रिसर्च: वैक्सीन लेने के 6 महीने बाद भी नहीं कम हुई एंटीबॉडी, तीसरी डोज की जरूरत पर उठे सवाल

बेंगलुरु, 26 सितंबर: कोरोना वायरस के खिलाफ टीकाकरण अभियान युद्धस्तर पर जारी है। मौजूदा वक्त में ज्यादातर स्वास्थ्यकर्मियों को वैक्सीन की दोनों खुराकें दे दी गई हैं, लेकिन कुछ स्वास्थ्यकर्मी तीसरी बूस्टर डोज की मांग कर रहे हैं। इसके लिए जयदेव इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोवास्कुलर साइंसेज एंड रिसर्च ने स्वास्थ्यकर्मियों पर एक रिसर्च की। जिसमें पता चला कि दूसरी खुराक लेने के 6 महीने बाद भी एंटीबॉडी कम नहीं हुई है। ऐसे में तीसरी डोज की जरूरत पर सवाल उठने लगे हैं।

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    माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने फरवरी 2021 में कोविशील्ड वैक्सीन की दो खुराक प्राप्त करने वाले 250 स्वास्थ्यकर्मियों का एंटीबॉडी टेस्ट किया। जयदेव अस्पताल के निदेशक डॉ सीएन मंजूनाथ के मुताबिक स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लोगों पर किए गए टेस्ट में अच्छी एंटीबॉडी प्रतिक्रियाएं दिखाई दीं। जब टेस्ट को दोहराया गया, तो उनमें 99 प्रतिशत पॉजिटिव एंटीबॉडी दिखाई दी। रिसर्च के दौरान पता चला कि 10 कर्मचारी ऐसे हैं, जिनमें अप्रैल से सितंबर के बीच एंटीबॉडी में गिरावट हुई, लेकिन वे सकारात्मक प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया सीमा में बने हुए थे।

    केंद्र ने नहीं लिया फैसला
    बूस्टर डोज की मांग तो हो रही है, लेकिन सरकार ने अभी इसे देने से इनकार किया है। तीन हफ्ते पहले एक रिपोर्ट सामने आई थी, जिसमें कहा गया कि केंद्र सरकार बेहद कम इम्यूनिटी वाले या स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए कोविड-19 संक्रमण से बचाव के वैक्सीन की तीसरी खुराक लगाने की आवश्यकता की समीक्षा कर रही है। इसके बाद इस तीसरी डोज को लेकर कोई फैसला होगा।

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