'रावण और कंस' से कांग्रेस नेताओं की तुलना! राधिका खेड़ा के आरोपों के क्यों हैं बड़े सियासी मायने
Radhika Khera News: राधिका खेड़ा कांग्रेस छोड़ने वाली पार्टी की बड़ी नेताओं की लिस्ट में एक नया नाम हैं। उन्होंने कांग्रेस नेताओं पर बहुत ही गंभीर आरोप लगाते हुए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ी है। उनके और हाल में कांग्रेस छोड़ने वाले कुछ बड़े नेताओं की पार्टी से नाराजगी में एक बात सामान्य है।
कांग्रेस छोड़ने वाले अधिकतर नेताओं ने पार्टी में हिंदू और सनातन-विरोधी माहौल होने का आरोप लगाया है। राधिका खेड़ा कांग्रेस की नेशनल मीडिया कॉर्डिनेटर थीं और उन्होंने पार्टी दफ्तर में खुद के साथ कांग्रेस नेताओं की अभद्रता के आरोप लगाए हैं, लेकिन उनके मुताबिक पार्टी आला कमान ने उनकी शिकायतों को अनसुना कर दिया।

कांग्रेस दफ्तर में महिला नेता से किसके इशारे पर अभद्रता?
राधिका खेड़ा का आरोप है कि छत्तीसगढ़ पार्टी दफ्तर में उनके साथ अभद्रता राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान हुई। लेकिन, न तो राहुल और न ही उनकी बहन और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने उनकी 'न्याय' की गुहार की ओर ध्यान देने की जरूरत समझी। लेकिन, सवाल है कि पार्टी की एक बड़ी महिला पदाधिकारी के साथ पार्टी दफ्तर में दुर्व्यवहार करने की किसी की हिम्मत कैसे हुई?
प्रभु राम के दर्शन के चलते कांग्रेस में मिली सजा?
राधिका खेड़ा ने इसकी जो वजह बताई है, वह बहुत ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, 'जिस दिन से मैं राम लला के दर्शन करके आई हूं, मुझे निरंतर विरोध का सामना करना पड़ रहा है पार्टी में...और वो विरोध मुझे न्याय के हक से दूर कर देगा मुझे न्याय नहीं दिया जाएगा ऐसा होगा प्रभु श्रीराम के दर्शन करने के लिए इस तरह से मेरे साथ व्यवहार और बर्ताव किया जाएगा ये नहीं सोचा था।'
'रावण और कंस' से कांग्रेस नेताओं की तुलना!
उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजे इस्तीफे की पहली लाइन में ही कांग्रेस पर हिंदू-विरोधी मानसिकता के हावी होने के आरोप लगा दिए हैं। उनके इस्तीफे की पंक्तियों की शुरुआत यहां से होती, "आदिकाल से ये स्थापित सत्य है कि धर्म का साथ देने वालों का विरोध होता रहा है। हिरण्यकश्यपु (हिरण्यकश्यप) से लेकर रावण और कंस तक इसका उदाहरण हैं। वर्तमान में प्रभु श्री राम का नाम लेने वालों का कुछ लोग इसी तरह विरोध कर रहे हैं।"
राधिक खेड़ा को बीजेपी देगी न्याय?
उन्होंने राहुल के बारे में कहा है, 'न्याय की बात कर रहे हैं पूरे देश में और उन्हीं की पार्टी के पदाधिकारी के साथ वहां पर अन्याय हो रहा था, तब भी नहीं हुई सुनवाई। क्योंकि, राहुल गांधी व्यस्त थे। उन्हें अपने ट्रेलर में बैठकर पता नहीं क्या देखना था, अपने सोशल मीडिया पर।'
हालांकि, राधिका खेड़ा ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह आगे कहां जाने वाली हैं। लेकिन, अगर कांग्रेस पर हिंदू और सनातन-विरोधी होने का आरोप लगाकर पार्टी छोड़ने वाले नेताओं के हालिया ट्रेंड को देखें तो लगता है कि खेड़ा का भी अपने सहयोगियों की तरह अगला ठिकाना बीजेपी हो सकता है।
लंबी होती जा रही है कांग्रेस छोड़ने वाले नेताओं की लिस्ट
इससे पहले प्रमोद कृष्णम, गौरव बल्लभ, अर्जुन मोढवाडिया और रोहन गुप्ता जैसे बड़े नेताओं ने भी कांग्रेस पर इस तरह के आरोप लगाकर पार्टी छोड़ चुके हैं। गुजरात में कांग्रेस के दिग्गज मोढवाडिया राम मंदिर के उद्घाटन का निमंत्रण ठुकराने पर पार्टी को टाटा कह दिया था। वहीं रोहन गुप्ता ने पार्टी का टिकट भी ठुकरा दिया।
इसी तरह से गौरव बल्लभ कभी टीवी चैनलों पर कांग्रेस के दिग्गज चेहरा बने हुए थे, लेकिन उनका भी मोहभंग इसी वजह से कांग्रेस से हो गया,यही आरोप लगाकर उन्होंने भाजपा का कमल थामने का फैसला किया है।
'शाहबानो केस की तरह राम मंदिर पर फैसला पलटेंगे राहुल गांधी'
वहीं प्रमोद कृष्णम ने तो अब कांग्रेस पर यहां तक आरोप लगाया दिया है कि राहुल गांधी की मंशा है कि सत्ता में आने पर उसी तरह से राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलट देंगे, जैसे उनके पिता पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने शाहबानो केस में किया था।
उनका आरोप है, 'राहुल गांधी ने अमेरिका में रहने वाले अपने एक शुभचिंतक, सलाहकार के कहने पर ये बात कही थी कि अगर हमारी सरकार बनती है तो हम सुपर पावर कमीशन बनाकर राम मंदिर के फैसले को पलट देंगे। उन्होंने ये भी कहा था कि जिस तरह से शाहबानो का फैसला राजीव गांधी जी ने पलटा था.....जब शाहबानो का फैसला बदला जा सकता है तो राम मंदिर का फैसला क्यों नहीं बदला जा सकता है।'(इनपुट-एएनआई)












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