BJP ज्वाइन करने के बाद Raghav Chadha का पहला वीडियो: बताया क्यों गए भाजपा में? 'जनता के मुद्दों' पर दी सफाई
Raghav Chadha First Video After Join BJP: भारतीय राजनीति के सबसे चर्चित युवा चेहरों में से एक राघव चड्ढा ने 'आम आदमी पार्टी' को अलविदा कहकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है। बीजेपी में आधिकारिक एंट्री के बाद राघव ने अपना पहला वीडियो इंस्टाग्राम पर अपलोड किया। उसी इंस्टग्राम पर जहां उनको लाखों लोग हर दिन अनफॉलो कर रहे हैं।
इस वीडियो में उन्होंने न सिर्फ अपने पुराने साथियों पर गंभीर आरोप लगाए, बल्कि यह भी बताया कि आखिर क्यों एक फाउंडर मेंबर होने के बावजूद उन्हें अपनी ही बनाई पार्टी को छोड़ना पड़ा।

राघव बोले- वर्क एन्वायर्नमेंट टॉक्सिक हो चुका है
राघव चड्ढा ने वीडियो की शुरुआत में बड़े ही भावुक लहजे में कहा कि वह कभी अपना करियर बनाने के लिए राजनीति में नहीं आए थे। उन्होंने बताया कि राजनीति में आने से पहले वह एक सफल चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) थे, लेकिन एक बदलाव की उम्मीद में उन्होंने अपने जीवन के कीमती 15 साल 'आप' को दे दिए। राघव ने बताया कि वहां का वर्क एन्वायर्नमेंट टॉक्सिक हो चुका था। काम करने के माहौल बिल्कुल नहीं था। वहां किसी की बातें नहीं सुनी जा रही थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि अब पार्टी कुछ भ्रष्ट और स्वार्थी लोगों के हाथों की कठपुतली बन चुकी है। राघव ने कहा,
"वहां काम करने और बोलने की आजादी छीन ली गई थी। जब आपके काम को दबाया जाए और आपको चुप रहने पर मजबूर किया जाए, तो उस वर्कप्लेस को छोड़ देना ही सही फैसला होता है।"
राघव बोले- क्या मेरे साथ-साथ 7 सांसद भी गलत हैं?
अपने फैसले का बचाव करते हुए राघव ने एक बड़ा तर्क दिया। उन्होंने कहा कि अक्सर आरोप लगाया जाता है कि पार्टी छोड़ने वाला व्यक्ति गलत है, लेकिन यहां मामला अलग है। राघव ने सवाल किया, "मैं गलत हो सकता हूं, लेकिन क्या मेरे साथ पार्टी छोड़ने वाले सातों सांसद गलत हैं? क्या वे तमाम पढ़े-लिखे लोग भी गलत थे जो धीरे-धीरे इस पार्टी को छोड़कर चले गए?"
राघव का इशारा साफ था कि पार्टी के मूल सिद्धांतों में गिरावट आई है। राघव ने कहा,
'मेरे पास तीन ऑप्शन थे, राजनीति छोड़ देना, घुट-घुट कर उसी पार्टी में रहना और सोचना कि एक दिन में सबकुछ ठीक हो जाए। या फिर एक दूसरी पार्टी में आकर राजनीति में रहते हुए, जनता के लिए काम करना। मैंने तीसरा ऑप्शन चुना ताकि उनका अनुभव और एनर्जी देश के काम आ सके। राघव ने कहा कि मैं पहले की तरह ही जनता के मुद्दों को उठाता रहूंगा और जोश के साथ काम करूंगा और सिर्फ मुद्दे नहीं बल्कि अब उसकी प्रोबलम के लिए भी काम कर सकूंगा।'
जनता के मुद्दे अब और भी मजबूती से उठाऊंगा
अक्सर दल-बदल के बाद समर्थकों के मन में सवाल होता है कि क्या उनका नेता बदल जाएगा? इस पर राघव ने भरोसा दिलाया कि वह संसद में जनता के हक की आवाज पहले से भी ज्यादा जोश और जुनून के साथ उठाएंगे। उन्होंने कहा कि बीजेपी के साथ जुड़ने के बाद अब उनके पास उन समस्याओं का समाधान निकालने की भी शक्ति होगी, जिन्हें वह पहले सिर्फ उठाते थे।
सुरक्षा का सियासी खेल: AAP ने छीनी, केंद्र ने दी
इस राजनीतिक उठापटक के बीच सुरक्षा को लेकर भी 'पावर गेम' शुरू हो गया है। पंजाब की 'आप' सरकार ने बागी सांसदों की सुरक्षा में कटौती शुरू कर दी है। पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह की 'Y' कैटेगरी सुरक्षा जैसे ही पंजाब पुलिस ने हटाई, केंद्र सरकार ने तुरंत मुस्तैदी दिखाते हुए उन्हें CRPF की सुरक्षा दे दी।
यही हाल राघव चड्ढा और अशोक मित्तल के साथ भी हुआ। राघव की Z+ सुरक्षा हटाए जाने के बाद केंद्र ने उन्हें सुरक्षा कवच मुहैया कराया। अशोक मित्तल को भी केंद्र की ओर से 'Y' कैटेगरी की सुरक्षा दी गई है। यह साफ संकेत है कि केंद्र सरकार अपने नए साथियों की सुरक्षा में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती।
अब तक क्या-क्या हुआ? (AAP Political Crisis)
इस पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए इन अहम तारीखों पर गौर करना जरूरी है:
- 24 अप्रैल: राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर AAP छोड़ने का धमाका किया। इसी शाम राघव, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने बीजेपी ज्वाइन की।
- 26 अप्रैल: पंजाब सरकार ने हरभजन सिंह की सुरक्षा हटाई, केंद्र ने तुरंत अपनी सुरक्षा दी।
- 27 अप्रैल: राज्यसभा सभापति ने आधिकारिक तौर पर 7 सांसदों के बीजेपी में विलय को मंजूरी दी। अब राज्यसभा में बीजेपी की संख्या 113 पहुंच गई है।
उधर, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान इस पूरे मामले से नाराज हैं और उन्होंने राष्ट्रपति से 'राइट टू रिकॉल' की मांग करने के लिए समय मांगा है। वहीं, संजय सिंह इन सांसदों की सदस्यता रद्द कराने की कानूनी जुगत में लगे हैं। लेकिन फिलहाल, राघव चड्ढा और उनके साथी अब भगवा खेमे के 'माननीय' सदस्य बन चुके हैं।















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