Raghav Chadha: राघव चड्ढा समेत 7 सांसद अब ऑफिशियल BJP के, राज्यसभा ने लगाई मुहर, भाजपा अब कैसे हुई और भी मजबूत
Rajya Sabha Chair Accepts Raghav Chadha BJP Merger: आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए सोमवार (27 अप्रैल) का दिन किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी को भारतीय राजनीति का सबसे बड़ा झटका लगा है। काफी दिनों से चल रही सियासी खींचतान के बाद, अब यह साफ हो गया है कि राघव चड्ढा और संदीप पाठक समेत 'आप' के 7 बागी सांसद आधिकारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का हिस्सा बन चुके हैं।
राज्यसभा सभापति ने इस विलय को हरी झंडी दे दी है और आधिकारिक वेबसाइट पर भी इन सभी के नाम के आगे अब बीजेपी लिख दिया गया है। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती है कि अब राज्यसभा में पूरा समीकरण बदल गया है, अब भाजपा पहले से और मजबूत हुई है।

राज्यसभा में बदला समीकरण, बीजेपी हुई और भी मजबूत (BJP Grows Stronger in Rajya Sabha)
राज्यसभा के चेयरमैन की मंजूरी मिलते ही उच्च सदन का पूरा समीकरण बदल गया है। राज्यसभा सचिवालय द्वारा जारी ताजा नोटिफिकेशन के अनुसार, अब ये सातों नेता बीजेपी सांसदों की सूची में गिने जाएंगे। इस फेरबदल के बाद राज्यसभा में बीजेपी के सांसदों की कुल संख्या बढ़कर 113 हो गई है। खास बात यह है कि इस आंकड़े में राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत 5 सदस्य भी शामिल हैं। राज्यसभा की वेबसाइट पर अब इन सांसदों के प्रोफाइल में 'पार्टी' वाले कॉलम में AAP की जगह BJP अपडेट हो चुका है।
बीजेपी में शामिल होने वाले 7 चेहरे कौन हैं? (Who are the 7 MPs Joining BJP?)
शुक्रवार को शुरू हुआ यह राजनीतिक घटनाक्रम सोमवार को अपने अंजाम तक पहुंच गया। जिन सांसदों ने 'झाड़ू' का साथ छोड़कर 'कमल' थामा है, उनमें पार्टी के कई दिग्गज चेहरे शामिल हैं। इन 7 सांसदों के नाम इस प्रकार हैं:
- राघव चड्ढा
- संदीप कुमार पाठक
- हरभजन सिंह
- स्वाति मालीवाल
- अशोक कुमार मित्तल
- विक्रमजीत सिंह साहनी
- राजेंद्र गुप्ता
इन सभी का स्वागत बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन ने मिठाई खिलाकर किया था। राघव चड्ढा और संदीप पाठक को केजरीवाल का बेहद करीबी माना जाता था, ऐसे में इनका जाना पार्टी के लिए वैचारिक और रणनीतिक, दोनों मोर्चों पर भारी नुकसान है।

'आप' के पास अब सिर्फ तीन का साथ (Only Three MPs Left with AAP)
एक समय राज्यसभा में अपनी ताकत दिखाने वाली आम आदमी पार्टी अब महज 3 सांसदों पर सिमट कर रह गई है। 10 सांसदों वाली इस पार्टी के 7 सदस्यों के टूटने के बाद अब केवल संजय सिंह, नारायण दास गुप्ता (एन.डी. गुप्ता) और संत बलबीर सिंह सीचेवाल ही पार्टी के साथ बचे हैं। यह गिरावट इतनी बड़ी है कि अब सदन में 'आप' की आवाज पहले जैसी प्रभावशाली नहीं रहेगी।
AAP के लिए क्यों बड़ा झटका माना जा रहा है? (Why This Is A Major Setback For AAP?)
आम आदमी पार्टी के लिए यह बदलाव सिर्फ संख्या का मामला नहीं है। पार्टी की राष्ट्रीय पहचान और संसदीय उपस्थिति पर भी इसका असर पड़ सकता है। पहले राज्यसभा में AAP के पास मजबूत उपस्थिति थी, लेकिन सात सांसदों के जाने के बाद अब पार्टी के पास केवल तीन सदस्य बचे हैं।
मौजूदा स्थिति में पार्टी का प्रतिनिधित्व करने वाले सांसदों में संजय सिंह, नारायण दास गुप्ता और संत बलबीर सिंह शामिल बताए जा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद में संख्या घटने से पार्टी की रणनीतिक ताकत और बहसों में प्रभाव भी सीमित हो सकता है।
संजय सिंह का गुस्सा और कानूनी जंग की तैयारी (Sanjay Singh's Outrage and Legal Battle)
इस पूरे घटनाक्रम पर आम आदमी पार्टी के कद्दावर नेता संजय सिंह बेहद गुस्से में नजर आए। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस दल-बदल को पूरी तरह से 'गैर-कानूनी' करार दिया। संजय सिंह का आरोप है कि बीजेपी ने नियमों को ताक पर रखकर यह काम किया है।
उन्होंने मांग की है कि राघव चड्ढा समेत सभी 7 बागी सांसदों की सदस्यता तुरंत रद्द की जानी चाहिए। हालांकि, जानकारों का कहना है कि अगर दो-तिहाई सांसद एक साथ टूटते हैं, तो उन पर दल-बदल कानून (Anti-Defection Law) लागू करना मुश्किल होता है, और शायद इसी तकनीकी पहलू का फायदा इन सांसदों को मिला है।












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