क्या सच में कभी चित्तौड़ की रानी थी पद्मावती, क्या कहते हैं इतिहासकार?

इतिहासकार इरफान हबीब ने ट्वीट कर कहा है कि पद्मावती एक ऐसा किरदार है जिसे कवि मलिक मुहम्मद जायसी ने पद्मावत में रचा और इसका कोई ऐतिहासिक तथ्य नहीं है।

नई दिल्ली। फिल्‍म डायरेक्‍टर संजय लीला भंसाली इन दिनों फिल्‍म 'पद्मावती' की शूटिंग राजस्थान के नाहरगढ़ फोर्ट में कर रहे हैं। शुक्रवार को उनके साथ वहां मारपीट और बदसलूकी की गई। करणी सेना नाम के सगंठन के लोगों ने भंसाली के साथ बदतमीजी की और शूटिंग के लिए रखे उपकरणों और स्‍पीकर वगैरह को तोड़ दिया। संगठन का आरोप है कि भंसाली की फिल्‍म में इतिहास से जुड़े तथ्‍यों और रानी पद्मावती की छवि को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। संगठन को अलाउद्दीन खिलजी और रानी पद्मावती के बीच कथित रूप से फिल्माए जा रहे लव सीन पर आपत्ति है।

क्या सच में कभी चित्तौड़ की राजधानी थी पद्मावती

संजय लीला भंसाली के साथ बदतमीजी के बाद बॉलीवुड के लोगों में गुस्सा है। बहुत से लोगों ने सोशल मीडिया के जरिए इस घटना पर कड़ी आपत्ति की है। वहीं इस बात को लेकर भी बहस शुरू हो गई है कि क्या सचमुच पद्मावती नाम की कोई रानी कभी थी? पद्मावती और अलाउद्दीन खिलजी के बीच क्या कोई प्रेम था? या फिर खिलजी बल से पद्मावती को हासिल करना चाहता था? बताया जाता है कि जिस वक्त अलाउद्दीन खिलजी दिल्ली पर राज कर रहा था, उस समय पद्मावती चित्तौड़ की रानी थी। पद्मावती बला की खूबसूरत थी और अलाउद्दीन उन्हें देखकर आपा खो बैठा था। लेकिन इस कहानी की हकीकत क्या है?

फिक्शन कैरेक्टर पर शोर मचा रहे लोग
पद्मावती पर चर्चा के बीच जाने-माने इतिहासकार इरफान हबीब ने ट्विटर पर लिखा है कि एक ऐसे किरदार के लिए लोग हल्ला और मार-पीट कर रहे हैं, जिसका इतिहास से कोई सरोकार ही नहीं है। इरफान हबीब के एक के बाद एक कई ट्वीट कर कहा है कि पद्मावती एक ऐसा किरदार है जिसे कवि मलिक मुहम्मद जायसी ने पद्मावत में रचा। ये 1540 की बात हैं और 1540 से पहले पद्मावती का कोई एतेहासिक रिकॉर्ड नहीं मिलता है। हबीब ने लिखा कि राजस्थान के इतिहास पर गहन अध्ययन करने वाले प्रोफेसर केएस लाल और प्रोफेसर गौरी शंकर ओझा ने चित्तौड़ में पद्मावती नाम की रानी होने की बात को पूरी तरह से खारिज किया है।

कुछ लोगों ने ट्विटर पर चित्तौड़गढ़ के किले में पद्मावती का इतिहास बताए जाने की बात पर हबीब ने कहा कि कुछ फिक्शन को लोग इतिहास बना देते हैं लेकिन तथ्य इसे झुठलाते हैं। उन्होंने कहा कि फिल्म मुगले-आजम में दिखाए गए अनारकली के किरदार को भी बहुत से लोग हकीकत कहते हैं लेकिन ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि जहांगीर को अनारकली से इश्क हुआ या फिर अकबर ने उसको दीवारों में चुनवाया हो। इरफान हबीब ने एक फिक्शनल कैरेक्टर पर हिंसा को बेवजह कहा और इसकी निंदा की है।

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