मोहन भागवत बोले- नागपुर से नहीं चलती मोदी सरकार, मांगने पर ही देते हैं सलाह
नई दिल्ली। दिल्ली में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत का तीन दिवसीय कार्यक्रम चल रहा है। मंगलवार मोहन भागवत ने विपक्ष पर जमकर हमला बोला। मोहन भागवत ने कहा कि, नागपुर से देश की सरकार नहीं चलती। आरएसएस तभी सलाह देता है जब उनसे मांगी जाती है। विज्ञान भवन में हुए इस कार्यक्रम में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू, प्रकाश जावड़ेकर, जितेंद्र सिंह, राम माधव, दलबीर सिंह सुहाग, विजय गोयल, केसी त्यागी, सुब्रमण्यम स्वामी, उमा भारती कई नेता शामिल हुए।

सरकार की नीतियों पर हमारा कोई प्रभाव नहीं है
मोहन भागवत ने मंगलवार को कहा कि, ये जो कयास लगता है कि नागपुर से फोन जाता है। सलाह दी जाती है कि क्या करना है? तो सब गलत है। उनको(बीजेपी सरकार) सलाह चाहिए तो वो पूछते हैं, हम दे सकते हैं तो हम दे देते हैं। पर उनकी राजनीति पर हमारा कोई प्रभाव नहीं है। सरकार की नीतियों पर हमारा कोई प्रभाव नहीं है। वो समर्थ हैं अपने कार्यक्षेत्र में। उन्होंने कहा कि, केंद्र में काम कर रहे लोग मेरी उम्र के हैं तो राजनीति में वे मेरे से सीनियर हैं। संघ कार्य का जितना मेरा अनुभव है उससे ज्यादा अनुभव उनका राजनीति का है। उनको अपनी राजनीति चलाने के लिए किसी की सलाह की आवश्यकता नहीं है। भागवत ने कहा कि, उनका अपना विचार है। संघ का मानना है कि संविधान की परिकल्पना के अनुसार सत्ता का केन्द्र बने रहना चाहिए और यदि ऐसा नहीं होता है तो हमारा मानना है कि यह गलत है।

संघ संविधान को मानकर चलता है
मोहन भागवत ने कहा कि संघ संविधान को मानकर चलता है। संविधान के खिलाफ जाकर हमने कोई काम किया हो, ऐसा कोई भी उदाहरण नहीं है। भागवत ने कहा संविधान के अनुशासन का पालन करना सबका कर्तव्य है, संघ इसका सदैव पालन करता है। उन्होंने कहा कि, कहा हमारे आपस की लड़ाई के कारण विदेश जीते और हम पर कब्जा किया। इस लिए प्रस्तावना में अंबेडकर ने बंधुत्व की बात कही है। जिस दिन यहां कहा जाएगा की यहां मुसलमान नहीं चाहिए उस दिन हिंदुत्व नहीं रहेगा। जिस दिन कहा जाएगा कि यहां सिर्फ वेद चलेंगे तब हिंदुत्व नहीं रहेगा।

विविधताओं का हार गूथ कर हम सबको आना होगा
भागवत ने कहा कि, सबको लेकर भारत के लोग आगे बढ़ेंगे ये संघ की विचारधारा है, संविधान को मान कर ही संघ चलता है, संविधान कानून का पूर्ण पालन करता है। हम स्वयं सेवकों से कभी किसी पार्टी विशेष के लिए काम करने के लिए नही कहते , हम उनसे राष्ट्रीय हितों के लिए काम करने वालों का साथ देने को अवश्य कहते है। सभी प्रकार के सामर्थ से संपन्न है भारत में, हमारे पास आर्थिक नैतिक सामरिक सामर्थ हैं। विविधताओं का हार गूथ कर हम सबको आना होगा।












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