RSS Celebrates 100 Years: सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण! राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सौ साल
RSS Celebrates 100 Years: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) इस वर्ष अपनी 100वीं वर्षगांठ मना रहा है। यह शताब्दी यात्रा केवल एक संगठन की नहीं, बल्कि भारत के समाज, संस्कृति और राष्ट्र सेवा के इतिहास की भी गवाह है। डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा 1925 में नागपुर में स्थापित यह संगठन आज देशभर में सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय चेतना फैलाने का कार्य कर रहा है।
शुरुआत में युवा कार्यकर्ता देशभक्ति और सेवा भाव से संघ से जुड़े और अपना जीवन राष्ट्र के लिए समर्पित कर दिया। अप्पाजी जोशी, दादराव परमार्थ, बालासाहेब और भाऊराव देवरस, यादव राव जोशी और एकनाथ रानडे जैसे अग्रणी कार्यकर्ताओं ने संघ के आदर्शों को साकार किया।

समाज के सहयोग से संघ ने हर चुनौती का सामना किया। माताएं और बहनें घर-घर जाकर कार्यकर्ताओं को समर्थन देती रहीं, और राष्ट्र सेविका समिति ने महिलाओं की सक्रिय भागीदारी को सुनिश्चित किया। समय-समय पर संघ ने सामाजिक मुद्दों, राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक जागरूकता के लिए अभियान चलाए, जिसमें लाखों लोगों ने भाग लिया।
ये भी पढ़ें: सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी पर राहुल गांधी ने तोड़ी चुप्पी, BJP-RSS पर लगाया गंभीर आरोप
आज RSS के 83,000 से अधिक शाखाएं हैं, और यह संगठन शहरों से लेकर दूरदराज के गांवों तक सक्रिय रूप से पहुंच रहा है। शताब्दी वर्ष में "घर-घर संपर्क" अभियान के जरिए संघ का संदेश हर घर तक पहुंचाया जा रहा है, ताकि समाज के हर वर्ग को जोड़कर राष्ट्र निर्माण में योगदान दिया जा सके।
स्थापना और RSS के प्रारंभिक दिन
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की स्थापना 27 सितंबर 1925 को डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने नागपुर में की थी। उस समय के युवा कार्यकर्ता देशभक्ति और समाज सेवा की भावना से प्रेरित होकर संघ से जुड़े। प्रारंभ में संघ का कार्य छोटे स्तर पर शुरू हुआ, लेकिन डॉ. हेडगेवार की दूरदर्शिता और कार्यकर्ताओं की निष्ठा ने इसे धीरे-धीरे पूरे देश में फैलाया।
प्रमुख कार्यकर्ता और योगदान
संघ की नींव में अनेक घरस्थ (Grihasth) और प्रचारक कार्यकर्ताओं का योगदान रहा। अप्पाजी जोशी, दादराव परमार्थ, बालासाहेब और भाऊराव देवरस, यादव राव जोशी, एकनाथ रानडे जैसे कार्यकर्ताओं ने अपने जीवन को राष्ट्रीय सेवा के लिए समर्पित किया। इनके प्रयासों ने संघ को मजबूत और समाज में स्वीकार्य बनाया।
समाज का सहयोग और लोकप्रियता
संघ का कार्य समाज की भावनाओं से जुड़ा रहा। स्वामी विवेकानंद की तरह, संघ ने भी यह समझा कि समाज का सहयोग किसी भाषा या शिक्षा से नहीं, बल्कि उनके नैतिक और आध्यात्मिक समझ से जुड़ा है। जैसे- आम लोग संघ के सत्विक कार्यों को तुरंत पहचानते और उनका समर्थन करते।
माताओं और बहनों का योगदान
संघ कार्य में माताओं और बहनों का योगदान हमेशा महत्वपूर्ण रहा है। घर ही संघ के गतिविधियों का केंद्र बन गए। राष्ट्र सेविका समिति ने महिलाओं को समाज सेवा में सक्रिय भागीदारी का अवसर दिया। मौसीजी केलकर से लेकर प्रमिलाताई मेधे तक अनेक महिलाओं ने संघ के कार्यों को मजबूत किया।
प्रमुख सामाजिक और राष्ट्रीय अभियान
संघ ने समय-समय पर सामाजिक मुद्दों और राष्ट्रीय हित के लिए अभियान चलाए। 1981 में मीनाक्षीपुरम में हिंदुओं के धर्मांतरण के खिलाफ जागरूकता फैलाने के लिए संघ ने लाखों लोगों को जुटाया। 1964 में विश्व हिंदू परिषद की स्थापना में संघ का योगदान अहम रहा। संघ ने हमेशा राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के लिए कार्य किया।
संकट और प्रतिबंध
स्वतंत्रता के बाद संघ को राजनीतिक कारणों से प्रतिबंध का सामना करना पड़ा। 1948 में गांधी हत्या के बाद, 1975 में आपातकाल के दौरान और 1992 में बाबरी मस्जिद घटना के बाद संघ पर प्रतिबंध लगा। इन कठिन समयों में भी आम लोग और समाज के प्रतिष्ठित लोग संघ के साथ खड़े रहे।
आधुनिक दौर और विस्तार
आज संघ के देशभर में लगभग 83,000 शाखाएं हैं। युवा कार्यकर्ताओं को शारीरिक, बौद्धिक और मानसिक प्रशिक्षण देने के साथ-साथ समाज सेवा के लिए भी तैयार किया जाता है। संघ का उद्देश्य हमेशा रहा है - घर-घर जाकर समाज के हर वर्ग तक सेवा और जागरूकता पहुंचाना।
महिला शाखा और शिक्षा
राष्ट्र सेविका समिति ने महिलाओं को संगठन के विभिन्न सामाजिक कार्यों में सक्रिय बनाया। स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सुधार के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी संघ के कार्य को और प्रभावशाली बनाती है।
शताब्दी वर्ष की योजनाएं
RSS शताब्दी वर्ष में "घर-घर संपर्क" अभियान चला रहा है, ताकि शहरों से लेकर गांवों तक संघ का संदेश पहुंचे। इसके अलावा सेमिनार, कार्यशालाएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
ये भी पढ़ें: Mann ki Baat Highlights: RSS की तारीफ से 'Vocal for Local' तक, PM मोदी ने क्या-क्या कहा? पढ़ें बड़ी बातें












Click it and Unblock the Notifications