ज्योतिरादित्य सिंधिया क्यों नहीं बन पाएंगे मध्यप्रदेश के सीएम?
नई दिल्ली। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी के साथ कांटे की टक्कर के बाद आखिरकार कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनने में कामयाब रही। इसी के साथ कांग्रेस ने प्रदेश में सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है। हालांकि सीएम पद को लेकर चर्चा अभी पार्टी में चर्चा का दौर जारी है। वैसे तो मध्यप्रदेश को दिग्गज कांग्रेस नेताओं का प्रदेश माना जाता है, लेकिन मुख्यमंत्री पद के दावेदारों के रूप में सिर्फ दो चेहरे आगे दिख रहे हैं। एक दावेदार हैं ज्योतिरादित्य सिंधिया और दूसरे दावेदार हैं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ। ज्योतिरादित्य सिंधिया युवा चेहरा हैं और वे खासे लोकप्रिय भी हैं तो दूसरी ओर गांधी परिवार के साथ तीन पीढ़ियों की राजनीति कर चुके कमलनाथ हैं। सिंधिया के पास प्रचार समिति का जिम्मा है तो कमलनाथ को छह महीने पहले ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का पद सौंपा गया है। बावजूद इसके ज्योतिरादित्य सिंधिया के मध्य प्रदेश का सीएम बनने की संभावना कम लग रही, इसकी कुछ अहम वजहें हैं...

परिपक्व और कम अनुभवी
ज्योतिरादित्य सिंधिया को वैसे तो कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का खास दोस्त माना जाता है, हालांकि सीएम के तौर पर उनके नाम पर मुहर लगेगी इस पर शक है। ऐसा इसलिए क्योंकि कमलनाथ के मुकाबले ज्योतिरादित्य सिंधिया का राजनीतिक अनुभव। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 2001 में राजनीति में कदम रखा। फरवरी 2002 में गुना लोकसभा सीट पर उपचुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे। 2004 में हुए लोकसभा चुनाव में इसी सीट से वे दोबारा चुने गए। मनमोहन सिंह की सरकार में केंद्रीय मंत्री भी रहे। हालांकि सीएम के तौर पर राजनीतिक अनुभव को देखते हुए ऐसा माना जा रहा है कि उन्हें अभी और परिपक्व और अनुभवी होने की जरूरत है।

कमलनाथ इंदिरा के जमाने से कांग्रेस के वफादार
ज्योतिरादित्य सिंधिया भले ही नौजवान हैं, युवाओं में खासे लोकप्रिय हैं लेकिन कमलनाथ इंदिरा के जमाने से कांग्रेस के वफादार हैं। उनके कद्दावर अंदाज को ही देखते हुए ही एक समय कहा जाता था कि मध्यप्रदेश में बिना कमलनाथ की मंजूरी के कांग्रेस पार्टी में कोई भी फैसला नहीं होता था। कमलनाथ और संजय गांधी काफी अच्छे दोस्त थे। उनकी दोस्ती दून स्कूल से शुरू हुई और धीरे-धीरे इस तरह आगे बढ़ी कि कमलनाथ गांधी परिवार के करीब आते चले गए। अब मध्य प्रदेश में 15 साल बाद सत्ता में वापसी कर रही कांग्रेस पार्टी उनके अनुभव को देखते हुए सीएम की जिम्मेदारी उन्हें सौंप सकती है।

दिग्विजय का कमलनाथ को खुला समर्थन
कमलनाथ को सीएम के तौर पर आगे बढ़ने में एक और बड़ी वजह है। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने भी उनका समर्थन किया है। दिग्विजय के खुले समर्थन के बाद कमलनाथ को मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया, उनके अध्यक्ष बनने के बाद उनकी दावेदारी और भी मजबूत हो गई है।

एसपी, बीएसपी भी कमलनाथ के पक्ष में
मध्य प्रदेश में चुनाव नतीजों के बाद कांग्रेस बड़ी पार्टी बन गई है, हालांकि बहुमत से दो कदम पीछे ही रह गई। ऐसे में पार्टी को सहयोगियों की जरूरत थी, जिसमें सपा और बसपा दोनों ने ही कांग्रेस का समर्थन कर दिया है। वहीं कुछ निर्दलीय उम्मीदवार भी कांग्रेस को अपना समर्थन कर रहे हैं, ऐसे में पार्टी बड़े आराम से सरकार बनाने जा रही है। खबर ये भी है कि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी दोनों ने कमलनाथ को सीएम के तौर पर अपना साथ देने की बात कही है। इससे भी उनकी दावेदारी को मुहर लगती दिख रही है।

कमलनाथ के मुकाबले संगठन चलाने का अनुभव नहीं
ज्योतिरादित्य सिंधिया भले ही 2001 से राजनीति में हैं लेकिन अभी उन्हें काफी लंबा सफर तय करना है। कमलनाथ के मुकाबले उन्हें पार्टी और संगठन को चलाने का अनुभव कम ही है। यही वजह है कि चुनाव से पहले पार्टी आलाकमान ने कमलनाथ को पार्टी का अध्यक्ष नियुक्त किया। हालांकि ज्योतिरादित्य उनके सिपहसालार जरूर बने लेकिन अब सीएम के तौर पर कमलनाथ की दावेदारी ज्यादा नजर आ रही है।

मिशन 2019 के लिए कमलनाथ ज्यादा मुफीद
मध्य प्रदेश समेत पांच राज्यों के इस चुनाव को 2019 लोकसभा चुनाव से पहले सेमीफाइनल के तौर पर देखा जा रहा था। ऐसे में जिस तरह से पार्टी ने जीत दर्ज की इसके बाद सभी की निगाहें अब 2019 पर हैं। ऐसे में पार्टी मिशन 2019 को लेकर कमलनाथ को आगे कर सकती है। पार्टी को उम्मीद है कि 2019 लोकसभा चुनाव में कमलनाथ अपने अंदाज में पार्टी और मजबूत बनाएंगे।












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