'मोदी नहीं चाहते मैं पुतिन से मिलूं', राहुल गांधी का बड़ा आरोप, क्या विपक्ष के नेता को मिलवाने का है कोई नियम
Rahul Gandhi on Putin Meet: संसद के शीतकालीन सत्र के चौथे दिन 04 दिसंबर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन के भारत दौरे को लेकर सियासत अचानक गरमा गई। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर सीधा और तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार जानबूझकर उन्हें विदेशी मेहमानों से मिलने से रोक रही है। राहुल ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्रालय की 'इनसिक्योरिटी' करार दिया। उनके इस बयान के बाद संसद से लेकर सोशल मीडिया तक जोरदार बहस शुरू हो गई।
राहुल गांधी का गंभीर आरोप, सरकार विपक्ष से डरी हुई है
राहुल गांधी ने संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि केंद्र सरकार नहीं चाहती कि वह विदेश से आने वाले बड़े नेताओं से मुलाकात करें। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार इस परंपरा का पालन नहीं कर रही है जो पहले की सरकारों में होती थी। राहुल ने साफ कहा कि यह सरकार की असुरक्षा का संकेत है।

उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता भी देश का प्रतिनिधित्व करते हैं। सरकार अकेले ही भारत नहीं होती। विपक्ष भी देश के लोकतंत्र का हिस्सा है और उसका नजरिया अलग होता है। राहुल ने यह भी कहा कि विदेशी नेता जब भारत आते हैं तो वे देश की पूरी राजनीतिक स्थिति को समझना चाहते हैं, न कि केवल सरकार की बात सुनना।
🟡 वाजपेयी और मनमोहन सरकारों की परंपरा का हवाला
राहुल गांधी ने यह भी याद दिलाया कि अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह की सरकारों के दौरान यह परंपरा लगातार निभाई जाती रही थी। उन्होंने कहा कि तब विदेशी मेहमान नियमानुसार विपक्ष के नेता से भी मिलते थे। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। राहुल का आरोप है कि जब विदेशी नेता भारत आते हैं या जब वह खुद विदेश जाते हैं, तो सरकार संबंधित पक्षों को विपक्ष के नेता से न मिलने की सलाह दे देती है। उनके मुताबिक यह एक सोची-समझी नीति बन चुकी है।
🟡 कुमारी शैलजा और शशि थरूर भी सरकार पर हमलावर
राहुल गांधी के आरोपों के बाद कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी सरकार पर तीखा हमला किया। कांग्रेस सांसद कुमारी शैलजा ने कहा कि मौजूदा सरकार ने भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं को कमजोर कर दिया है। उनका कहना है कि लोकसभा में राहुल गांधी और राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खड़गे विपक्ष के नेता हैं, लेकिन सरकार इस परंपरा को नजरअंदाज कर रही है। शैलजा ने इसे देश की प्रतिष्ठा के लिए भी ठीक संकेत नहीं बताया।
वहीं शशि थरूर ने कहा कि लोकतंत्र में यह जरूरी है कि विदेशी मेहमान सत्ता पक्ष के साथ-साथ विपक्ष से भी मिलें। उन्होंने साफ कहा कि राहुल गांधी ने अपना पक्ष रख दिया है और अब सरकार को इस पर जवाब देना चाहिए।
🟡 क्या विपक्ष के नेता से मिलना कोई लिखित नियम है?
असल में किसी विदेशी राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री का विपक्ष के नेता से मिलना कोई कानूनी बाध्यता नहीं है। यह एक कूटनीतिक परंपरा और लोकतांत्रिक मर्यादा मानी जाती है। कई देशों में यह चलन है ताकि विदेशी नेता देश के अलग-अलग राजनीतिक दृष्टिकोण को समझ सकें।
भारत में भी यह प्रथा वर्षों तक निभाई जाती रही है। हालांकि ऐसा कोई स्पष्ट कानून या लिखित प्रोटोकॉल नहीं है जो सरकार को इसके लिए बाध्य करे। इन मुलाकातों की व्यवस्था आम तौर पर विदेश मंत्रालय द्वारा की जाती है और इसे सरकार की सहमति से ही तय किया जाता है। इसी वजह से अब विपक्ष यह सवाल उठा रहा है कि सरकार जानबूझकर इस परंपरा को खत्म कर रही है।
🟡 पुतिन का भारत दौरा और बड़े समझौतों की तैयारी
इस पूरे विवाद के बीच रूसी समाचार एजेंसी TASS ने पुष्टि की है कि राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन भारत के दो दिवसीय दौरे पर रवाना हो चुके हैं। वह आज शाम नई दिल्ली पहुंचेंगे और 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। यह यूक्रेन युद्ध के बाद पुतिन की पहली भारत यात्रा होगी। इससे पहले वह दिसंबर 2021 में भारत आए थे।
इस दौरे के दौरान व्यापार, आर्थिक सहयोग, विज्ञान, तकनीक, रक्षा, ऊर्जा और सांस्कृतिक क्षेत्रों में बड़े समझौते होने की संभावना है। दोनों देशों के बीच 10 से अधिक अंतर-सरकारी दस्तावेजों और 15 से ज्यादा समझौतों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद जताई जा रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पुतिन के सम्मान में निजी डिनर भी आयोजित करेंगे। इस दौरे को भारत-रूस रिश्तों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
🟡 राजनीतिक टकराव के बीच बड़ा सवाल कायम
एक तरफ भारत और रूस के रिश्तों को नई ऊंचाई देने की तैयारी चल रही है, वहीं दूसरी ओर राहुल गांधी के आरोपों ने सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सवाल अब यही उठ रहा है कि क्या विदेश नीति सिर्फ सत्ता पक्ष की जिम्मेदारी है या विपक्ष की भी उसमें भूमिका होनी चाहिए। राहुल गांधी ने इस मुद्दे को लोकतंत्र और परंपरा से जोड़ा है, जबकि सरकार की चुप्पी इस विवाद को और हवा दे रही है।
अब सबकी नजर इस पर है कि मोदी सरकार इस आरोप पर क्या जवाब देती है और क्या भविष्य में विपक्ष के नेता को विदेशी मेहमानों से मिलने का रास्ता फिर खुलेगा या नहीं।












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