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राम लला की प्रतिमा के लिए जिस गांव ने दिए पत्थर, वहां के दलित क्यों हुए नाराज, बीजेपी एमपी की एंट्री रोकी?

अयोध्या में रामलला के प्राण प्रतिष्ठा के मौके पर कर्नाटक के मैसूर जिले में बीजेपी सांसद प्रताप सिम्हा को भारी फजीहत झेलनी पड़ी है। वह उस गांव में जाना चाहते थे, जहां से रामलला की मूर्ति के लिए पत्थर मिला है, लेकिन गांव के दलितों ने उनका विरोध कर दिया।

सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो आए हैं, जिसमें दिख रहा है कि भगवा गमछा डाले बीजेपी नेता का कुछ गांव वालों के साथ जोरदार बहस चल रही है। ईटी ऑनलाइन की एक रिपोर्ट के मुताबिक हालात इस कदर हो गए कि नाराज ग्रामीणों को शांत करने के लिए उन्हें पुलिस की सहायता लेनी पड़ी।

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रामलला के लिए पत्थर भेजने वाले गांव में बीजेपी सांसद का विरोध
रामलला प्राण प्रतिष्ठा के मौके पर बीजेपी ने पूरे देश में सोमवार को कार्यक्रम आयोजित किए हैं। उसी सिलसिले में मैसूर-कोडागु लोकसभा सीट से दो बार के भाजपा सांसद प्रताप सिम्हा उस गांव की ओर जाना चाहते थे, जिसने रामलला की मूर्ति के लिए पत्थर उपलब्ध कराकर अपना नाम इतिहास में दर्ज करा लिया है।

दलितों ने रोका बीजेपी एमपी का रास्ता
लेकिन, उस गांव के दलितों ने भाजपा नेता का रास्ता रोक दिया। उनका आरोप है कि वे एक दशक से अपनी उपेक्षा का समना कर रहे हैं। इस दौरान कुछ ग्रामीणों के साथ सांसद की तीखी नोंक-झोंक भी हुई।

खुद की उपेक्षा का आरोप लगा रहे थे कुछ दलित
सिम्हा 2014 और 2019 दोनों लोकसभा चुनावों में बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीते हैं। दलितों का आरोप है कि 10 वर्षों से उनकी चिंताओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। सिम्हा के साथ जेडीएस के स्थानीय एमएलए जीटी देवगौड़ा भी मौजूद थे।

स्थिति इतनी बिगड़ गई की पुलिस एस्कॉर्ट को दखल देना पड़ा और आक्रोशित ग्रामीओं को रोकना पड़ा। वीडियो में दिख रहा है कि हल्के हरे रंग की शर्ट वाला एक व्यक्ति ज्यादा आक्रोशित है, जिसे बहुत मुश्किल से रोका गया।

दलितों ने कहा- हम भी भगवान राम का सम्मान करते हैं
सिम्हा और उनके साथ मौजूद लोगों ने काफी कोशिश की कि उन्हें जाने दिया जाए, लेकिन विवाद सुलझा नहीं। वह व्यक्ति कहते सुना जा रहा है, 'आपने कुछ भी नहीं किया है। सबकुछ हमने किया है। हम भी भगवान राम का सम्मान करते हैं। कृप्या चले जाइए।'

बता दें कि अरुण योगीराज नाम के जिस मूर्तिकार ने रामलला की यह अद्भुत मूर्ति बनाई है, वे भी कर्नाटक के मैसूर के ही रहने वाले हैं।

कुछ देर बाद बीजेपी सांसद मान गए और लौटने लगे, लेकिन मुख्य प्रदर्शनकारी ने उनका फिर भी पीछा किया। पुलिस उन्हें गाड़ी में बिठाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन भाजपा सांसद हालात को शांत करने का प्रयास करते नजर आ रहे थे।

संसद सुरक्षा चूक में भी विवादों में आ चुके हैं प्रताप सिम्हा
प्रताप सिम्हा इससे पहले हाल ही में संसद में हुई सुरक्षा चूक को लेकर भी विवादों में आ चुके हैं। उनके दफ्तर से दो लोगों सागर शर्मा और डी मनोरंजन के लिए विजिटर पास का अनुरोध किया गया था।

गौरतलब है कि 6 लोगों ने जिस तरह से संसद के अंदर स्मोक केन छोड़ा था, उससे संसद की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल पैदा हुए हैं। इसकी वजह से मोदी सरकार विपक्ष के निशाने पर भी आई है।

बाद में भाजपा सांसद ने लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला से मिलकर अपनी सफाई दी थी। उन्होंने कहा था कि एक व्यक्ति के पिता ने उनसे अपने बेटे के नए संसद भवन को देखने के लिए पास की गुजारिश की थी। इसी आधार पर उन्होंने इसकी सिफारिश की थी।

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