मोदी सरकार के दो मंत्रालयों को लेकर RSS से जुड़े संगठन ने लिखी चिट्ठी, की ये मांग
नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े एक संगठन ने मोदी सरकार की शिक्षा नीति के मसौदे का समर्थन किया है लेकिन उनका कहना है कि 8वीं तक के सभी छात्रों को संस्कृत की अनिवार्य शिक्षा दी जानी चाहिए। संघ समर्थित संगठन भारतीय शिक्षण मंडल ने संस्कृति मंत्रालय को एचआईडी मंत्रालय के साथ विलय का सुझाव भी दिया है। संगठन के एक नोट में इन बातों का जिक्र किया गया है।

इस संगठन का कहना है कि ऐसा करने से शिक्षा की गुणवत्ता के दृष्टिकोण से बहुत बेहतर परिणाम मिलेंगे। बीएसएम ने विलय के बाद मंत्रालय को शिक्षा मंत्रालय नाम देने का सुझाव भी दिया है। हालांकि, मानव संसाधन विकास मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मंत्रालय को औपचारिक रूप से ये प्रस्ताव नहीं मिला है।
इस संगठन ने राष्ट्रीय शिक्षा आयोग को अधिक स्वायत्तता दिए जाने का भी सुझाव दिया है। इनके मुताबिक, आयोग का अध्यक्ष आगे भी प्रधानमंत्री को ही बनाए रखा जाना चाहिए। लेकिन उपाध्यक्ष का पद राष्ट्रीय ख्याति वाले किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति को दिया जाना चाहिए, ना कि मानव संसाधन विकास मंत्री को, जैसा कि मसौदे में प्रस्तावित है। साथ ही बीएसएम ने विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत आने की अनुमति देने के सरकार के प्रस्ताव का स्वागत किया, बशर्ते उन्हें किसी तरह की छूट ना दी जाती हो।
भारतीय भाषाओं में उच्च शिक्षा देने पर जोर
बीएसएम ने ये भी कहा है कि स्कूली शिक्षा ही नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा भी सभी भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराई जानी चाहिए। इनके द्वारा जारी नोट के मुताबिक, इंजीनियरिंग, मेडिकल और अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की शिक्षा भी भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराए जाने की ज़रूरत है।'












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