Raghu Rai: तस्वीरों से भोपाल गैस कांड की भयावहता दिखाने वाले रघु राय का निधन, तस्वीरों में छोड़ गए अमिट यादें
Raghu Rai Death: भारत की फोटो पत्रकारिता के पुरोधा और दुनिया भर में अपनी अनूठी दृष्टि के लिए विख्यात दिग्गज फोटोग्राफर रघु राय का रविवार (26 अप्रैल 2026) को 83 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके जाने से कला, मीडिया और फोटोग्राफी जगत में एक अपूरणीय शून्य पैदा हो गया है। रघु राय केवल एक फोटोग्राफर नहीं थे, बल्कि उन्हें 'भारत की तस्वीरों के जरिए दुनिया को भारत दिखाने वाला कलाकार' माना जाता था।
उन्होंने दशकों तक अपने लेंस के माध्यम से देश के बदलते सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य को बेहद संजीदगी से कैद किया। उनके निधन की जानकारी उनके आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक भावुक पोस्ट और उनकी एक यादगार ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर के साथ साझा की गई, जिसने उनके चाहने वालों को स्तब्ध कर दिया है।

Raghu Rai: साधारण पलों को खास बनाने वाला जादूगर
रघु राय की सबसे बड़ी खूबी उनकी 'कैमरा नजर' थी। वह आम जिंदगी के उन छोटे-छोटे पलों को भी इस तरह कैद करते थे कि वे एक कालजयी कहानी बन जाते थे। उनकी तस्वीरों में:
बनारस के घाट: जहां आध्यात्मिकता और जीवन का संगम दिखता था।
भारतीय गलियां और भीड़: जिनमें भारत की असली धड़कन सुनाई देती थी।
ग्रामीण जीवन: जिसमें सादगी और संघर्ष के रंग घुले होते थे।
उनके काम ने भारत की आत्मा को जीवंत किया। यही कारण है कि उनकी तस्वीरों को आज भी भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ माना जाता है।
बंटवारे के दर्द से 'मैग्नम फोटोज' तक का सफर
18 दिसंबर 1942 को अविभाजित भारत के झंग (अब पाकिस्तान) में जन्मे रघु राय का परिवार विभाजन के बाद भारत आ गया। उन्होंने 23 साल की उम्र में अपने बड़े भाई एस. पॉल के मार्गदर्शन में कैमरा थामा। उनकी प्रतिभा इतनी प्रखर थी कि महान फ्रांसीसी फोटोग्राफर हेनरी कार्टियर-ब्रेसों ने 1977 में उन्हें दुनिया की प्रतिष्ठित एजेंसी 'मैग्नम फोटोज' से जुड़ने के लिए नामित किया, जो किसी भी भारतीय के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी।
इतिहास के चश्मदीद गवाह
रघु राय ने अपने छह दशक लंबे करियर में भारत के कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक पलों को कैमरे में उतारा:
- भोपाल गैस त्रासदी: उनके द्वारा खींचे गए दर्दनाक दृश्य आज भी उस त्रासदी की गवाही देते हैं।
- मदर टेरेसा और इंदिरा गांधी: इन महान हस्तियों के साथ बिताए निजी पलों को उन्होंने बड़ी आत्मीयता से दुनिया के सामने रखा।
- सत्यजीत राय और दलाई लामा: उनके पोर्ट्रेट्स ने इन दिग्गजों के व्यक्तित्व के अनछुए पहलुओं को उजागर किया।
उन्होंने 'द स्टेट्समैन' और 'इंडिया टुडे' जैसी संस्थाओं के साथ काम किया और पद्मश्री समेत कई राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय सम्मानों से नवाजे गए।
26 अप्रैल की शाम होगा अंतिम संस्कार
रघु राय पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। उनके परिवार के अनुसार, उनका अंतिम संस्कार 26 अप्रैल 2026 को शाम 4 बजे दिल्ली के लोधी रोड श्मशान घाट में किया जाएगा। उनके पीछे उनकी पत्नी गुरमीत राय और बच्चे नितिन, लगन, अवनी और पुरवै हैं।
कला जगत में शोक की लहर
उनके निधन पर देशभर के कलाकारों और मशहूर हस्तियों ने शोक व्यक्त किया है। प्रसिद्ध फोटोग्राफर अतुल कस्बेकर ने उन्हें "भारत का सबसे महान फोटोग्राफर" बताते हुए कहा कि यह एक युग का अंत है। अभिनेत्री दिया मिर्जा और फिल्मकार स्वानंद किरकिरे ने भी उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। रघु राय भले ही शारीरिक रूप से चले गए हों, लेकिन उनकी खींची गई हजारों तस्वीरें आने वाली पीढ़ियों को भारत की 'दृश्य कहानी' सुनाती रहेंगी।












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