वैज्ञानिक शोध आम आदमी के जीवन को बेहतर बनाने के लिए हो: प्रणब मुखर्जी
कोलकाता। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने मंगलवार को कहा कि स्वतंत्रता के बाद से यद्यपि देश ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में मील का पत्थर हासिल किया है, लेकिन हमें अभी काफी दूर जाना है। उन्होंने जोर दिया कि वैज्ञानिक शोध, आम आदमी के लिए सामाजिक, पर्यावरण संबंधी और आर्थिक तौर पर बेहतरी लाने के लिए किए जाने चाहिए।

राष्ट्रपति ने कहा, "कुछ माह पहले ही मंगलयान को मंगल की कक्षा में सफलतापूर्वक प्रवेश कराकर हमने इतिहास रचा है। भारत, मंगल पर पहुंचने वाला चौथा देश बन गया है। भारत पहले ही प्रयास में यह सफलता हासिल करने वाला पहला देश बन गया है। इसके लिए हमने 7.40 करोड़ डॉलर खर्च किया जो कि अन्य देशों के खर्च का एक अंशमात्र है।"
इंफोसिस साइंस फाउंडेशन की ओर से आयोजित समारोह में इंफोसिस प्राइज 2014 के वितरण समारोह में वीडियो संदेश के जरिए प्रणब ने कहा, "एक ओर जहां ये मील के पत्थर हमारे देश के लिए गर्व की बात है, वहीं दूसरी ओर वे यह भी याद दिलाते हैं कि हमें अभी और भी दूरी तय करनी है।"
उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक शोध जानकारी बढ़ाने तथा आम आदमी के जीवन को बेहतर बनाने के लिए किए जाने चाहिए। राष्ट्रपति ने कहा, "वैज्ञानिक शोध जानकारी बढ़ाने तथा आम आदमी के जीवन को बेहतर बनाने के लिए किए जाने चाहिए। हमें अपने लोगों की सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरण संबंधी बेहतरी लानी चाहिए।"
राष्ट्रपति ने इंफोसिस साइंस फाउंडेशन को ये पुरस्कार शुरू करने के लिए भी बधाई दी, जो छह श्रेणियों में शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों को उनकी असाधरण उपलब्धियों के लिए दिए जाते हैं। उन्होंने कहा, "विज्ञान, मानव मस्तिष्क का सृजनात्मक प्रयास है। यह मानव जीवन की उन्नति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। साथ ही प्रौद्योगिकी के विकास में भी इसकी प्रमुख भूमिका है।"












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