बच्चों में जल्दी क्यों दिखने लगते हैं डायबिटीज के संकेत? 35 साल तक चले शोध में हुआ खुलासा
नई दिल्ली, 13 नवंबर। बच्चों में डायबिटीज (मधुमेह) का खतरा बढ़ता ही जा रहा है, अभी 40 साल की उम्र के बाद होने वाली यह बीमारी अब युवाओं में भी आम हो गई है। इसका खतरा अब बच्चों पर भी मंडराने लगा है, बहुत कम उम्र में अब उनमें डायबिटीज के संकेत मिलने लगे हैं। हाल ही में सामने आई एक स्टडी में इसका खुलासा किया गया है। करीब 3 दशक तक पुणे के 700 परिवारों पर किए गए परीक्षण में कई चौकाने वाले खुलासे सामने आए हैं।

बच्चों में क्यों जल्दी दिखने लगते हैं डायबिटीज के संकेत
शोधकर्ताओं ने इस स्टडी से समझने की कोशिश की कि भारतीयों में मधुमेह इतना आम क्यों है? इसके अलावा कई लोगों में उनके बचपन से ही डायबिटीज के संकेत मिलने लगे थे। रिपोर्ट के लेखकों ने शुरुआती उम्र में ही डायबिटीज के रोकथाम के लिए रणनीति तैयार करने पर जोर दिया है। बता दें इससे पहले भी मधुमेह के लिए जांच की उम्र को 30 से कम कर के 25 साल करने की सिफारिश की जा चुकी है।

35 वर्षों तक चली स्टडी
पुणे स्थित केईएम अस्पताल के वैज्ञानिक 35 वर्षों से यह समझने के लिए शोध कर रहे हैं कि भारतीयों में मधुमेह इतना आम क्यों है। 1993 में, उन्होंने पुणे के पास के छह गांवों में पुणे मातृ पोषण अध्ययन (पीएमएनएस) शुरू किया, और तब से 700 से अधिक परिवारों पर स्टडी की। उन्होंने महिलाओं को गर्भवती होने से पहले और गर्भावस्था के दौरान, और उनके बच्चों को बचपन, युवावस्था और अब वयस्कों के रूप में ट्रैक किया है।

गर्भ से ही शुरू हो जाती है दिक्कत
पिछले तीन दशकों में शोधकर्ताओं ने 6, 12 और 18 साल की उम्र में ग्लूकोज और इंसुलिन सांद्रता और अन्य महत्वपूर्ण डेटा को मापा। 18 साल की उम्र में, 37 प्रतिशत पुरुषों और 18 प्रतिशत महिलाओं में ग्लूकोज का स्तर (प्रीडायबिटीज) बढ़ा हुआ पाया गया। रिपोर्ट में पता चला कि गर्भ में सब-ऑप्टिमल वाले बच्चों में बचपन से ही मधुमेह के लिए अधिक जोखिम वाले कारक होते हैं। 6 और 12 साल की उम्र में रक्त में ग्लूकोज का स्तर अधिक पाया गया।

इस वजह से होता है मधुमेह
शोधकर्ता इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि ऐसा अग्न्याशय के ठीक से काम ना करने की वजह से हुआ। कई लोगों में वह बढ़ती उम्र में जरूरतों का सामना नहीं कर सका। जब गर्भावस्था के दौरान महिला को ग्लूकोज में न्यूनतम वृद्धि होती है, तो यह भी बच्चे के अग्न्याशय पर जोर देता है। इसकी वजह से कभी-कभी भ्रूण के जीवन के दौरान अग्न्याशय का खराब विकास होता है। इसके अलावा बच्चों में मधुमेह की सबसे बड़ी वजह फास्ट फूड पर अधिक निर्भरता और शारीरिक व्यायाम से बढ़ती दूरी है।
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