क्यों 'कुली' बनकर विपक्ष का हर बोझ उठाने की कोशिश में हैं राहुल गांधी?
कांग्रेस नेता राहुल गांधी पिछले कुछ समय से लगातार अपने कार्यों की वजह से सुर्खियां बटोर रहे हैं। उन्हें मीडिया में भी ज्यादा कवरेज मिल रही है। वे ऐसी-ऐसी जगहों पर पहुंच रहे हैं, जो लोगों को चौंका रहा है। कर्नाटक विधानसभा चुनावों के समय से उनकी ऐसी तस्वीरें खूब वायरल हो रही हैं।
राहुल गांधी अचानक ये सब इतना ज्यादा क्यों करने लगे हैं, इसकी वजह टटोलने से पहले हम कर्नाटक चुनावों से लेकर अबतक के ऐसे कुछ चर्चित मामलों का जिक्र करना जरूरी समझते हैं। जो बिना रुके लगातार जारी है।

कर्नाटक चुनाव में साधारण बस में सफर
7 मई को कर्नाटक विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान उनकी बेंगलुरु मेट्रोपॉलिटन कॉर्पोरेशन की एक बस में सफर करने वाली तस्वीरें खूब वायरल हुई थी। वह साधारण सी बस में यात्री वाली सीट पर बैठे हुए थे। बस में सबकुछ सामान्य नजर आ रहा था और यह बेहद खास बात है।

ट्रक में भी की यात्रा
उसी महीने की 23 तारीख को वे दिल्ली से चंडीगढ़ जाते समय एक ट्रक में यात्रा करते नजर आए और ट्रक ड्राइवरों से बातें भी की और उनकी समस्याएं भी सुनीं। अगले महीने या जून में वे अमेरिका गए और वहां भी भारतीय-अमेरिकी ट्रक ड्राइवर के साथ ट्रक में बैठ गए और सफर किया। उससे वहां उनकी हालातों पर बात की।

बाइक की मरम्मत करते भी तस्वीरों में नजर आए
करीब 10 दिन बाद 27 जून को वे राजधानी नई दिल्ली में एक मोटरसाइकिल रिपेयर की दुकान में पहुंच गए और वहां भी मैकेनिकों के साथ अपनी सूझबूझ से बाइक्स की मरम्मत करते हुए तस्वीरें खिंचवाईं।

धान रोपने के लिए पानी से भरे खेत में उतरे नजर आए
दो हफ्ते से भी कम समय यानी 8 जुलाई को उनकी अचानक से कुछ तस्वीरें और वीडियो वायरल किए गए। इसमें वे हरियाणा के सोनीपत जिले में किसानों के साथ खेत में नजर आए। उन्होंने मजदूरों के साथ वहां धान की रोपाई में भी हाथ आजमाया और ट्रैक्टर चलाते हुए भी किसानी का आनंद लेने की कोशिश की।

लेह में बाइक राइड का मजा लिया और चीन को लेकर पीएम मोदी को घेरा
अगले महीने यानी अगस्त के दूसरे हिस्से में वे लेह-लद्दाख पहुंच चुके थे। वहां उन्होंने बाइक राइड की सवारी की और चीन को लेकर एक विवादित दावा भी कर दिया। उन्होंने कहा कि 'चीन ने हिंदुस्तान की जमीन छीनी है और इसपर पीएम मोदी ने सरासर झूठ बोला है।'

आनंद विहार स्टेशन पर कुली बने हुए दिखे
उनकी जिस तस्वीर पर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वो है गुरुवार यानी 21 सितंबर को दिल्ली के आनंद विहार स्टेशन की। वहां उन्होंने ना सिर्फ कुलियों वाली वर्दी पहनी, बल्कि अपने सिर पर एक ट्रॉली वाला सूटकेस भी उठाए नजर आए। इस तस्वीर को कांग्रेस समर्थक और विरोधी अपने-अपने हिसाब से व्याख्या कर रहे हैं। लेकिन, हमारा सवाल है कि कांग्रेस नेता यह सब क्यों कर रहे हैं?
सामान्य लोगों के बीच दिखने की कोशिश
राहुल गांधी के बारे में हमने अभी जितनी भी बातें की हैं, उसमें एक बात समान है कि वे आम लोगों तक पहुंचने की कोशिशों में जुटे दिख रहे हैं। यह आम लोग वो हैं, जिसका दिल 'भारत' में बसता है या जिसका कहीं न कहीं ग्रामीण भारत से सीधा वास्ता है। दूसरे शब्दों कहें तो ये वो वोटर हैं, जो लोकतंत्र का सच्चा पुजारी होता है। यह एक वक्त का खाना भूल सकता है, लेकिन 'मतदान' के दिन वोट करना नहीं छोड़ सकता।
अध्यक्ष पद छोड़कर पीछे से संभाल रहे हैं कांग्रेस की कमान
राहुल गांधी अब दो दशकों से राजनीति में हैं। 2019 का लोकसभा चुनाव कांग्रेस ने उन्हीं के नेतृत्व में लड़ा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली बीजेपी अपना सारा रिकॉर्ड तोड़ने में सफल रही। राहुल ने कांग्रेस का अध्यक्ष पद छोड़ दिया और उसके बाद से पीछे से उसकी कमान मजबूती से संभाले नजर आते हैं। दो-दो चुनावों में बड़ी असफलताओं ने उन्हें बहुत कुछ सिखाया भी है।
कांग्रेस और राहुल ने छवि बेहतर करने पर काफी मेहनत की है
उनकी पहले जो हल्की छवि बनी थी या बनाई गई थी, कांग्रेस ने काफी प्रोफेशल तरीके से उसपर काम किया है। राहुल ने भी काफी मेहनत की है। भारत यात्रा के दौरान काफी पैदल चले और असली भारत से रूबरू होने का भी मौका मिला। इसका असर वोटरों पर क्या पड़ा है, इसके लिए हमें अभी 2024 का इंतजार करना होगा। कांग्रेस तो कर्नाटक जीतने के लिए भी उन्हीं का योगदान मानती है। लेकिन, तथ्य ये है कि हिमाचल प्रदेश भी पार्टी जीती है, लेकिन राहुल वहां से दूर ही रहे थे।
सहयोगी दलों में बनने लगी है गंभीर छवि
वैसे इसका असर ये जरूर दिख रहा है कि कांग्रेस पार्टी के सहयोगियों ने पहले की तुलना में उन्हें ज्यादा गंभीरता से लेना अवश्य शुरू कर दिया है। जबसे विपक्षी गठबंधन इंडिया बना है, उसके कई ऐसे फैसले हुए हैं, जो राहुल गांधी की सोच या उनके आसपास रहने वाले लोगों की सोच से प्रभावती लगती है। इसमें 14 चुनिंदा न्यूज एंकरों का बायकॉट भी शामिल किया जा सकता है, जिसपर बिहार के सीएम नीतीश कुमार आपत्ति भी जता चुके हैं।
इंडिया ब्लॉक का नेतृत्व करने पर नजर?
एक बात और है कि राहुल गांधी के प्रभाव में कांग्रेस जातीय जनगणना की भी खूब वकालत करने लगी है। यह वो मुद्दा है, जो पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को खटकने की बात सामने आ रही है। लेकिन, राहुल बार-बार उसे उठा रहे हैं। ओबीसी वोट बैंक को लेकर कांग्रेस का हृदय परिवर्तन दिख रहा है। इसके माध्यम से वे खुद को विपक्षी गठबंधन इंडिया के नेता के तौर पर पेश करने की कोशिश करत दिखते हैं। क्योंकि, नेतृत्व का मुद्दा इस गठबंधन के लिए सबसे संवेदनशील विषय है। इसलिए कांग्रेस पांच राज्यों में होने वाले चुनावों से पहले राहुल के लिए जमीन तैयार करके रखना चाहती है।
अगर पांच राज्यों में से राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भी कांग्रेस अपनी सरकारें बचाए रखने में सफल हो गई तो वह पूरी तरह से इंडिया की ड्राइविंग सीट पर आ सकती है। इसमें अगर मध्य प्रदेश भी मिल गया तो इंडिया, यूपीए वाले अंदाज में नजर आ सकता है। कांग्रेस और राहुल गांधी की अभी की रणनीति इसी पर आधारित लग रही है।












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