राफेल को लैंड कराने के बाद मिला IAF पायलट को प्रमोशन, दादा बोले-अब घर में जश्‍न होगा डबल

अंबाला। इंडियन एयरफोर्स (आईएएफ) के लिए तैयार फ्रेंच फाइटर जेट राफेल की लैंडिंग आज अंबाला में हो गई। पांच राफेल जेट का पहला बैच बुधवार को हरियाणा के अंबाला एयरफोर्स स्‍टेशन फ्रांस और यूएई होता हुआ भारत पहुंच गया। पांच राफेल के इस दल में ग्रुप कैप्‍टन हरकीरत सिंह, ग्रुप कैप्‍टन रोहित कटारिया, विंग कमांडर मनीष सिंह, विंग कमांडर अभिषेक त्रिपाठी और स्‍वाड्रन लीडर रंजीत सिंह सिद्धू शामिल थे। इस सफल उड़ान के बाद ग्रुप कैप्‍टन रोहित कटारिया का प्रमोशन हो गया है। जब वह राफेल को देश में लाने के लिए निकले थे तो विंग कमांडर थे मगर अब वह ग्रुप कैप्‍टन की रैंक पर हैं।

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    बसई गांव के रहने वाले रोहित

    बसई गांव के रहने वाले रोहित

    ग्रुप कैप्‍टन कटारिया का पैतृक गांव गुरुग्राम मंडल में आने वाला बसई है। बुधवार को जैसे ही उन्‍होंने राफेल की लैंडिंग कराई, उनके गांव में जश्‍न शुरू हो गया। हालांकि उनका पूरा परिवार इस समय गुरुग्राम में रहता है लेकिन गांव के लोगों को ग्रुप कैप्‍टन कटारिया पर गर्व है। ग्रुप कैप्‍टन रोहित के पिता सतबीर सिंह भी सेना से रिटायर हैं और वह कर्नल की रैंक से सेवानिवृत्‍त हुए थे। कर्नल (रिटायर्ड) सतबीर सिंह ने कहा, 'हम बहुत उत्‍साहित तो थे लेकिन चिंतित भी थे। लेकिन लैंडिंग के बाद खुश थे। रोहित ने फ्रांस में राफेल की ट्रेनिंग पूरी की थी।

    दादा की आंखों में आए आंसू

    दादा की आंखों में आए आंसू

    वह एयरफोर्स के हर एयरक्राफ्ट को उड़ा चुका है जिसमें मिराज और सुखोई भी शामिल है। अब वह ग्रुप कैप्‍टन की रैंक पर प्रमोट हो गया है तो यह हमारे लिए दोहरे जश्‍न का मौका है।' वहीं रोहित के दादा नारायण सिंह का आंखों में पोते की उपलब्धि को देखकर आंसू आ गए। उन्‍होंने कहा कि यह हम सभी के लिए एक भावुक पल हैं। दादा के शब्‍दों में , 'हमने इस एतिहासिक दिन के लिए इंतजार किया था जब इस तरह का फाइटर जेट हवा में होगा और फिर अंबाला में लैंड करेगा। यह हमारे लिए एक गौरवशाली पल है।' एक जनवरी 1982 को बसई गांव में जन्‍में ग्रुप कैप्‍टन रोहित कटारिया ने झारखंड के सैनिक स्‍कूल से पढ़ाई पूरी की थी

    गांव वाले सेल्‍फी के लिए कर रहे इंतजार

    गांव वाले सेल्‍फी के लिए कर रहे इंतजार

    स्‍कूल की पढ़ाई के बाद वह नेशनल डिफेंस एकेडमी (एनडीए) पहुंचे। साल 2003 में वह आईएएफ में बतौर फ्लाइट लेफ्टिनेंट कमीशंड हुए थे। पिता सेना की एजुकेशन कोर से रिटायर हैं तो मां एक स्‍कूल टीचर हैं। वह एयरफोर्स ट्रेनिंग सेंटर में इंस्ट्रक्‍टर के तौर पर भी कार्यरत रहे हैं। वर्तमान समय में वह ग्‍वालियर में रहते हैं। गांववालों की मानें तो रोहित ने पूरे गांव का नाम रोशन किया है। वह आगे आने वाले युवाओं को हमेशा प्रेरित करते रहेंगे। अब गांव में ग्रुप कैप्‍टन रोहित के आने का इंतजार हो रहा है ताकि उनके साथ सेल्‍फी खिचवाई जा सके।

    राफेल के करीब नहीं आ सकता चीन

    राफेल के करीब नहीं आ सकता चीन

    बुधवार को राफेल की लैंडिंग पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी प्रतिक्रिया दी। पीएम मोदी ने वायुसेना के अंदाज में राफेल का स्‍वागत करते हुए एक ट्वीट किया है। पीएम ने राफेल की लैंडिंग का वीडियो शेयर करते हुए लिखा, 'नभः स्पृशं दीप्तम्,' और यह वायुसेना का ध्‍येय वाक्‍य है। राफेल का पहला बैच ऐसे समय में अंबाला पहुंचा है जब लाइन ऑफ एक्‍चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर चीन के साथ टकराव जारी है। पूर्व वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल (रिटायर्ड) बीएस धनोआ का कहना है कि अंबाला में उतरे पांच राफेल जेट के आगे चीन के खिलाफ जारी युद्ध एक कदम और आगे जाएगा। उन्‍होंने कहा राफेल के आने से वायुसेना काफी ताकतवर हो गई है और चीन इसके करीब भी नहीं पहुंच सकता है।

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