ईवीएम पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस ने की पेपर बैलेट वापसी की मांग, कहा-'पीएम के इजराइल के साथ अच्छे संबंध'

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन की विश्वसनीयता को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने झारखंड और महाराष्ट्र में आगामी विधानसभा चुनावों में पारंपरिक मतपत्र यानी पेपर बैलेट की वापसी के लिए जोरदार अपील की है। उन्होंने प्रौद्योगिकी के संभावित दुरुपयोग की ओर इशारा करते हुए ऐतिहासिक उदाहरणों के साथ इसकी तुलना की है।

जहां तकनीक का इस्तेमाल हानिकारक उद्देश्यों के लिए किया गया था। अल्वी ने एक मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि कथित तौर पर इजरायल ने संशोधित पेजर का उपयोग कर लोगों को निशाना बनाया था। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजरायल के बीच घनिष्ठ संबंधों का जिक्र करते हुए यह सवाल उठाया कि यदि संचार उपकरणों के साथ ऐसा संभव है तो ईवीएम की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं उठना स्वाभाविक है।

election commition

चुनाव आयोग द्वारा झारखंड और महाराष्ट्र में विधानसभा चुनावों के लिए कार्यक्रम की घोषणा के बीच अल्वी की टिप्पणियों ने चुनावी पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर एक व्यापक बहस छेड़ दी है। अल्वी ने महाराष्ट्र में विपक्षी दलों की मांग को रेखांकित करते हुए कहा कि ईवीएम की बजाय पेपर बैलेट से चुनाव कराए जाने की आवश्यकता है। ताकि चुनावी हेरफेर की संभावना को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि अगर इजरायल पेजर और वॉकी-टॉकी के इस्तेमाल से लोगों को मार सकता है तो ईवीएम कितनी सुरक्षित हो सकती है। प्रधानमंत्री के इजरायल के साथ अच्छे संबंध हैं और इजरायल ऐसी तकनीकों में महारत रखता है।

झामुमो ने उठाए चुनाव आयोग पर सवाल

झारखंड मुक्ति मोर्चा ने भी अल्वी की बातों का समर्थन करते हुए चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी के प्रभाव में काम करने का आरोप लगाते हुए एक घटना का जिक्र किया। जिसमें भाजपा नेताओं को चुनाव की तारीखों की घोषणा से पहले ही जानकारी होने का दावा किया गया। जेएमएम नेता मनोज पांडे ने कहा कि आज चुनाव की घोषणा होनी है। लेकिन भाजपा नेताओं को इसकी जानकारी पहले ही मिल गई। यह बहुत गंभीर मामला है। क्या आयोग भाजपा के इशारे पर काम कर रहा है। चुनाव आयोग को कठपुतली बनाकर रखना गंभीर चिंता का विषय है।

विपक्ष के ईवीएम को लेकर पुराने आरोप

यह कोई पहली बार नहीं है। जब ईवीएम की सुरक्षा पर सवाल उठाए गए हैं। विपक्षी दलों ने बार-बार आरोप लगाया है कि भाजपा की चुनावी जीत के पीछे ईवीएम में छेड़छाड़ हो सकती है। हालांकि चुनाव आयोग ने इन आरोपों का खंडन किया है। हाल ही में हरियाणा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की अप्रत्याशित हार के बाद ये सवाल और अधिक जोर पकड़ने लगे हैं। हरियाणा में भाजपा ने 90 में से 48 सीटें जीती। जबकि कांग्रेस को केवल 37 सीटों से संतोष करना पड़ा।

बैलेट पेपर की वापसी की मांग

ईवीएम की सुरक्षा और भारत के चुनावों की निष्पक्षता को लेकर विवाद लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए आवश्यक है। जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव करीब आते हैं। ईवीएम के उपयोग या पेपर बैलेट पर लौटने को लेकर बहस तेज हो गई है। चुनाव आयोग की भूमिका और निष्पक्ष चुनाव कराने की उसकी क्षमता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने और लोगों का विश्वास बनाए रखने के लिए चुनावी प्रक्रिया में बदलाव जरूरी है।

देश चुनाव की तारीखों की घोषणा का इंतजार कर रहा है और इस बीच पेपर बैलेट पर लौटने का आह्वान लोकतंत्र की रक्षा और हर वोट की निष्पक्ष गिनती सुनिश्चित करने के प्रयास में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

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