अनोखी पहल! शादी की पार्टी में रखा दानपात्र, दूल्हे ने मेहमानों से गिफ्ट की बजाए किसानों के लिए मांगा दान
नई दिल्ली। कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले दो सप्ताह से भी अधिक समय से दिल्ली की सीमाओं पर धरना प्रदर्शन कर रहे किसानों के समर्थन में देशभर से कई लोग सामने आए हैं। इस बीच हर कोई अपने-अपने स्तर पर किसानों की मदद कर उनकी लड़ाई का हिस्सा बन रहा है। ऐसी ही इंसानियत की मिसाल पेश करती एक पंजाब से सामने आई है। यहां शादी समारोह के दौरान परिवार ने मेहमानों से गिफ्ट लेने की बजाए किसानों की सहायता के लिए आर्थिक दान करने के लिए प्ररित किया। इसके लिए परिवार ने शादी के पंडाल में किसानों के नाम से एक दानपात्र भी रखा था।

किसानों की मदद के लिए शादी में रखा दानपात्र
दरअसल, मामला पंजाब के मुक्तसर साहिब का है जहां के रहने वाले एक परिवार ने अपने रिश्तेदारों और दोस्तों से हाल ही में अपने बेटे की शादी के दौरान उपहार देने की बाजाए प्रदर्शनकारी किसानों के लिए पैसे दान करने के लिए कहा। इतना ही नहीं लोग उस समय हैरान हो गए जब उन्होंने समारोह में आयोजन स्थल में एक दान पेटी रखी देखी। परिवार ने मेहमानों से अपील की कि वह हाल ही में बनाए गए तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली और आस-पास के क्षेत्रों में विरोध कर रहे किसानों के लिए दिल खोलकर दान करें।

दूल्हे ने मेहमानों से किया ये आग्रह
दूल्हे अभिजीत सिंह ने अपनी शादी में आए मेहमानों से कहा, 'यह हमारा संघर्ष है और हम सभी को मिलकर इसका मुकाबला करना चाहिए। सभी को उनकी मदद करनी चाहिए। मैं युवा पीढ़ी से समाज के लिए कुछ करने का आग्रह करना चाहूंगा, और खुद भी उनके समर्थन में सामने आऊंगा'। दूल्हे के एक रिश्तेदार ने एएनआई को बताया कि उनका पूरा परिवार किसानों के लिए कुछ करने को तैयार है। उन्होंने कहा, हम यहाँ जश्न मना रहे है जबकि किसान विरोध कर रहे हैं। इसलिए हमने उनके समर्थन में दान करने के बारे में सोचा।

ध्वनिमत से पारित किया गया था कृषि बिल
बता दें कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कृषि कानूनों के खिलाफ ज्यादातर किसान पंजाब से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। बता दें कि संसद के मानसून सत्र में इन बिलों कोविपक्षी दलों कीआपत्ति के बावजूद ध्वनिमत से पारित किया गया था। बता दें कि किसान अपनी मांगों को पर अड़े हुए हैं। उनकी मांग है कि कृषि बिलों को रद्द किया जाए। वहीं, दूसरी ओर सरकार का कहना है कि किसानों के लिए बनाए गए कानून उनके हित के लिए हैं। सरकार और किसानों के बीच अब तक छह बार बैठक हो चुकी है।
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