Rajya Sabha Elections:गुजरात में कांग्रेस को झटके पे झटके, ऐसे बदल गया पूरा समीकरण
नई दिल्ली- गुजरात राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस दो सीटें जीतने का मंसूबा लेकर चली थी, लेकिन उसके इस मंसूबे पर अपने ही विधायक पानी फेरते जा रहे हैं। पांच विधायकों ने पहले ही पार्टी का साथ छोड़कर विधानसभा में उसकी खटिया खड़ी कर दी थी, दो दिनों में तीन विधायकों का विधायकी से इस्तीफा झेलना उसके लिए और मुश्किल हो गया है। जाहिर है कि कांग्रेस अपने विधायकों के इस्तीफे के लिए भाजपा पर दोषारोपण कर रही है और बीजेपी कांग्रेस पर यह कहकर पलटवार कर रही है कि जब उसके विधायकों का ही अपने आलाकमान से मोहभंग हो चुका है तो उसपर बेमतलब आरोप लगाने से कुछ नहीं होने वाला। लेकिन, तथ्य ये है कि एक के बाद एक विधायकों के झटके ने गुजरात में कांग्रेस को अंदर से हिला रखा है। क्योंकि, इसके चलते 19 जून को होने जा रहे राज्यसभा चुनाव का पूरा समीकरण ही बदल गया है।
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गुजरात में कांग्रेस को दो दिन में 3 झटके
कांग्रेस को शुक्रवार को मोरबी से पार्टी विधायक ब्रिजेश मेरजा ने झटका दिया। उनके इस्तीफे के बारे में विधानसभा स्पीकर राजेंद्र त्रिवेदी ने मीडिया को बताया, 'मैंने इसे स्वीकार कर लिया है। यह ब्रिजेश मेरजा हैं, मोरबी के विधायक।' बुधवार को पार्टी के दो और विधायकों अक्षय पटेल और जीतू चौधरी ने विधानसभा अध्यक्ष को अपनी विधायकी से इस्तीफा सौंपा था, जिसे गुरुवार को स्वीकार कल लिया गया था। राज्यसभा चुनाव से लगभग दो हफ्ते पहले पार्टी के तीन-तीन विधायकों का इस तरह से विधानसभा की सदस्यता छोड़ना कांग्रेस के लिए असहनीय साबित हो रहा है। इन तीन इस्तीफों से सदन में कांग्रेस विधायकों की संख्या घटकर 65 रह गई है, क्योंकि मार्च से अबतक पार्टी के कुल 8 विधायक अपनी विधानसभा की सदस्यता छोड़ चुके हैं।

कांग्रेस के 8 विधायकों ने छोड़ा साथ
गुजरात में राज्यसभा की 4 सीटों के लिए 19 जून को चुनाव होने हैं। ये चुनाव मार्च में ही होने तय थे, लेकिन कोरोना वायरस और लॉकडाउन की वजह से चुनाव आयोग को तारीखें बढ़ानी पड़ी हैं। इन चार सीटों में से अभी तक तीन पर भारतीय जनता पार्टी का कब्जा था और एक सीट कांग्रेस के पास थी। कांग्रेस के विधायकों के इस तरह से इस्तीफे का असर सदन के सदस्यों की कुल संख्या पर भी पड़ा है, जो अब घटकर सिर्फ 172 रह गई है। गुजरात विधानसभा में अब कुल 10 सीटें खाली हो गई हैं। सदन की दो सीटें, कानूनी विवादों की वजह से खाली हैं।

तीसरी सीट भी जीतने की कोशिश में भाजपा
भाजपा के पास गुजरात विधानसभा में कुल 103 विधायक हैं और उसने 4 में से 3 सीटों के लिए अभय भारद्वाज, रामीलाबेन बारा और नरहरि अमीन को अपना उम्मीदवार बनाया है। मौजूदा स्थिति में भाजपा के दो प्रत्याशियों की जीत तो तय लग रही है और कांग्रेस के विधायकों ने जैसे-जैसे इस्तीफा दिया है, उसके तीसरे उम्मीदवार की जीत की संभावना भी बढ़ती जा रही है। जानकारों के मुताबिक अब पार्टी को तीसरे उम्मीदवार की जीत की गारंटी के लिए सिर्फ दो और वोटों की दरकार है। यही वजह है कि कांग्रेस अब अपने बचे हुए विधायकों को कुछ समूहों में बांटकर इधर-उधर छिपाने की कोशिशों में जुट चुकी है।

बदला समीकरण, बढ़ गई कांग्रेस की टेंशन
2017 के दिसंबर में गुजरात विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने जिस तरह से अपने संख्या बल में इजाफा किया था, उसके भरोसे वह निश्चिंत थी कि अबकी बार तो वह एक सीट भाजपा से जरूर झटक लेगी। लेकिन, समय का चक्र ऐसे घूम चुका है, जिसमें शख्तिसिंह गोहिल और भरत सिंह सोलंकी में से किसी एक का ही राज्यसभा पहुंचना संभव लग रहा है। वैसे पार्टी ने उम्मीदें नहीं छोड़ी हैं। उसे भारतीय ट्राइबल पार्टी के दो, एनसीपी के एक और जिग्नेश मेवाणी (निर्दलीय) के भरोसे चमत्कार का भरोसा है। जाहिर है कि बदले हुए समीकरण में ये 4 वोट बहुत ही अहम हो गए हैं। लेकिन, जब कांग्रेस के लिए इस समय अपने ही विधायकों पर पूरा भरोसा हासिल कर पाना मुश्किल हो रहा है, दूसरों के दम पर दिल्ली में दम कैसे दिखाएगी। जबकि, राज्य में सत्ता भाजपा के हाथों में है।












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