हों, लेकिन फिर भी हम उनके लिए अपने दरवाजे बंद नहीं कर सकते। उन्हें अभी भी हिंदू धर्म में वापस लाया जा सकता है।'

'संघ को समझने के लिए दिल की आवश्यकता है, दिमाग की नहीं'
संघ के सरकार्यवाह ने कहा कि संघ को समझने के लिए एक व्यक्ति को न सिर्फ अपने दिमाग को खोलने की जरूरत है, बल्कि अपने दिल को भी खोलना होगा। वो बोले, 'एक बार आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से पूछा गया था, संघ क्या है? उन्होंने कहा कि सिर्फ संघ के संस्थापक जानते हैं कि संघ क्या है, जबकि, हम सभी सिर्फ उत्तर को तलाशने की कोशिश कर रहे हैं। संघ को समझने के लिए दिल की आवश्यकता है, दिमाग की नहीं।'

'देश में लोग अब संघ के बारे में जानने के इच्छुक हैं'
आरएसएस के सरकार्यवाह ने कहा कि संघ पूरे हिंदू समाज को अपना परिवार मानता है। उन्होंने कहा, 'हिंदू समाज के सभी सदस्य संघ परिवार के हिस्सा हैं। इसलिए यह हमारा दायित्व है कि अपने लोगों में बदलाव लाएं और धर्म, संस्कृति और राष्ट्रवाद की भावना उनमें विकसित करें। हम तभी एक समाज के रूप में विकसित हो सकते हैं। संघ का लक्ष्य समाज को एकजुट और शक्तिशाली बनाना है। इसके लिए हमें राष्ट्रीय एकता के लिए कार्य करना होगा, गौ रक्षा को सशक्त करना होगा और धर्म परिवर्तन के खिलाफ लड़ना होगा। ' होसबले ने कहा है कि 'आज संघ केंद्रीय स्थिति में पहुंच चुका है, क्योंकि देश में लोग अब संघ के बारे में जानने के इच्छुक हैं। '(तस्वीर-फाइल, इनपुट-एएनआई)

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