Gujarat election 2017: नरेंद्र मोदी के हथियार को गुजरात चुनाव में चला रहे हैं राहुल गांधी
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नई दिल्ली। राहुल गांधी जिस तरह हर चुनावी सभा में जुमले फेंक रहे हैं। जिस तरह वे युवती के साथ सेल्फी लेने में नहीं हिचकिचा रहे और जिस तरह वे ढाबों में जाकर व्यंजनों के चटखारे ले रहे हैं और सबसे बड़ा बदलाव ये है कि वो गुजरात के सारे प्रमुख मंदिरों में मत्था टेक रहे हैं। जिस तरह सोशल मीडिया पर जुमलों पर वार पलटवार हो रहा है।

जुमलों को वायरल करने की कोशिश
यदि आपको याद है लोकसभा चुनाव का प्रचार अभियान, जिसमें बीजेपी ने बड़े पैमाने पर आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया था और ये अभियान पूरे देश में छा गया था। इसके ठीक उलट कांग्रेस प्रचार अभियान में बुरी तरह पिछड़ गई थी। एंटी इनकम्बेंसी तो कांग्रेस के साथ थी ही, चुनाव में मोदी के जुमलों ने पार्टी को काफी नुकसान पहुंचाया। यही नहीं मोदी के तुलना में कांग्रेस की लीडरशिप कहीं नजर नहीं आ रही थी तो इसकी वजह तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह थे। वो मंझे हुए राजनीतिज्ञ नहीं थे और न ही उन्हें आगे इस दिशा में जाना था। ऊपर से बीजेपी ने जो आक्रामक चुनाव प्रचार अभियान चलाया उससे कांग्रेस का सफाया हो गया। पार्टी बीजेपी को काउंटर नहीं कर पाई लेकिन गुजरात में कांग्रेस उसी राह पर जाती नजर आ रही है। मीडिया की सुर्खियों में कैसे बने रहना है, ये गुर राहुल गांधी या तो खुद सीख गए हैं या फिर अपने उन सलाहकारों के कहने पर आगे बढ़ रहे हैं इसीलिए उनकी हर सभा में कोई न कोई नया जुमला सुनने को मिल रहा है और उसी जुमले को वायरल करने की कोशिश की जा रही है या फिर बीजेपी उसे काउंटर करने की कोशिश कर रही है।

कांग्रेस-बीजेपी के समर्थक सोशल मीडिया पर जंग लड़ रहे हैं
ताजा जुमला मशीन में एक तरफ से आलू डालने पर दूसरी तरफ सोना निकलने का है जिसे बीजेपी की आईटी सेल ने शेयर कर दिया लेकिन कांग्रेस समर्थकों ने पूरा वीडियो डालकर उसे काउंटर कर दिया जिसमें वो कह रहे हैं कि ये उनका नहीं मोदी जी का कहना है। इस तरह के जुमले लगभग हर रोज आ रहे हैं और कांग्रेस-बीजेपी के समर्थक सोशल मीडिया पर इसकी जंग लड़ रहे हैं। कभी कांग्रेस आगे निकल रही है तो कभी बीजेपी, लेकिन लड़ाई दिलचस्प होती जा रही है। जिस तरह मोदी ने चाय पर चर्चा की थी उसी तरह कॉफी पर चर्चा की भी तैयारी है। कहीं भी जादूगर से पैसा बनाने को कहते हैं और फिर मोदी पर तंज कसते हैं तो कहीं चाय पीकर सुर्खियों में छा रहे हैं। खेत में जाकर किसानों से मिल रहे हैं और उनके साथ फोटो खिंचवा रहे हैं। बच्चों से भी मिल रहे हैं। गुजराती व्यजंनों का लुत्फ ले रहे हैं।

राहुल गांधी की मौजूदगी को लोग गंभीरता से ले रहे हैं
कुल मिलाकर सुर्खियों में बने रहने की कला सीख गए हैं। चुनावी दांवपेंच में ये अंदाज मायने रखते हैं। एक तो इमेज बिल्डिंग का तो दूसरा मीडिया के अटेंशन का। मीडिया का अटेंशन ही है जिससे पहली बार लग रहा है कि कांग्रेस गुजरात में लड़ाई लड़ रही है और पहली बार लग रहा है कि राहुल गांधी की मौजूदगी को लोग गंभीरता से ले रहे हैं।












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