पशु तस्करों के लिए बिहार की बाढ़ बनी वरदान, पानी के रास्ते बंग्लादेश ले जाते हैं गायें

नई दिल्ली। बिहार में लगातार हो रही बारिश राज्य के लोगों के लिए जहां मुसीबत बन गई है वहीं बंगाल में पशु तस्करों के लिए यह एक बेहरीन अवसर बनकर सामने आई है। 28 और 29 सितंबर की रात को बीएसएफ के जवानों ने बंगाल के मालदा और मुर्शिदाबाद जिलों से 125 से अधिक मवेशियों को जब्त कर उस समय जब्त किया जब उन्हें बिहार से गंगा नदी के पानी के सहारे बांग्लादेश ले जाया जाने वाला था। इस मामले में बीएसएफ ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।

पानी और केले के तने के सहारे पार करायीं गायें

पानी और केले के तने के सहारे पार करायीं गायें

नाम छुपाने की शर्त पर एक बीएसएफ के अधिकारी ने बताया कि, शनिवार की रात बीएसएफ के जवानों ने मुर्शिदाबाद जिले के भगांगोला पुलिस स्टेशन के तहत मदनघाट इलाके के पास कुछ तस्करों को मवेशियों के साथ देखा। तस्करों का पीछा करने के बाद बीएसएफ ने 10 मवेशियों के साथ महेश नारायणगंज के निवासी आसिफ सरकार (20) नामक एक भारतीय पशु तस्कर को गिरफ्तार किया है। हालांकि 20 तस्कर लगभग 200 से अधिक जानवरों को गंगा नदी पार कराने में सफल रहे। जिन्हें बीएसएफ नहीं पकड़ पाई।

मवेशी को सफलतापूर्वक बॉर्डर पार कराने के मिलते हैं 4000 हजार

बीएसएफ ने बताया कि, एक तस्कर को एक मवेशी को सफलतापूर्वक बॉर्डर पार कराने का 4000 हजार रुपए मिलते हैं। एक अन्य घटना में बीएसएफ ने मुर्शिदाबाद के शमशेरगंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत निमिता सीमा के पास एक और भारतीय पशु तस्कर को 2 मवेशियों के साथ गिरफ्तार किया। पकड़े गए युवक की पहचान मालदा जिले के बैष्णबनगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत देवनपुर निवासी अकरम शेख (19) के रूप में हुई है। वह बांग्लादेश में मवेशियों की तस्करी के लिए मुर्शिदाबाद आया था।

बीएसएफ ने पकड़ी कई गायें

बीएसएफ ने पकड़ी कई गायें

बीएसएफ के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि तस्कर गंगा में जल स्तर में वृद्धि का लाभ उठाकर मवेशियों को बांग्लादेश भेजने की कोशिश कर रहे हैं। बैष्णबनगर और शमशेरगंज थाना क्षेत्रों के अंतर्गत कई जगहों पर मवेशियां को नदी में उतारा जाता है। नदी का बहाव ऐसा है कि मवेशियां खुद ही अपने आप तैरकर बंगलादेश पहुंच जाती है। सूत्रों ने बताया कि लगातार बारिश के कारण नदियों में पानी भरा है। अब पानी के रास्ते तस्करी के लिए तस्करों ने नया तरीका निकाला है। केले का तना पानी में नहीं डूबता। गायों के दोनों ओर केले का तना बांधकर उन्हें ले जाया जा रहा है। इसमें केले के बड़े-बड़े पेड़ों के तनों को काटकर एकत्र कर लिया जाता है। गाय के दोनों ओर केलों के तनों को रस्सियों से बांध दिया जाता है। गायों के शरीर पर गर्दन से नीचे पर धड़ को कवर करते हुए बांधे गए ऐसे तने एक तरीके से स्विमिंग पुल में टयूब की तरह काम करने लगता हैं। गायों की गर्दन में रस्सी बांधकर उन्हें पानी में आगे चल रहे लोग खींचते हैं और चूंकि केले का तना पानी में डूबता नहीं है। ऐसे में गायों को पानी के जरिए सीमा पार बंगलादेश पहुंचा दिया जाता है।

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