पठान सूट के कारण खतरे में जान! पुलवामा के हीरो KJS Dhillon को जूनियर जवान गोली मारने वाला था, पढ़िए रोचक कहानी
लेफ्टिनेंट जनरल KJS Dhillon ने करीब चार साल पहले पुलवामा में हुए आतंकी हमलों के बाद दहशतगर्दों को मुंहतोड़ जवाब दिया था। Tiny उपनाम ने लोकप्रिय ढिल्लन बताते हैं कि कैसे पठान सूट पहनने के कारण जान पर बन आई थी।

रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल KJS Dhillon ने एक इंटरव्यू में बताया है कि कैसे एक बार जम्मू कश्मीर में उनकी जान संकट में फंस गई थी, वो भी एक जूनियर जवान के भ्रम के कारण। ढिल्लन ने सैन्य अधिकारी के रूप में लंबी लाइफ जीने के बाद एक किताब लिखी है। 'कितने गाजी आए, कितने गाजी गए' टाइटल के साथ किताब लिखने वाले ढिल्लन बताते हैं कि सेना में शामिल होने के बाद उनके साथ कई रोचक घटनाएं हुईं। उनकी पलटन 203 साल पुरानी है और ऐतिहासिक बात ये कि आज तक इसे सर्विस से Discontinue नहीं किया गया है।

एक मिनट के भीतर जवाबी कार्रवाई
सेवानिवृत्त अधिकरी ढिल्लन बताते हैं कि उनकी टीम आतंकियों की कार्रवाई का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए हमेशा मुस्तैद रहे, इसके लिए उन्होंने एक मिनट के भीतर जवाबी कार्रवाई की रणनीति बनाई थी। उन्होंने बताया कि यूं तो वर्दी का रंग मायने नहीं रखता, लेकिन एक बार पठान सूट पहने होने के कारण उनके अपने जवान ने गोली मारने की तैयारी कर ली थी। जवान उन्हें ड्रेस और राइफल के साथ देखने कारण आतंकी समझ बैठा था।

फिदायिन हमले से बचने के लिए...
सुरक्षा के मद्देनजर एक मिनट के भीतर आतंकियों को जवाब देने की रणनीति के बारे में ढिल्लन बताते हैं कि राष्ट्रीय राइफल्स में कंपनी कमांडर के रूप में उन्होंने जवानों की कई बार ड्रिल कराई थी। फिदायिन हमले से बचने के लिए उन्होंने एक मिनट के भीतर जवाब देने की रणनीति अपनाई थी। दो बार ये रणनीति कामयाब रही। एक बार रात के समय अचानक अटैक हुआ।

कमांडिंग ऑफिसर के साथ क्विक रिएक्शन टीम
इस हमले के बारे में ढिल्लन बताते हैं कि एक ट्रेनी अधिकारी कश्मीर में पहली पोस्टिंग पर आया था। साउथ कश्मीर में देवर नाम की जगह पर तैनाती के बाद इन्होंने कमांडिंग ऑफिसर के साथ क्विक रिएक्शन टीम को ब्रीफ करने का फैसला लिया। QRT के लिए जगह तय की गई। जवानों को तैनात किया गया। रात 11 साढ़े 11 बजे के फायरिंग शुरू हो गई। रॉकेट लॉन्चर से भी हमले हो रहे थे।

किचन के पास से राइफल लोड करने की आवाज
ढिल्लन बताते हैं कि वे अपने कमरे में थे। वे अपने कमरे में पठान सूट पहनकर बैठे हुए थे। फायरिंग शुरू होने के बाद उन्होंने अपनी एके-47 राइफल उठाई और अपनी पोस्ट की तरफ भागा। उन्हें किचन के पास से राइफल लोड करने की आवाज सुनाई दी। इन्हें लगा कि क्या कोई उन्हें गोली मारने वाला है? वे वापस भागे और अपनी यूनिफॉर्म पहनकर लौटे।

पठान सूट के कारण संकट में फंसी जान!
उन्होंने पठान सूट के कारण संकट में फंसी जान के बारे में बताया, ऑपरेशन खत्म होने के बाद एक जगह कुछ जवान जमा थे। कुक कह रहा था कि उसने एक आतंकी को देखा है, जो पटान सूट, राइफल और लंबी दाढ़ी के साथ कैंप में घुसा है। उसने कहा कि राइफल समय पर लोड नहीं हुई, वरना वो गोली चलाने ही वाला था। इस सबक के बारे में उन्होंने बताया कि किसी भी समय गलत यूनिफॉर्म में नहीं जाना होता।

आतंकियों का सफाया करने का संकल्प
केजेएस ढिल्लन अपनी आर्मी लाइफ के बारे में दी लल्लनटॉप के साथ एक इंटरव्यू के दौरान बताते हैं कि ब्रिगेडियर रहते हुए उन्होंने आतंकियों के खात्मे के लिए नया तरीका इजाद किया था। उन्होंने बताया कि सेना में आम धारणा है कि बख्तरबंद गाड़ियों में अधिकांश कार्रवाई होती है, लेकिन उनका मानना था कि गाड़ियों के बजाय दिमाग की भूमिका अहम होती है। उन्होंने कहा, उत्तरी कश्मीर में LOC के पास घुसपैठ की सूचना के बाद आतंकियों का घेराव किया गया। उन्होंने 18 किलोमीटर तक 50 दिनों की कार्रवाई हुई। पाकिस्तान से संदेश आते थे कि बिरयानी भेजी जाएगी।

आतंकी को बिरयानी नहीं खाने दी
बकौल ढिल्लन, उन्होंने आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान एक भी आतंकी को बिरयानी नहीं खाने दी। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान से आने वाले संदेश को इंटरसेप्ट करने के बाद पता लगा कि आतंकी वारदात के लिए सीमा पार से बहकाकर भेजे गए युवाओं ने पाकिस्तानी आकाओं से सवाल किया। दहशतगर्दों को जिहाद के लिए तैयार करते समय बताया गया था कि कश्मीर की मस्जिदों में अजान नहीं होती है। आकाओं से लड़के पूछते थे, लेकिन इसके बावजूद ब्रेनवॉश का सिलसिला जारी रहता है।












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