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Mohan Bhagwat: 'अंधविश्वास नहीं, विवेक जरूरी', विज्ञान और धर्म के टकराव पर क्या बोले मोहन भागवत?

Mohan Bhagwat Science and Religion: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा है कि भारत को केवल एक महाशक्ति (Superpower) ही नहीं बनना चाहिए, बल्कि उसे पूरी दुनिया के लिए मार्गदर्शक यानी 'विश्व गुरु' की भूमिका भी निभानी होगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि विकास, ज्ञान और सामाजिक संतुलन-तीनों को साथ लेकर चलना ही भारत का रास्ता है।

मोहन भागवत ने शुक्रवार, 26 दिसंबर को आंध्र प्रदेश के तिरुपति स्थित राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में आयोजित भारतीय विज्ञान सम्मेलन (Bharatiya Vigyan Sammelan - BVS) के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू भी मौजूद थे।

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अंधविश्वास से बाहर निकलने की जरूरत

अपने संबोधन में RSS प्रमुख ने कहा कि समाज को पुराने ही नहीं, बल्कि नए अंधविश्वासों से भी बाहर निकलने की जरूरत है। उन्होंने कहा, हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि लोग पुराने अंधविश्वासों से बाहर निकलें, और यह बात उन लोगों पर भी लागू होती है जो नए अंधविश्वासों में फंसे हुए हैं। भारत की पारंपरिक ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारे प्राचीन मंदिरों की वास्तुकला ऐसी थी कि वे कई प्राकृतिक आपदाओं के बावजूद टिके रहे। इसी तरह भारत में हजारों वर्षों तक पारंपरिक खेती की गई, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रही।

विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन पर जोर

मोहन भागवत ने आधुनिक विकास के दुष्परिणामों की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि केवल उत्पादन बढ़ाने की होड़ में कई गंभीर समस्याएं सामने आई हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पंजाब से जयपुर तक चलने वाली तथाकथित 'कैंसर ट्रेन' इस बात का संकेत है कि असंतुलित विकास ने समाज और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया है। भारत का आगे बढ़ना तय है, क्योंकि यह समय की जरूरत है। लेकिन भारत को सिर्फ सुपरपावर नहीं, बल्कि विश्व गुरु भी बनना होगा।"

मातृभाषा में शिक्षा और विज्ञान का प्रसार जरूरी

शिक्षा और वैज्ञानिक चेतना पर बात करते हुए RSS प्रमुख ने कहा कि ज्ञान तभी प्रभावी होता है, जब वह आम लोगों तक उनकी अपनी भाषा में पहुंचे। उन्होंने कहा, मातृभाषा में सीखने का प्रभाव कहीं अधिक होता है। विज्ञान का ज्ञान भारत की अलग-अलग भाषाओं में आम आदमी तक पहुंचना चाहिए। क्षेत्रीय भाषाओं में शिक्षा और वैज्ञानिक जानकारी का प्रसार समाज को सशक्त बनाएगा और ज्ञान को सीमित वर्ग तक सिमटने से रोकेगा।

चंद्रबाबू नायडू के विकास मॉडल की सराहना

मोहन भागवत ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू के विकास दृष्टिकोण की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि विकास ऐसा नहीं होना चाहिए जिससे समाज में दो अलग-अलग वर्ग बन जाएं। भागवत ने कहा,मुख्यमंत्री ने जो कहा है, वह बहुत महत्वपूर्ण है-विकास ऐसा नहीं होना चाहिए कि समाज में दो वर्ग पैदा हो जाएं।

RSS प्रमुख के इस बयान को भारत के विकास मॉडल, शिक्षा नीति और सांस्कृतिक आत्मविश्वास से जोड़कर देखा जा रहा है। उनका संदेश साफ था कि भारत को अपनी परंपरा, विज्ञान और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाते हुए आगे बढ़ना होगा, ताकि वह न केवल आर्थिक रूप से मजबूत बने, बल्कि नैतिक और बौद्धिक रूप से भी दुनिया का मार्गदर्शन कर सके। मोहन भागवत का यह संबोधन ऐसे समय में आया है, जब देश में विकास, शिक्षा की भाषा और सांस्कृतिक पहचान को लेकर व्यापक चर्चा चल रही है।

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