रामजी प्रभु मंदिर: मणिपुर में भी मौजूद है सदियों पुराना राम मंदिर
भगवान राम का जिक्र होते ही सबसे पहले लोगों के मन में अयोध्या के राम मंदिर का ख्याल आता है। लेकिन देश में कई ऐसे राम मंदिर हैं। जिनका संबंध रामायण काल से है। इन्हीं में से एक मंदिर रामजी प्रभु का है। जो मणिपुर में स्थित है।
"रामजी प्रभु" का मंदिर इंफाल पूर्वी जिले के अंतर्गत वांगखेई निंगथेम पुखरी मापल में स्थित है। जो कि रॉयल पैलेस से कुछ ही दूरी पर स्थित है। मंदिर में तीन अलग-अलग मूर्तियां हैं- राम, लक्ष्मण और हनुमान। इनके अलावा गरीब निवाज और हाथ में हथकड़ी लगी संती दास गोसाईं की मूर्तियां भी हैं।

राज्य के सबसे पुराने मंदिरों में से एक रामजी प्रभु के मंदिर का निर्माण संभवतः अठारहवीं शताब्दी के पूर्वार्ध (1709-1789) में गरीबनिवाज़ महाराज के समय में हुआ था। बाद में इस मंदिर में सीता माता, भरत और शत्रुघ्न की मूर्तियां भी जोड़ी गईं। कहा जाता है कि, मणिपुर-बर्मा युद्ध के दौरान भगवान राम की मूर्ति गायब हो गई थी। बाद में ये जंगल में मिली थी।
स्थानीय लोग सजीबू (अप्रैल) की 9 तारीख को लोग राजा की उपस्थिति में श्री राम के राज्याभिषेक के रूप में "राम नवमी" मनाते हैं। इसके अलावा कलेन (मई) की 9 तारीख को "सीता नवमी" हर साल कई भक्तों द्वारा मनाई जाती है। "राम नवमी" और "सीता नवमी" के अलावा लोग इस मंदिर में 'क्वाक जात्रा' उत्सव भी मनाते हैं।
इन दिनों में मूर्तियों की उपस्थिति में रास लीला की जाती है। ये नृत्य देवताओं को अर्पित करने की एक साधन है। "रामजी प्रभु मंदिर" ईंटों और सीमेंट से बनाया गया है। जो सफेद रंग में रंगा हुआ है। इसके प्रांगण में सफेद टाइलें लगाई गई हैं जिससे मंदिर का बहुत सुंदर दृश्य दिखाई देता है। यहां एक "मंडप" भी है जहां त्योहारों और अवसरों के दौरान भक्त ठहरते हैं। यह मंदिर अब "मणिपुरी मनोहरसाई आश्रम" की देखरेख में है।












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