सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी पर राहुल गांधी ने तोड़ी चुप्पी, BJP-RSS पर लगाया गंभीर आरोप
Rahul Gandhi On Sonam Wangchuk: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने लद्दाख में हाल ही में हुई हिंसा और सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ लद्दाख के लोगों, उनकी संस्कृति और परंपराओं पर हमला कर रहे हैं। गांधी ने लद्दाख को संवैधानिक सुरक्षा देने और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग की।
लेह में बुधवार को हुई झड़पों में चार लोगों की मौत हो गई थी और कई घायल हुए थे। इस घटना के बाद इलाके में कर्फ्यू जारी है और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को NSA के तहत हिरासत में लिया गया है।

हत्या बंद करो, हिंसा बंद करो- राहुल गांधी
राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि, लद्दाख के अद्भुत लोग, उनकी संस्कृति और परंपराएं बीजेपी और RSS के हमले के तहत हैं। लद्दाखियों ने अपनी आवाज़ उठाने की मांग की। बीजेपी ने जवाब में 4 युवकों की जान ले ली और सोनम वांगचुक को जेल में डाल दिया। हत्या बंद करो। हिंसा बंद करो। धमकियाँ बंद करो। लद्दाख को आवाज़ दो। उन्हें छठी अनुसूची दो।
हिंसा के बाद सोनम वांगचुक को किया गया गिरफ्तार
लेह में हुई हिंसा के बाद सुरक्षा बलों ने कार्रवाई करते हुए दंगों में शामिल 50 लोगों को हिरासत में लिया है। प्रदर्शनकारी राज्य का दर्जा देने और संवैधानिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग कर रहे थे। इस हिंसक झड़प के दौरान चार युवकों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हुए। इस बीच, जलवायु कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक को शुक्रवार को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत गिरफ्तार कर जोधपुर जेल में रखा गया। वांगचुक का यह गिरफ्तारी लद्दाख के लोगों की संवैधानिक मांगों के विरोध में की गई कार्रवाई के रूप में देखी जा रही है।
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लेह में पांचवें दिन भी कर्फ्यू लागू
लेह में हिंसा के बाद इलाके में पांचवें दिन भी कर्फ्यू लागू रहा। उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता सुरक्षा समीक्षा बैठक कर कर्फ्यू में ढील देने या अन्य उपायों पर निर्णय करेंगे। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर लेह जिले में सभी मोबाइल और इंटरनेट सेवाओं को बंद कर दिया। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि यह कदम क्षेत्र की सुरक्षा और शांति बनाए रखने के लिए उठाया गया।
नागरिकों की मांगों को लेकर चर्चा तेज
इस घटना ने लद्दाख के लोगों की संवैधानिक सुरक्षा, राज्य दर्जा और स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं, राजनीतिक नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच इस मामले को लेकर बहस तेज हो गई है। लद्दाख के युवाओं और नागरिकों की मांगों को लेकर केंद्र और स्थानीय प्रशासन के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।
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