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मकर संक्रांति के बाद होगा राम मंदिर ट्रस्ट का ऐलान, जानिए किस-किस को मिल सकती है जगह?

नई दिल्ली- अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट का ऐलान मकर संक्रांति के बाद कभी भी हो सकता है। माना जा रहा है कि अभी खरमास चल रहा है, इसलिए सरकार ट्रस्ट के सदस्यों की घोषणा नहीं कर रही है। लेकिन, मकर संक्रांति के बाद किसी भी वक्त इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी हो सकती है। बता दें कि हिंदू धर्म में खरमास में किसी भी शुभ काम की शुरुआत करने से परहेज किया जाता है और मकर संक्रांति के बाद वह शुभकाल शुरू हो जाता है। हालांकि अभी तक जो जानकारियां निकल कर सामने आई हैं, उससे एक बात साफ है कि राम मंदिर ट्रस्ट में भारतीय जनता पार्टी के किसी भी नेता को जगह मिलने की संभावना नहीं है। यही नहीं, राम मंदिर ट्रस्ट आम जनता से भी भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिए बढ़-चढ़कर दान देने की अपील कर सकता है।

मकर संक्रांति के बाद कभी भी हो सकता है ट्रस्ट का ऐलान

मकर संक्रांति के बाद कभी भी हो सकता है ट्रस्ट का ऐलान

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए स्वतंत्र ट्रस्ट के निर्माण को लेकर बातचीत की प्रक्रिया लगभग पूरी ही होने वाली है। ईटी को सरकार के दो बड़े अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी है, जिसमें एक केंद्र सरकार और दूसरे उत्तर प्रदेश सरकार के बड़े अधिकारी हैं। जहां तक मंदिर निर्माण ट्रस्ट के सदस्यों का सवाल है तो इन अधिकारियों ने साफ कहा है कि इस ट्रस्ट में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री समेत किसी भी बीजेपी नेता को शामिल किए जाने की संभावना नहीं है। बल्कि, इस ट्रस्ट में धार्मिक नेताओं के अलावा केंद्र के साथ-साथ उत्तर प्रदेश सरकार के कुछ चुनिंदा अधिकारियों को जगह दिए जाने की संभावना है। एक अधिकारी के मुताबिक, 'मकर संक्रांति के बाद किसी भी दिन अधिसूचना को सार्वजनिक कर दिया जाएगा। हमारे पास 9 फरवरी तक का समय है, जो कि सुप्रीम कोर्ट ने ट्रस्ट बनाने के लिए तीन महीने का समय दिया हुआ है।' उन्होंने कहा कि 16 दिसंबर से जारी खरमास 14 जनवरी को खत्म हो रहा है।

आम जनता से भी मांगा जाएगा दान

आम जनता से भी मांगा जाएगा दान

राम मंदिर ट्रस्ट अयोध्या में भव्य मंदिर निर्माण के लिए आम जनता से भी दान देने की अपील कर सकता है। माना जा रहा है कि इसके लिए प्रति परिवार कम से कम 11 रुपये चंदा देने की मांग की जा सकती है और इस संबंध में बीजेपी के नेताओं की ओर से जनता से खास अपील भी किए जाने की बात कही जा रही है। गौरतलब है कि झारखंड में चुनाव प्रचार के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राम मंदिर निर्माण के लिए हर परिवार से 11 रुपये बतौर चंदा दान देने की गुजारिश की थी। यूपी के एक अधिकारी ने बताया कि 'इसी तरह की अपील पूरे देश में भी की जा सकती है।'

गृहमंत्रालय में अयोध्या डेस्क बनाया गया है

गृहमंत्रालय में अयोध्या डेस्क बनाया गया है

बता दें कि पिछले 2 जनवरी को ही अयोध्या से संबंधित मामलों को देखने के लिए केंद्रीय गृहमंत्रालय में अलग से एक अयोध्या डेस्क बनाया गया है। इस डेस्क की अगुवाई एडिश्नल सेक्रेटरी ज्ञानेश कुमार कर रहे हैं। इस काम में उनके साथ दो और अधिकारियों को शामिल किया गया है। अब अयोध्या से जुड़े सभी मसलों को गृह मंत्रालय का यही डेस्क देख रहा है। बता दें कि गृह मंत्रालय में एडिश्नल सेक्रेटरी ज्ञानेश कुमार केरल कैडर के 1988 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और गृह मंत्रालय की जम्मू-कश्मीर और लद्दाख से जुड़े विभागों के भी प्रमुख रहे हैं। आर्टिकल-370 के तहत जम्मू-कश्मीर को मिले विशेषाधिकार को खत्म किए जाने और प्रदेश को 2 केंद्रशासित प्रदेशों के रूप में बंटवारे के ऐतिहासिक फैसले में भी वे बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। उनके इन्हीं अनुभवों को देखते हुए शायद केंद्र सरकार ने उन्हें अयोध्या डेस्क की जिम्मेदारी सौंपी है।

ट्रस्ट के साथ ही मस्जिद के लिए जमीन की भी होगी घोषणा

ट्रस्ट के साथ ही मस्जिद के लिए जमीन की भी होगी घोषणा

अयोध्या के लिए राम मंदिर ट्रस्ट और मस्जिद के लिए जमीन का ऐलान भी एक साथ ही किया जाएगा। जानकारी के मुताबिक सरकार मस्जिद के लिए 5 एकड़ जमीन राम मंदिर परिसर में अधिग्रहित 67 एकड़ भूमि से बाहर देना चाहती है। इस संबंध में उत्तर प्रदेश सरकार ने 3-4 जमीन की लिस्ट केंद्र सरकार को सौंपी है, जो अयोध्या में मौजूद '14 कोसी' परिक्रमा के दायरे के बाहर शहर से गुजरने वाले हाइवे पर है।

9 फरवरी को पूरी हो रही है सुप्रीम कोर्ट के आदेश की मियाद

9 फरवरी को पूरी हो रही है सुप्रीम कोर्ट के आदेश की मियाद

बता दें कि 9 नवंबर, 2019 को सुनाए ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में राम जन्मभूमि की 2.77 एकड़ की पूरी विवादित जमीन का मालिकाना हक रामलला को देकर वहां भव्य राम मंदिर बनाने का रास्ता साफ कर दिया है। इस फैसले से अयोध्या में राम जन्मभूमि को लेकर सदियों से चले आ रहे विवाद का भी खात्मा हो चुका है। अपने फैसले में अदालत ने सुन्नी वक्फ बोर्ड को अयोध्या में ही किसी अहम स्थान पर 5 एकड़ जमीन देने का सरकार को आदेश दिया था। साथ ही केंद्र सरकार को मंदिर निर्माण और उसके संचालन के लिए एक ट्रस्ट बनाने का आदेश भी दिया था। इस ट्रस्ट में निर्मोही अखाड़ा को भी पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया जाना सुनिश्चित किया गया है। ट्रस्ट बनाने और मस्जिद के लिए जमीन की तलाश के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को तीन महीनों का वक्त दिया है, जिसकी मियाद 9 फरवरी को पूरी हो जाएगी। सुप्रीम कोर्ट की 5 सदस्यीय इस संविधान पीठ की अगुवाई पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने की थी।

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