Women Reservation Bill: महिला आरक्षण बिल पर क्या बोला विपक्ष? एक-एक करके जानिए सभी की प्रतिक्रिया
Women Reservation Bill 2023: नए संसद के विशेष सत्र के दूसरे दिन मोदी सरकार ने लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पेश कर दिया है। इस कानून के बाद लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% रिजर्वेंशन लागू किया जाएगा। ॉ
हालांकि यह कानून 2029 से लागू होगा। वहीं अब इस बिल का स्वागत करते हुए विपक्षी दलों ने मोदी सरकार को घेरने का काम किया है।

महिला आरक्षण बिल को मोदी सरकार ने 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम विधेयक' नाम दिया है। वहीं अब बिल पर पक्ष-विपक्ष के नेताओं की लगातार प्रतिक्रिया सामने आ रही है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट पर मोदी सरकार पर निशाना साधा।
महिलाओं के साथ विश्वासघात- राहुल गांधी
राहुल गांधी ने ट्वीट करते हुए लिखा- आरक्षण बिल की क्रोनोलॉजी समझिए। यह बिल आज पेश जरुर हुआ लेकिन हमारे देश की महिलाओं को इसका फायदा जल्द मिलते नहीं दिखता। ऐसा क्यों? क्योंकि यह बिल जनगणना के बाद ही लागू होगा। आपको बता दें, 2021 में ही जनगणना होनी थी, जोकि आज तक नहीं हो पाई।
आगे यह जनगणना कब होगी इसकी भी कोई जानकारी नहीं है। खबरों में कहीं 2027 तो 2028 की बात कही गई है। इस जनगणना के बाद ही परिसीमन या निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण होगा, तब जाकर महिला आरक्षण बिल लागू होगा।
मतलब PM मोदी ने चुनाव से पहले एक और जुमला फेंका है और यह जुमला अब तक का सबसे बड़ा जुमला है।मोदी सरकार ने हमारे देश की महिलाओं के साथ विश्वासघात किया है, उनकी उम्मीदों को तोड़ा है।
कांग्रेस महासचिव बोले-इंतजार करना होगा
महिला आरक्षण बिल पर कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि यह बिल आया अच्छी बात है लेकिन इसमें कुछ और करने की जरूरत थी, महिलाओं के आरक्षण के तहत SC, ST का आरक्षण तो ठीक है लेकिन अन्य OBC समुदाय भी आरक्षण का इंतजार कर रहा है। सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वे ओबीसी के लिए क्या करने जा रहे हैं...वे कह रहे हैं कि परिसीमन के बाद ही इसे लागू किया जाएगा तो महिलाओं को अब और कितने दिनों तक इंतजार करना होगा।
AAP ने बिल को लेकर कही ये बात
आम आदमी पार्टी की नेता और दिल्ली सरकार में मंत्री आतिशी ने कहा कि 2024 के चुनावों से पहले महिलाओं को आरक्षण नहीं मिलने वाला है। ये बिल कहता है कि ये जब पास होगा, तो पहले जनगणना होगी, जनगणना आधार पर परिसीमन होगा, फिर परिसीमन के आधार पर आरक्षण दिया जाएगा। जनगणना होने में कम से कम एक साल का समय लगता है, उसके बाद परिसीमन प्रक्रिया शुरू होगी। MCD जैसे छोटे से परिसीमन करने में 6 महीने लगे इलेक्शन कमीशन को। पूरे देश में 1 - 2 साल लगेंगे।
सांसद प्रियंका चतुर्वेदी का बयान
महिला आरक्षण बिल पर शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, "मैं उम्मीद करती हूं कि यह तुरंत लागू होगा लेकिन बिल में यह लिखा है कि यह परिसीमन के बाद ही लागू होगा। इसका यह मतलब हुआ कि यह आरक्षण 2029 तक लागू नहीं हो सकता। आपने दरवाजे तो खोल दिए हैं लेकिन दरवाजों पर महिलाओं के लिए अभी भी 'नो एंट्री' है।"
जानें महबूबा मुफ्ती ने क्या कहा?
बिल पर PDP प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने कहा, "NDA की सरकार को 10 साल होने वाले हैं। अगर उन्होंने यह पहले ही किया होता तो 2024 के चुनाव में महिलाओं को बड़ी तादाद में भाग लेने का मौका मिलता। लेकिन देर आए, दुरुस्त आए, अच्छी बात है... देश की तरक्की में यह एक अहम कदम होगा।"
सपा सांसद का बयान
समाजवादी पार्टी सांसद एसटी हसन ने कहा, "महिला आरक्षण बिल के हम समर्थन में हैं, क्योंकि अभी नहीं पता कि इसमें SC/ST, OBC और मुस्लिम का आरक्षण है या नहीं। हम चाहते हैं कि इसमें भी इनका आरक्षण हो। हमारी मांग की यह बिल चुनाव आयोग के ऊपर ना डाला जाए, बल्कि पार्टियों को जरूरी किया जाए कि वे अपने हिसाब से अपने प्रतिनिधियों को टिकट दें।"
'वे राजनीति के अलावा कुछ नहीं सोच सकते'
महिला आरक्षण बिल पर राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने कहा, "वे (बीजेपी सरकार) 2024 में राजनीतिक फायदा चाहते हैं और महिलाओं को बताना चाहते हैं कि उन्होंने इतना ऐतिहासिक काम किया। उन्हें यह काम 2014 में करना चाहिए था। महिला आरक्षण विधेयक लागू होने से पहले जनगणना और परिसीमन होगा। अगर जनगणना और परिसीमन नहीं हुआ तो क्या होगा? वे महिलाओं को सिर्फ सपने दिखा रहे हैं कि उन्हें 2029 में आरक्षण मिलेगा। वे राजनीति के अलावा कुछ नहीं सोच सकते।''












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