Rooh afza Controversy: 'शरबत जिहाद' पर बवाल! दिल्ली हाई कोर्ट ने क्यों कहा- 'रामदेव किसी के कंट्रोल में नहीं'
Rooh afza Controversy: दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को योग गुरु रामदेव को आदेश दिया कि वे हमदर्द और उसकी मशहूर पेय रूह अफ़ज़ा के खिलाफ सोशल मीडिया पर अपलोड किया गया आपत्तिजनक वीडियो 24 घंटे के भीतर हटाएं।
यह आदेश अवमानना की शिकायत पर दिया गया है, जिसमें रामदेव के विवादास्पद 'शरबत जिहाद' वाले बयान को लेकर आपत्ति जताई गई थी।

कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने पहले ही रामदेव को किसी भी प्रतिद्वंदी उत्पाद (जैसे हमदर्द) को लेकर भविष्य में कोई विवादास्पद बयान या वीडियो जारी न करने का आदेश दिया था। लेकिन गुरुवार को हमदर्द के वकील ने अदालत को सूचित किया कि रामदेव ने फिर से एक नया वीडियो जारी किया, जिसमें आपत्तिजनक बातें कही गईं।
इस पर जस्टिस अमित बंसल ने टिप्पणी करते हुए कहा कि, 'यह वीडियो और आपकी दायर की गई हलफनामा प्राथमिक दृष्टि में अवमानना है। हम अब अवमानना नोटिस जारी करेंगे।'
जस्टिस अमित बंसल ने आगे कहा, 'रामदेव किसी के नियंत्रण में नहीं हैं, वे अपनी ही दुनिया में रहते हैं।'
क्या आदेश हुआ?
रामदेव को आदेश दिया गया है कि वे हमदर्द और उसके उत्पादों के बारे में कही गई आपत्तिजनक बातें हटाएं, और सभी सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से यह वीडियो 24 घंटे के भीतर डिलीट करें। साथ ही, एक हफ्ते के अंदर पालन का हलफनामा दाखिल करें।
हमदर्द के आरोप
हमदर्द के वरिष्ठ अधिवक्ता संदीप सेठी ने कहा कि रामदेव ने अपने वीडियो में यह दावा किया कि, हमदर्द के रूह अफज़ा से कमाई हुई रकम से मदरसे और मस्जिद बनाई जाती हैं। उन्होंने कहा कि, 'इस तरह के वीडियो से उपभोक्ताओं में सांप्रदायिक विभाजन फैलाया जा रहा है। यह न्याय की किसी भी भावना के तहत स्वीकार्य नहीं हो सकता।'
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बाबा रामदेव की सफाई
रामदेव और पतंजलि की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकीलों ने तर्क दिया कि वीडियो भले ही अप्रिय हो, लेकिन यह अवमानना नहीं है अधिकतम यह मानहानि का मामला बन सकता है। रामदेव की ओर से कहा गया, 'हमने कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए वीडियो को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।'
कोर्ट की सख्ती
कोर्ट ने यह भी कहा कि रामदेव पहले भी सुप्रीम कोर्ट में अवमानना के लिए फटकार खा चुके हैं और उनके हलफनामे में कहा गया कि वे कानून का पालन करने वाले नागरिक हैं यह दावा झूठा प्रतीत होता है।
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