Indian Army की टॉप 10 रेजिमेंट, जिनके 'War Cry' से कांपता है पाकिस्तान, हमला करते समय किसकी बोलते हैं जय?
Indian Army Regiments and War Cries: देश इस समय देशभक्ति के रंग में डूबा हुआ है। गणतंत्र दिवस (Republic Day) में अब कुछ ही दिन शेष रह गए हैं। 26 जनवरी को कर्तव्य पथ पर जब भारतीय सेना की विभिन्न टुकड़ियां अपने सधे हुए कदमों और बुलंद नारों के साथ कदमताल करती हैं, तो हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सेना की इन रेजिमेंटों का इतिहास सदियों पुराना है?
18वीं और 19वीं शताब्दी में गठित हुई ये रेजिमेंटें आज भी उसी शौर्य और 'वॉर क्राई' (युद्ध नारा) के साथ सीमाओं की रक्षा कर रही हैं, जिसने उन्हें इतिहास के पन्नों में अमर बना दिया। गणतंत्र दिवस के इस खास मौके पर आइए विस्तार से जानते हैं भारतीय सेना की उन प्रमुख रेजिमेंटों के बारे में, जिनकी वीरता की गाथाएं आज भी हर देशवासी को जोश से भर देती हैं।

मद्रास रेजिमेंट: सबसे पुरानी पहचान (Madras Regiment)
मद्रास रेजिमेंट की शुरुआत साल 1758 में हुई थी। इसे भारतीय सेना की सबसे पुरानी पैदल सेना रेजिमेंट माना जाता है। इसकी 9वीं बटालियन को सबसे पुरानी इकाई कहा जाता है।
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युद्ध नारा: "वीर मद्रासी, अदि कोल्ली, अदि कोल्ली" (वीर मद्रासी, हमला कर और खत्म कर)
पंजाब रेजिमेंट: निरंतर सेवा का प्रतीक (Punjab Regiment/Sikh Regiment)
1761 में बनी पंजाब रेजिमेंट को लगातार सेवा में रहने वाली सबसे पुरानी रेजिमेंट माना जाता है। इस रेजिमेंट का गौरवशाली इतिहास विश्व युद्धों से लेकर आधुनिक संघर्षों तक फैला है।
युद्ध नारा: "जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल"
मराठा लाइट इन्फैंट्री: वीरता की परंपरा (The Maratha Light Infantry MLI)
1768 में गठित मराठा लाइट इन्फैंट्री की पहली बटालियन को 'जंगी पलटन' कहा जाता है। यह रेजिमेंट अपनी फुर्ती और अचूक रणनीति के लिए प्रसिद्ध है।
युद्ध नारा: "श्री छत्रपति शिवाजी महाराज की जय"
राजपूताना राइफल्स: पहली राइफल रेजिमेंट (Rajputana Rifles)
1775 में बनी राजपूताना राइफल्स भारत की पहली राइफल रेजिमेंट है। रेगिस्तान से लेकर ऊंचे पहाड़ों तक, इस रेजिमेंट ने हर मोर्चे पर अपनी धाक जमाई है। उत्तर और मध्य भारत के योद्धा समुदायों से भर्ती करने वाली यह रेजिमेंट का मोटो है "वीर भोग्या वसुंधरा"।
युद्ध नारा: "राजा रामचंद्र की जय"
राजपूत रेजिमेंट: शौर्य और सम्मान (Rajput Regiment)
1778 में बनी राजपूत रेजिमेंट अपनी बहादुरी और गौरवशाली परंपराओं के लिए जानी जाती है। युद्ध के मैदान में इनका साहस अद्वितीय होता है।
युद्ध नारा: "बोल बजरंग बली की जय"
द ग्रेनेडियर्स: ताकत की पहचान (The Grenadiers)
1778 में बनी यह रेजिमेंट अपनी शक्ति और अनुशासन के लिए मशहूर है। कठिन परिस्थितियों में भी यह रेजिमेंट दुश्मन के छक्के छुड़ाने में माहिर है।
युद्ध नारा: "सर्वदा शक्तिशाली"
जाट रेजिमेंट: साहस और आत्मबल (Jat Regiment)
1795 में बनी जाट रेजिमेंट ने कई ऐतिहासिक युद्धों में अपनी वीरता दिखाई है। इनका जुझारू व्यक्तित्व इन्हें एक अलग पहचान देता है।
युद्ध नारा: "जाट बलवान, जय भगवान"
कुमाऊं रेजिमेंट: पहाड़ों से निकली बहादुरी (Kumaon Regiment)
1813 में शुरू हुई कुमाऊं रेजिमेंट का इतिहास बलिदानों से भरा है। मेजर शैतान सिंह जैसे वीरों ने इसी रेजिमेंट से आते हुए देश का मान बढ़ाया था।
युद्ध नारा: "कालिका माता की जय"
गोरखा रेजिमेंट: निडर योद्धाओं की पहचान (Gorkha Regiment)
1815 में बनी गोरखा राइफल्स अपनी निडरता के लिए वैश्विक स्तर पर जानी जाती है। इनके साहस के आगे दुश्मन का टिकना नामुमकिन होता है।
युद्ध नारा: "जय महाकाली, आयो गोरखाली"
जम्मू-कश्मीर राइफल्स: उत्तर की ढाल (Jammu-Kashmir Rifles JAK Rifles)
1820 में बनी जम्मू-कश्मीर राइफल्स की शुरुआत डोगरा सेना के रूप में हुई थी। आज यह रेजिमेंट उत्तरी सीमाओं की सुरक्षा में अहम भूमिका निभा रही है।
युद्ध नारा: "दुर्गा माता की जय"
इन रेजिमेंटों का इतिहास सिर्फ तारीखों का संकलन नहीं, बल्कि बलिदान और देशभक्ति की एक जीती-जागती मिसाल है। इस गणतंत्र दिवस पर जब आप परेड देखें, तो इन वीर जवानों के पीछे छिपे सदियों पुराने गौरव को जरूर याद करें।
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