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कांग्रेस अध्यक्ष बने राहुल गांधी, पहले भाषण में ही भाजपा पर हमला

नई दिल्ली। राहुल गांधी ने आज आधिकारिक रूप से कांग्रेस के अध्यक्ष का पदभार संभाल लिया। उनके पदभार संभालने से पहले पार्टी के मुख्यालय के बाहर लोगों में जबरदस्त खुशी देखी गई। राहुल वर्ष 2013 में कांग्रेस के उपाध्यक्ष बने थे। राहुल गांधी के बतौर अध्यक्ष पद कमान संभालने से एक दिन पहले ही उनकी मां सोनिया गांधी ने पार्टी के अध्यक्ष पद से रिटायर होने का ऐलान कर दिया था। कांग्रेस मुख्यालय में राहुल गांधी की ताजपोशी के वक्त सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, मधुसूदन मिस्त्री, प्रियंका गांधी, रॉबर्ट वाड्रा सहित तमाम कांग्रेस नेता मौजूद थे।

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भाजपा लोगों को लड़ाना चाहता है- राहुल

इस मौके पर बोलते हुए राहुल गांधी ने कहा कि मैंने 13 साल पहले राजनीति में आया। मैं पिछले सालों में काफी यात्रा की और लोगों से मुलाकात की। राजनीति लोगों से होती है, लेकिन आज राजनीति का इस्तेमाल लोगों की सेवा के लिए नहीं बल्कि उन्हें दबाने के लिए हो रहा है। जब मैं राजनीति में आया तो मैं लोगों को जागरूक करने का हिस्सा बनना चाहता था। जैसे ही आपने इस बात का ऐलान किया कि आप गरीब के साथ हैं, उन्होंने हमला करना शुरू कर दिया, जो लोग आज सत्ता में है वह गरीबों को गरीब रखना चाहते हैं। प्रधानमंत्री चाहते हैं कि गरीब गरीब रहे, लोगों को उनकी पसंद का खाना खाने से रोक रहे हैं, उन्हें मारा जा रहा है। आज सिर्फ एक व्यक्ति के लिए मूल्यों को ताक पर रखा जा रहा है। पिछले कुछ सालों में मैंने यह महसूस किया है कि ये लोग कांग्रेस पर हमला करके कमजोर करना चाहते हैं, लेकिन इनकी नफरत और हमले हमे और मजबूत बनाते हैं। हम हर भारतीय की आवाज को बचाएंगे।

एक बार आग लग जाए तो बुझाना मुश्किल

आपके सामने उदाहरण है कि एक बार आग लग जाती है तो उसे बुझाना मुश्किल होता है, यही हम भाजपा को समझाना चाहते हैं कि एक बार आपने आग लगा दी तो उसे बुझाना मुश्किल होता है। भाजपा के लोग देश में आग लगा रही है, उसे रोकने के लिए एक ही शक्ति है कांग्रेस और उसका प्यारा कार्यकर्ता, वह तोड़ते हैं हम जोड़ते हैं, वो आग लगाते हैं हम बुझाते हैं, यह फर्क है हममे और उनमे। मैं कांग्रेस कार्यकर्ताओं व नेताओं से कहना चाहता हूं कि आप मेरे परिवार हैं, मैं आप सबको दिल से पूरा प्यार दुंगा। देश के युवाओं से मैं कहना चाहता हूं कि ये हिंदुस्तान की ग्रैंड ओल्ड पार्टी है, मगर आने वाले समय में हम इसे हिंदुस्तान की ग्रैंड ओल्ड व यंग पार्टी बनाने जा रहा हूं। मैं आप सब युवाओं को एक न्योता देता हूं, आप आईए हम एक प्यार का भाइचारे वाला हिंदुस्तान बनाएंगे। हम लड़ेंगे और क्रोध और गुस्से की राजनीति को हराएंगे। मैं आपको आश्वासन देना चाहता हूं कि आने वाली कांग्रेस पार्टी में आपकी आवाज पूरे हिंदुस्तान में सुनाई देगी और हम उसे सुनेंगे, कांग्रेस एक प्राचीन विचार है, भाजपा आपको विश्वास दिलाने की कोशिश करेगी कि वह सबसे पुरानी विचारधार हैं, लेकिन यह सही नहीं है। भाजपा अपने लिए लड़ने वाली सेना है, वो ये सोचते हैं कि कैसे सत्ता में रहे, लेकिन हम कांग्रेस के लोग यह सोचते हैं कि हम सब कैसे साथ रहे, हम उनके लिए लड़ते हैं जो अकेले नहीं लड़ सकते हैं। हम मानते हैं कि भाजपा भी हमारे भाई-बहन हैं, वो चाहते हैं कि देश कांग्रेस मुक्त बने, लेकिन हम नफरत को नफरत से नहीं हराते।

बतौर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया का आखिरी भाषण

इस मौके पर बोलते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि राहुल को कांग्रेस अध्यक्ष निर्वाचित होने पर उन्हें प्रमाण पत्र मिलने पर मैं उन्हें शुभकामनाएं और आशीर्वाद देती हूं। सोनिया ने कहा कि आज मैं आखिरी बार आपको कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में संबोधित कर रही हूं, एक नया दौर, एक नए नेतृत्व की उम्मीद आपके सामने है। 20 साल पहले जब आपने मुझे अध्यक्ष पद पर चुना तो मैं इसी तरह आपको संबोधित करने के लिए खड़ी थी। मेरे दिल में घबराहट थी, यहां तक कि मेरे हाथ कांप रहे थे, मैं समझ नहीं सकती थी कि मैं कैसे इस ऐतिहासिक संगठन को संभालुंगा, मेरे सामने मुश्किल चुनौती था, तबतक राजनीतिक से मेरा नाता नहीं था। जैसा कि आप लोग जानते हेैं कि राजीव जी और मेरा विवाह हुआ। इंदिराजी इसी क्रांतिकारी परिवार और संगठन

राजनीतिक यात्रा को किया याद

इंदिराजी ने मुझे बेटी के तरह से अपनाया था, उनसे मैंने उन उसूलों के बारे में सीखा जिसपर इस देश की नींव बनी है। 1983 में उनकी हत्या हुई थी, मुझे ऐसा महसूस हुआ कि मेरी मां मुझसे छीनी गई थीं। इस हादसे ने मेरे जीवन को बदल दिया, मैं राजनीति को अलग तरह से देखती थी, मैं अपने आपको, बच्चों को इससे दूर रखना चाहती थी। लेकिन मेरे पति के कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी थी, जिसके बाद राजीव जी ने इस जिम्मेदारी को उठाया, उनके साथ मैंने देश के कोने-कोने का दौरा किया, देश की चुनौतियों को समझा। इंदिरा जी की हत्या के बाद सात साल बीते थे कि मेरे पति की भी हत्या कर दी गई, मेरा सहारा मुझसे छीन लिया। इस दौर को पार करने में कई साल बीत गए हैं, केवल जब हर साल मुझे महसूस होने लगा कि कांग्रेस पार्टी कमजोर हो रही है, उसके सामने गंभी चुनौतियां आ रही है, सांप्रदायिक ताकतें मजबूत हो रही है, तो मैंने पार्टी की कमान संभाली। मुझे महसूस हुआ कि इस जिम्मेदारी को नकारने से इंदिरा जी और राजीव जी की आत्मा को दुख होगा, इसीलिए देश के कर्तव्य को समझते हुए मैं राजनीति में आई। उस वक्त केवल तीन राज्य में हमारी सरकार थी, केंद्र से भी हम दूर थे। आप सबके सहयोग से हमने इस चुनौती का सामना किया, एक के बाद एक दो दर्जन राज्यों में हमारी सरकार बनी।

राहुल अब मजबूत हो गया है

इस दौरान हमने ऐसे कानून बनाए जिसके बल पर शिक्षा, रोजगार का तोहफा हम देश के करोड़ो लोगों को दे पाए। 2014 के बाद से हम विपक्ष की भूमिका निभा रहे हैं, आज हमारे संवैधानिक मूल्यों पर हमला किया जा रहा है, हमारी पार्टी कई चुनाव हार चुकी है, लेकिन हमारे कार्यकर्ताओं में बेमिसाल साहस कायम है, हम डरने वाले नहीं है, हम झुकने वाले नहीं है, हमारा संघर्ष इस देश की रूह के लिए है, हम इससे पीछे कभी नहीं हटेंगे। आप सब कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता हैं, आप इन उसूलों के रखवाले हैं, जिनपर यह देश बना है। यह छोटी चीज नहीं है ,सत्ता आपका मकसद नहीं है, देश आपका मकसद है, इस देश के मूल्यों की रखवाली करना आपका मकसद है, हम सब जानते हैं कि किस तरह से हमारे देश के बुनियादी मूल्यों पर रोज रोज हमला हो रहा है, हमारी मिलीजुली संस्कृति पर वार हो रहा है। हर तरफ भय व संदेह का माहौल बनाया जा रहा है। इस बीच कांग्रेस को भी अपने अंतर्मन में झांक कर आगे बढ़ना पड़ेगा। अगर हम अपने उसूलों पर खरे नहीं उतरेंगे तो आम लोगों में अपने पैठ नहीं बना पाएंगे। यह एक नैतिक लड़ाई है, हमे किसी भी तरह के त्याग व बलिदान के लिए तैयार रहना पड़ेगा। भारत एक युवा देश है, मुझे पूरी आशा है कि नवीन व युवा नेतृत्व के आगमन से हमारी पार्टी में एक नया जोश आएगा। आपने इस नेतृत्व के लिए राहुल को चुना है, वह मेरा बेटा है, उसकी तारीफ करना मुझे उचित नहीं लगता है, मगर इतना जरूर कहुंगी कि उसने बचपन से हिंसा का दुख झेला है, लेकिन राजनीति में आने के बाद उसने ऐसे भयंकर हमले का सामना किया, जिसने उसे मजबूत दिल का आदमी बनाया है। मुझे उसकी सहनशीलता पर विश्वास है। साथियों 20 साल गुजर गए हैं, करीब-करीब एक जीवन गुजर गया है, मैं सभी नागरिकों का असीम विश्वास का तहे दिल से शुक्रिया अदा करती हूं।

मनमोहन सिंह ने बताया देश को राहुल की जरूरत

इस मौके पर बोलते हुए मनमोहन सिंह ने पंडित जवाहर लाल नेहरू के पत्र का जिक्र किया जिसे उन्होंने इंदिरा गांधी को लिखा। मनमोहन सिंह ने कहा कि मैं सोनिया जी के साथ 19 साल तक जुड़ा रहा और उनके साथ मिलकर काम किया। इस दौरान सोनिया गांधी ने कांग्रेस को काफी मजबूत नेतृत्व दिया। इस दौरान देश का विकास दर सबसे ज्यादा रहा, 140 मिलियन लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया। दस साल के कार्यकाल के दौरान मनरेगा, आरटीआई जैसे कई बड़े सामामजिक सरोकार से जुड़े कदम सोनिया जी के मार्गदर्शन में लिए गए।हम सोनिया जी को सैल्यूट करते हैं, उन्होंने 19 साल तक पार्टी को मजबूत नेतृत्व दिया। राहुल जी कांग्रेस के भीतर नई आस्था, भरोसा लेकर आते हैं। वह आज कांग्रेस के अध्यक्ष पद को संभाल रहे हैं। भय की राजनीति को खत्म करने के लिए राहुल गांधी की जरूरत है। हमे अभी लाखों लोगों को गरीबी से बाहर निकालना है। राहुल जी आप पूरे देश में घूमे हैं और आपको पता है कि देश की क्या हालत है। मुझे पूरा भरोसा है कि आपके नेतृत्व में कांग्रेस नई उंचाइयों पर ले जाएंगे।

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रायबरेली सीट पर प्रियंका के लिए हो सकता है रास्ता साफ

जिस तरह से उन्होंने मीडिया के सामने आकर बयान दिया उससे इस बात की अटकलें शुरू हो गई थीं कि क्या सोनिया सक्रिय राजनीति से भी सन्यास ले रही है, लेकिन कांग्रेस की ओर से बयान जारी करके इस बारे में सफाई दी गई है कि वह पार्टी के अध्यक्ष पद से रिटायर हो रही हैं ना कि सक्रिय राजनीति से।

सोनिया गांधी के बयान के बाद अब सवाल यह भी उठने लगा है कि क्या वह 2019 के लोकसभा चुनाव में हिस्सा लेंगी। मौजूदा समय में वह रायबरेली सीट से सांसद हैं, इस सीट पर पहले इंदिरा गांधी सांसद थीं। यूपी की अमेठी और रायबरेली की लोकसभा सीट पर शुरू से ही नेहरू-गांधी परिवार का कब्जा रहा है, तकरीबन पांच दशक से यहां नेहरू-गांधी परिवार का कब्जा है। ऐसे में अगर सोनिया गांधी राजनीति से सन्यास लेती हैं तो इस सीट पर प्रियंका गांधी के आने का रास्ता साफ हो सकता है।

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