राज्यसभा में बहुमत के करीब पहुंचा भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए, बढ़ेगी ताकत

Rajya Sabha by-elections 2024: भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए राज्यसभा में बहुमत हासिल करने के कगार पर है। वर्तमान में एनडीए के पास 110 सांसदों का समर्थन है, जिसमें छह गैर-गठबंधन वाले मनोनीत सदस्य और हरियाणा से एक निर्दलीय शामिल हैं। गुरुवार को नामांकन पत्रों की जांच पूरी होने के बाद 237 सदस्यों वाले सदन में यह संख्या बढ़कर 121 हो जाने की उम्मीद है, क्योंकि पार्टियों द्वारा मैदान में उतारे गए सभी उम्मीदवारों की जीत तय मानी जा रही है।

आगामी राज्यसभा उपचुनावों में भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए 12 में से 11 सीटें जीतने की ओर आगे बढ़ रही है। यह जीत एनडीए को बहुमत हासिल करने के करीब ले जाएगी जिसका वो लंबे से इंतजार कर रही है। जिसमें अभी भी जम्मू-कश्मीर और मनोनीत सदस्यों की श्रेणी से आठ पद खाली हैं।

Rajya Sabha by-elections

9 सीटों पर पक्‍की है जीत

12 सीटों पर चुनाव होने हैं, जिनमें से कांग्रेस तेलंगाना में सिर्फ एक सीट जीत सकती है, जहां वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी उनके उम्मीदवार हैं। भाजपा को नौ सीटें मिल सकती हैं, जबकि एक-एक सीट एनसीपी और राष्ट्रीय लोक मंच को मिलेगी, याद रहे दोनों ही पार्टियां एनडीए की सहयोगी पार्टियां हैं।

एनडीए की बढ़ जाएगी ताकत

एक बार जब सरकार मनोनीत श्रेणी में चार खाली सीटों को भर देती है, तो एनडीए का समर्थन आधार 125 सांसदों तक बढ़ सकता है। सदन की 245 सदस्यों की पूरी ताकत तक पहुंचने पर यह जरूरत से दो अधिक होगा। आठ मनोनीत सांसदों में से दो भाजपा में शामिल हो गए हैं जबकि अन्य सरकार का समर्थन करते हैं।

विपक्ष की स्थिति

इन उपचुनावों के साथ, भाजपा के पास 96 सांसद हो जाएंगे, जबकि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के पास 27 सांसद होंगे। तृणमूल कांग्रेस के पास 13 सीटें हैं, उसके बाद आप और डीएमके के पास 10-10 और राजद के पास पांच सीटें हैं।

विपक्षी दल इंडिया गठबंधन के पास 88 सांसद हैं और सरकार को चुनौती देने के लिए बीजेडी के आठ सांसदों पर भी भरोसा किया जा सकता है। वाईएसआर कांग्रेस (11), एआईएडीएमके (4) और बीआरएस (4) गैर-गठबंधन हैं, लेकिन सरकार का समर्थन करने की ओर झुकाव रखते हैं। बीएसपी का भी एक सदस्य है जो हाल ही में विपक्ष के साथ गठबंधन करता हुआ देखा गया है।

भाजपा के लिए चुनौतियां

सत्तारूढ़ भाजपा को राज्यसभा में मुश्किलों का सामना करना पड़ा था, क्योंकि एआईएडीएमके ने अपना गठबंधन छोड़ दिया था और ओडिशा में चुनावी हार के बाद बीजेडी ने विपक्ष का रुख अपनाया था। इन बदलावों ने पहले संसद के अंदर भाजपा के रणनीतिक समर्थन को प्रभावित किया था।

इन दर्जन सीटों के लिए चुनाव आवश्यक थे, क्योंकि दस राज्यसभा सांसद लोकसभा के लिए निर्वाचित हो चुके थे और दो - बीआरएस के केशव राव और बीजद की ममता मोहंता - ने क्रमश: कांग्रेस और भाजपा में शामिल होने से पहले इस्तीफा दे दिया था।

सीटों का बंटवारा

इन 12 सीटों में से भाजपा के पास सात सीटें थीं, जबकि कांग्रेस के पास दो सीटें थीं - हरियाणा और राजस्थान - जबकि राजद, बीआरएस और बीजद के पास एक-एक सीट थी। हालांकि कांग्रेस ने बीआरएस की कीमत पर तेलंगाना से एक सीट जीती, लेकिन राजस्थान और हरियाणा में उसे अपनी सीटें गंवानी पड़ीं, जहां भाजपा सत्ता में है और उसके पास अपने प्रत्याशियों को चुनने के लिए पर्याप्त संख्या है। इसके अलावा, भाजपा ने बिहार और महाराष्ट्र में अपने सहयोगियों के साथ एक-एक सीट साझा की।

भाजपा ने दो केंद्रीय मंत्रियों जॉर्ज कुरियन को मध्य प्रदेश से और रणवीत बिट्टू को राजस्थान से सफलतापूर्वक टिकट दिलाया। उन्होंने हरियाणा से पूर्व कांग्रेस सदस्य किरण चौधरी को भी मैदान में उतारा। लोकसभा चुनाव में टिकट न मिलने के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री रामेश्वर तेली को असम से टिकट दिया गया।

यह बदलाव राज्यसभा की गतिशीलता में महत्वपूर्ण परिवर्तन का संकेत देता है, क्योंकि एनडीए बहुमत के करीब पहुंच गया है, जो विधायी प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी ढंग से प्रभावित कर सकता है।

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