राज्यसभा की 18 सीटों पर भाजपा ने कैसे चला मास्टर स्ट्रोक, जानिए सभी सीटों की Inside Story
लखनऊ, 30 मई। एक के बाद एक लगातार कई चुनाव हारने के बाद कांग्रेस पार्टी के सामने अस्तित्व का संकट मंडरा रहा है। लगातार दो लोकसभा चुनाव में हार, कई बड़े राज्यों में पार्टी की शिकस्त के बाद कांग्रेस पार्टी के लिए खुद को फिर से खड़ा करने का संकट मंडरा रहा है। पार्टी के युवा नेता से लेकर वरिष्ठ नेता तक कांग्रेस से दूरी बना रहे हैं। एक के बाद एक बडे़ नेता पार्टी को छोड़ रहे हैं। कई राज्यों में अंतर्कलह के चलते कांग्रेस पार्टी की हाल के चुनावों में दुर्दशा देखने को मिली। लेकिन बावजूद इसके कांग्रेस पार्टी को फिर से नए सिरे से खड़ा करने के लिए कुछ बड़ा बदलाव होता नजर नहीं आ रहा है। आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर जिस तरह से कांग्रेस पार्टी ने 10 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की है उसको लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। वहीं भारतीय जनता पार्टी ने जिन 16 उम्मदीवारों की लिस्ट को जारी किया है उसमे पार्टी की मजबूत रणनीति देखने को मिल रही है।
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10 जून को 57 सीटों पर चुनाव
बता दें कि 10 जून को राज्यसभा की 57 सीटों पर 15 राज्यों में राज्यसभा चुनाव होने हैं। वहीं जुलाई माह में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होना है। ऐसे में राष्ट्रपति चुनाव से पहले राज्यसभा के चुनाव को काफी अहम माना जा रहा है। वहीं तमिलनाडु में भी राज्यसभा की 6 सीटें खाली हो रही हैं। बिहार में भी पांच राज्यसभा की सीटें खाली हो रही हैं, जबकि कर्नाटक और राजस्थान से 4-4 राज्यसभा की सीटें खाली हो रही हैं। मध्य प्रदेश, ओडिशा से 3-3, पंजाब, झारखंड, हरियाणा, छत्तीसगढ़, तेलंगाना से 2-2 राज्यसभा की सीटें खाली हो रही हैं वहीं उत्तराखंड से एक राज्यसभा की सीट खाली हो रही है। जो 57 राज्यसभा की सीटें खाली हो रही हैं उसमे भाजपा के पास 23 और कांग्रेस के पास 8 हैं।

जमीनी नेता पर भरोसा, कार्यकर्ता को अच्छा संकेत
उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक 11 राज्यसभा की सीटें खाली हो रही हैं, जहां से भारतीय जनता पार्टी ने हर किसी को चौंकाते हुए पार्टी के वरिष्ठ और जमीनी नेता लक्ष्मीकांत बाजपेयी और राधा मोहन अग्रवाल को राज्यसभा भेजने का फैसला लिया है। इसके अलावा पार्टी ने सुरेंद्र सिंह नागर, बाबूराम निषाद, दर्शना सिंह, संगीता यादव को भी पार्टी ने यूपी से राज्यसभा भेजने का फैसला लिया है। उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है, ऐसे में भारतीय जनता पार्टी इस बात को बखूबी समझती है और यही वजह है कि पार्टी ने यहां से ऐसे उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया है जोकि पार्टी के जमीनी नेता हैं।

पश्चिमी वोट बैंक पर भाजपा की नजर
लक्ष्मीकांत बाजपेयी जोकि लंबे समय से पार्टी के लिए जमीन की लड़ाई लड़ते हैं। लक्ष्मीकांत बाजपेयी पश्चिमी यूपी के मेरठ से आते हैं चार बार विधायक रह चुके हैं, प्रदेश सरकार में मंत्री रह चुके हैं, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। उनकी अगुवाई में पार्टी ने 2014 में यूपी में 71 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी। वहीं सुरेंद्र नागर की बात करें तो पार्टी उन्हें दूसरी बार राज्यसभा भेज रही है। सुरेंद्र नागर नोएडा से आते हैं। ऐसे में दोनों ही नेताओं के चयन को पार्टी के ब्राह्मण और गुर्जर वोटबैंक के समीकरण के तहत माना जा रहा है।

महिला वोटर्स पर विशेष ध्यान
यूपी की जिन 6 सीटों का ऐलान किया गया है उसमे दो दलित महिलाओं दर्शना सिंह और संगीता यादव को जगह दी गई है। यानि पार्टी प्रदेश के जाति समीकरण को पूरी तरह से साधना चाहती है। पार्टी ने 5 महिला नेताओं को राज्यसभा का टिकट दिया है। हरियाणा से पूर्व विधायक कृष्ण लाल पवार को टिकट दिया है। कविता पाटीदार को मध्य प्रदेश, घनश्याम तिवारी को राजस्थान और कल्पना सैनी को उत्तराखंड से टिकट दिया गया है। बिहार से पार्टी ने सतीश चंद्र दुबे, शंभू शरण पटेल को टिकट दिया है।

भाजपा का कैबिनेट मंत्रियों को टिकट
आगामी 10 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने 18 उम्मीदवारों की लिस्ट को जारी किया है। भारतीय जनता पार्टी ने निर्मला सीतारमण, पीयूष गोयल को एक बार फिर से राज्यसभा भेजने का फैसला लिया है क्यों कि दोनों ही मोदी सरकार में अहम मंत्रालय का जिम्मा संभाल रहे हैं। वहीं मुख्तार अब्बास नकवी को जिनका कार्यकाल खत्म हो रहा है, उन्हें पार्टी ने राज्यसभा का टिकट नहीं दिया है। मध्य प्रदेश से भाजपा ने ज्योतिरादित्य सिंधिया, एल मुर्गन, धर्मेंद्र प्रधान, एमजे अकबर, अजय प्रताप सिंह, कैलाश सोनी, सुमेर सिंह सोलंकी और संपतिया उइके को टिकट दिया है। वहीं कांग्रेस ने विवेक तनखा, दिग्विजय सिंह,राजमणि पटेल को टिकट दिया है।

कांग्रेस को बाहरियों पर दांव पड़ेगा भारी
भारतीय जनता पार्टी ने जो लिस्ट जारी की है उसमे सबसे अधिक 6 नाम उत्तर प्रदेश से हैं, जबकि महाराष्ट्र से 3 नाम, कर्नाटक से 2 नाम, बिहार से 2, शामिल हैं। जबकि मध्य प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और झारखंड से 1-1 उम्मीदवार के नाम का ऐलान किया गया है। भारतीय जनता पार्टी की लिस्ट में इस बात का खास तौर पर ध्यान रखा गया है कि जिन प्रदेश से राज्यसभा उम्मीदवारों के नाम का नाम घोषित किया जा रहा है वह उसी प्रदेश से संबंध रखते हो। जिससे ना सिर्फ पार्टी के कार्यकर्ता बल्कि लोगों के बीच एक अच्छा संदेश जाता है। लेकिन कांग्रेस पार्टी यह करने में पूरी तरह से विफल रही है, जिसकी वजह से पार्टी के भीतर से ही आवाज उठने लगी है।

रणनीति पर भारी नेताओं से करीबी
कांग्रेस पार्टी ने जो लिस्ट जारी की है उसमे 10 उम्मीदवारों के नाम हैं। पार्टी ने राजस्थान, छत्तीसगढ़ के कोटे से जिन उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं वो सभी इन प्रदेश के नेता नहीं हैं बल्कि बाहरी हैं। मुकुल वासनिक को पार्टी ने राजस्थान और विवेक तनखा को मध्य प्रदेश से टिकट दिया है। राजीव शुक्ला, रणजीत रंजन, अजय माकन, जयराम रमेश, विवेक तन्खा, इमरान प्रतापगढ़ी, रणदीप सिंह सुरजेवाला, मुकुल वासनिक, प्रमोद तिवारी, पी चिदंबरम को राज्यसभा का टिकट दिया है। राजीव शुक्ला को छत्तीसगढ़, इमरान प्रतापगढ़ी को महाराष्ट्र और प्रमोद तिवारी को राजस्थान से राज्यसभा भेजा जाएगा। पूर्व लोकसभा सदस्य रंजीत रंजन को दूसरी बार पार्टी ने छत्तीसगढ़ से राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है। पार्टी ने जिन 10 उम्मीदवारों के नाम जारी किए हैं उनमे से 7 उम्मीदवार बाहरी राज्य के हैं, उन्हें स्थानीय नेताओं को दरकिनार करके तरजीह दी गई है। पार्टी में उन उम्मीदवारों को तरजीह दी गई जोकि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के करीबी हैं।

कांग्रेस पार्टी के भीतर से उठने लगी आवाज
कांग्रेस की लिस्ट जारी होने के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने ट्वीट करके लिखा, शायद मेरी तपस्या में कुछ कमी रह गई। वहीं नगमा ने लिखा, हमारी भी 18 साल की तपस्या कम पड़ गई। उन्होंने इमरान प्रतापगढ़ी के नाम पर सवाल खड़ा किया। नगमा ने लिखा, क्या मैं उनसे कम योग्य हूं। वहीं पार्टी ने गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा जैसे बड़े नेताओं को भी टिकट नहीं दिया। जबकि पार्टी के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल को पहले ही इस बात का अंदाजा था,यही वजह है कि उन्होंने निर्दलीय राज्यसभा सदस्य के तौर पर नामांकन किया है। उन्हें समाजवादी पार्टी अपना समर्थन दे रही है। कांग्रेस पार्टी ने राजस्थान के एक भी नेता को राज्यसभा का टिकट नहीं दिया। जिसपर पार्टी के विधायक सन्याम लोढ़ा ने पूछा कि पार्टी को यह बताना होगा कि आखिर क्यों प्रदेश से किसी को टिकट नहीं दिया गया।












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