Indian Railways: बिजली संकट के चलते 670 ट्रेनों के फेरे रद्द, 24 मई तक इतनी मेल-एक्सप्रेस गाड़ियां कैंसिल

नई दिल्ली, 29 अप्रैल: देश में बिजली संकट की मार ट्रेन यात्रियों पर भी पड़ी है। कोयले से भरे रेलवे के रेक पावर प्लांट तक जल्द से जल्द पहुंचाने के लिए 670 ट्रेनों के फेरे कैंसिल कर दिए हैं और यह फैसला अभी 24 मई तक के लिए किया गया है। इतनी बड़ी संख्या में पैसेंजर और लंबी दूरी की मेल-एक्सप्रेस गाड़ियों के रद्द करने के लिए फैसले पर लोगों में आक्रोश भी फैल गया है और कई राज्यों में इसके खिलाफ प्रदर्शन भी हुए हैं। लेकिन, रेलवे का कहना है कि उसके पास विकल्प नहीं है, क्योंकि देश में ब्लैक आउट की स्थिति नहीं पैदा होने दी जा सकती। जानकारी के मुताबिक बारिश के मौसम में भी बिजली उत्पादन केंद्रों में कोयले की किल्लत नहीं हो, इसके लिए मई-जून में भी कोयले की ढुलाई इसी तरह जारी रखने की तैयारी है।

रोजाना लगभग 16 ट्रेनें की जा रही हैं कैंसिल

रोजाना लगभग 16 ट्रेनें की जा रही हैं कैंसिल

भयावह बिजली संकट के मद्देनजर बिजली उत्पादन केंद्रों तक कोयले की सप्लाई बनाए रखने के लिए भारतीय रेलवे ने बहुत बड़ा कदम उठाया है और पिछले दो हफ्तों से वह लगातार मेल-एक्सप्रेस गाड़ियों समेत लगभग 16 यात्री ट्रेनों को रोजाना कैंसिल कर रहा है। देश के सबसे बड़े ट्रांसपोर्टर ने यह कदम इसलिए उठाया है, ताकि रेलवे ट्रैक का ज्यादा से ज्यादा कोयला रेक को पावर प्लांट तक पहुंचाने में इस्तेमाल किया जा सके। रेल मंत्रालय ने फिलहाल 24 मई तक इन ट्रेनों को कैंसिल करने की घोषणा की है, जिन में बड़ी संख्या में लंबी दूरी की मेल और एक्सप्रेस गाड़ियां भी शामिल हैं। असल में देश में जितनी बिजली उत्पादित होती है, उसमें 70% में कोयले का ही इस्तेमाल होता है।

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    हर दिन रिकॉर्ड 400 रेक से ज्यादा कोयला हो रहा है लोड

    हर दिन रिकॉर्ड 400 रेक से ज्यादा कोयला हो रहा है लोड

    रेलवे ने देश को बिजली संकट से उबारने के लिए सिर्फ यात्री ट्रेनों को रद्द ही नहीं किया है, बल्कि रोजाना कोयला लोड करने के लिए रेक की औसत संख्या में भी रिकॉर्ड इजाफा कर दिया है। इन दिनों औसतन हर दिन 400 से ज्यादा रेक पर कोयला लोड किया जा रहा है, जो कि पिछले पांच साल में सबसे ज्यादा है। सूत्रों की मानें तो रेलवे इस बात के लिए कमर कस चुका है कि कोयले की किल्लत को दूर करने के लिए वह हर दिन 415 रेक उपलब्ध करवाने की कोशिश करेगा, जिसमें प्रत्येक रेक में करीब 3,500 टन कोयला ढोया जा सके। यह प्रक्रिया कम से कम दो महीने तक जारी रखने की तैयारी है ताकि पावर प्लांट के पास पर्याप्त कोयला स्टॉक हो जाए। क्योंकि, जुलाई और अगस्त में बारिश की वजह से कोयला उत्पादन प्रभावित होता है।

    500 से ज्यादा मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों के फेरे पर ब्रेक

    500 से ज्यादा मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों के फेरे पर ब्रेक

    इस समय रेलवे की घोषणा के मुताबिक लगभग 670 पैसेंजर ट्रेन फेरे कैंसिल किए गए हैं। इनमें से 500 से ज्यादा फेरे लंबी-दूरी के मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों के हैं, जो कि 24 मई तक नहीं चलेंगे। रेल मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, 'विभिन्न राज्यों में यात्री ट्रेनें कैंसिल किए जाने को लेकर प्रदर्शन भी हुए हैं, लेकिन हमारे पास कोई विकल्प नहीं बचा है। इस समय की तात्कालिक आवश्यकता पावर प्लांट में कोयले की किल्लत ना हो यह सुनिश्चित करने की है, ताकि किसी तरह का ब्लैक आउट ना हो। हमारे लिए यह बहुत ही पेचीदा स्थिति है। हमें उम्मीद है कि इस अस्थाई दौर से उबर जाएंगे।'

     इस साल कोयले की मांग में रिकॉर्ड इजाफा

    इस साल कोयले की मांग में रिकॉर्ड इजाफा

    बता दें कि देश में ज्यादातर घरेलू कोयला पूर्वी क्षेत्र से उत्तरी, मध्य और पश्चिमी हिस्सों की ओर भेजा जाता है। पिछले कुछ वर्षों में कोयला कंपनियों ने रेलवे के रेक का किस तरह से प्रतिदिन इस्तेमाल किया है, वह आंकड़ा देख लेते हैं। साल 2018-19 में रोजाना औसतन 326 रेक, 2019-20 में 306 रेक, 2020-21 में 347 और 2022-23 में गुरुवार तक ही 400 से 405 रेक रोजाना लोड किए जा चुके हैं। अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह कितना बड़ा संकट है। अधिकारियों का कहना है कि इस साल कोयले की मांग में अप्रत्याशित इजाफा हुआ है और इसके चलते रेलवे पर दबाव बढ़ा है।

    आयातित कोयले की ढुलाई बहुत कम

    आयातित कोयले की ढुलाई बहुत कम

    ऊपर जो आंकड़े बताए गए हैं उनमें आयातित कोयले का भी हिस्सा है, जो कि बहुत ही कम है और मौजूदा वित्त वर्ष में उसका कोई आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। पिछले साल भी कोविड पाबंदियों से छुटकारे के बाद जब अर्थव्यवस्था में तेजी आने लगी थी और बिजली की मांग अचानक बढ़ी थी, तो कोयले का संकट खड़ा हुआ था। तब तो बरसात और कोविड प्रतिबंधों की वजह से कोयला कंपनियां भी कोयला उत्पादन समस्या से जूझ रही थीं।

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