राहुल को बड़ी कानूनी राहत! कर्नाटक हाई कोर्ट ने मानहानि केस किया खत्म, जानिए ‘करप्शन रेट कार्ड' का पूरा सच
Rahul Gandhi News: कांग्रेस नेता राहुल गांधी को कर्नाटक हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। विधानसभा चुनावों के दौरान सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक राजनीतिक विज्ञापन को लेकर उनके खिलाफ दर्ज मानहानि की निजी शिकायत को अदालत ने पूरी तरह खारिज कर दिया है।
यह मामला चर्चित 'करप्शन रेट कार्ड' अभियान से जुड़ा था, जिसे लेकर भाजपा समर्थक ने आपराधिक शिकायत दर्ज कराई थी। हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद राहुल गांधी के खिलाफ चल रही कानूनी प्रक्रिया पर विराम लग गया है।

कर्नाटक हाई कोर्ट का फैसला क्या है? (Karnataka High Court Verdict)
कर्नाटक हाई कोर्ट की एकल पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए निचली अदालत द्वारा जारी समन को रद्द कर दिया। न्यायमूर्ति सुनील दत्त यादव की अध्यक्षता वाली बेंच ने स्पष्ट किया कि जिस कंटेंट को लेकर शिकायत की गई है, वह चुनावी भाषण और राजनीतिक प्रचार के दायरे में आता है। ऐसे मामलों में मानहानि का आपराधिक मुकदमा नहीं बनता। इस फैसले के साथ ही निजी शिकायत को सेट-असाइड कर दिया गया।
क्या है 'करप्शन रेट कार्ड' विवाद? (Corruption Rate Card Case)
यह पूरा विवाद कर्नाटक विधानसभा चुनाव के समय सामने आया था। चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस ने तत्कालीन भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए एक आक्रामक विज्ञापन अभियान चलाया। इसी अभियान का हिस्सा था 'करप्शन रेट कार्ड', जिसमें कथित तौर पर सरकारी कामों में रिश्वत के प्रतिशत दिखाए गए थे। राहुल गांधी ने इस कंटेंट को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया था, जिसे भाजपा समर्थक ने मानहानि बताते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया।
भाजपा समर्थक केशव प्रसाद ने दावा किया कि इस विज्ञापन से उनकी और पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा है। निचली अदालत ने इस शिकायत पर संज्ञान लेते हुए राहुल गांधी को समन जारी कर दिया था। इसके बाद राहुल गांधी ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा कि यह राजनीतिक आलोचना है, न कि व्यक्तिगत मानहानि। अदालत ने इस दलील को स्वीकार किया और साफ कहा कि चुनावी बहस को आपराधिक मानहानि के दायरे में नहीं लाया जा सकता।
फैसले का सियासी मतलब क्या? (Political Impact of Verdict)
इस आदेश को राहुल गांधी और कांग्रेस के लिए बड़ी कानूनी और राजनीतिक राहत माना जा रहा है। अदालत के फैसले से यह संदेश गया है कि चुनावी आलोचना और राजनीतिक विज्ञापन लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। वहीं भाजपा के लिए यह झटका माना जा रहा है, क्योंकि कोर्ट ने शिकायत को शुरू से ही खारिज कर दिया।
हाई कोर्ट के आदेश के बाद राहुल गांधी के खिलाफ इस मामले में कोई ट्रायल या आगे की कानूनी कार्रवाई नहीं होगी। 'करप्शन रेट कार्ड' को लेकर चला यह विवाद यहीं खत्म हो गया है। चुनावी राजनीति में यह फैसला एक मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है, जो बताता है कि हर राजनीतिक आरोप को मानहानि के मुकदमे में नहीं बदला जा सकता।












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