भारत में खुदरा मुद्रास्फीति 14 महीने का उच्चतम स्तर पर, खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी से मध्यम वर्ग पर बढ़ा बोझ
India Retail Inflation: भारत की खुदरा मुद्रास्फीति अक्टूबर 2024 में 6.2 प्रतिशत पर पहुंच गई। जो पिछले 14 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। यह वृद्धि भारतीय रिजर्व बैंक की सुरक्षित सीमा को पार कर गई है। मुख्य रूप से खाद्य वस्तुओं, विशेष रूप से सब्जियों, खाद्य तेलों और पेय पदार्थों की बढ़ती कीमतों के कारण। खाद्य मुद्रास्फीति 10.87 प्रतिशत तक पहुंच गई है। जो पिछले वर्ष की तुलना में एक बड़ी बढ़ोतरी है।
खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतें मध्यम आय वर्ग की जेब पर भारी पड़ रही हैं। जिससे खर्च करने की क्षमता में कमी आई है और यह प्रतिकूल प्रभाव कॉर्पोरेट मुनाफे और आर्थिक विस्तार पर भी पड़ा है। सब्जियों की मुद्रास्फीति ने रिकॉर्ड स्तर छू लिया है। जो अक्टूबर में 42.2 प्रतिशत के 57 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। इसके अलावा तेल और वसा की कीमतों में भी तेजी से वृद्धि हुई है। जिसका कारण आयात शुल्क में की गई वृद्धि है।

आर्थिक दबाव बढ़ाता कोर मुद्रास्फीति का उच्च स्तर
खाद्य पदार्थों और ऊर्जा जैसे अस्थिर क्षेत्रों को छोड़कर मापी जाने वाली कोर मुद्रास्फीति भी बढ़कर चार प्रतिशत पर पहुंच गई है। जो 10 महीनों का उच्चतम स्तर है। यह दर्शाता है कि मुद्रास्फीति का दबाव केवल अस्थिर क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। जिससे आशंका है कि बढ़ती कीमतों का यह दौर लंबा खिंच सकता है।
खराब मौसम और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान बने कारण
मौजूदा मुद्रास्फीति पर मौसम और आपूर्ति में रुकावटों ने प्रमुख भूमिका निभाई है। टमाटर जैसी सब्जियों की कीमतें प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में फसल नुकसान के कारण बढ़ी हैं। वहीं खाद्य तेलों पर आयात शुल्क बढ़ाए जाने से तेल की कीमतों में उछाल आया है।
आर्थिक राहत की उम्मीदें, खरीफ और रबी फसलों का रोल
खरीफ फसल और आगामी रबी बुवाई के सीजन से बेहतर पैदावार की उम्मीद की जा रही है। जिससे खाद्य मुद्रास्फीति में कमी आ सकती है। हालांकि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक तेल की कीमतों पर इसके प्रभाव से मुद्रास्फीति पर संभावित असर को लेकर चिंताएं भी बरकरार हैं।
इस बीच प्याज की बढ़ती कीमतों को काबू में लाने के लिए सरकार ने प्याज को 35 रुपए प्रति किलो की सब्सिडी दर पर उपलब्ध कराने जैसे उपाय अपनाए हैं।
RBI की संभावित रणनीति, दरों में कटौती फिलहाल असंभव
मौजूदा माहौल में RBI द्वारा दरों में कटौती की संभावना फिलहाल नहीं दिख रही है। दिसंबर 2024 में स्थिर रुख और फरवरी 2025 में दरों में संभावित छूट के कयास लगाए जा रहे हैं। मुद्रास्फीति में इस उछाल को देखते हुए RBI सतर्क रणनीति अपना सकता है। जिससे वित्त वर्ष 2025 के लिए मुद्रास्फीति अनुमान में वृद्धि की जा सकती है। केंद्रीय बैंक ने रेपो दर को 6.5 प्रतिशत पर स्थिर रखा है। जो भविष्य में उसकी मौद्रिक नीति के फैसलों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
अर्थशास्त्रियों की राय, मंहगाई की मार का दौर रहेगा जारी
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार के हस्तक्षेप और आगामी फसलें भले ही राहत दे सकती हैं। लेकिन वैश्विक और घरेलू कारक भारत के मुद्रास्फीति परिदृश्य को जटिल बनाए हुए हैं।
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