लोकसभा चुनाव 2019: विदिशा लोकसभा सीट के बारे में जानिए

नई दिल्ली: मध्यप्रदेश की विदिशा लोकसभा सीट से सांसद भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज हैं। भाजपा की दिग्गज नेता सुषमा स्वराज ने साल 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के कद्दावर नेता लक्ष्मण सिंह को 41, 06,98 वोटों से हराकर बड़ी जीत अर्जित की थी। साल 2014 के चुनाव में यहां कुल वोटरों की संख्या 16 लाख 34 हजार 370 थी, जिनमें से मात्र 10 लाख 73 हजार 473 लोगों ने अपने मतों का प्रयोग किया था, जिसमें पुरुषों की संख्या 6,21,326 और महिलाओं की संख्या 4,52,147 थी। सुषमा स्वराज लगातार दो बार से इस सीट से सांसद हैं।

profile of Vidisha lok sabha constituency

विदिशा लोकसभा सीट का इतिहास

साल 1967 में विदिशा संसदीय सीट अस्तित्व में आई थी, यहां के पहले ही लोकसभा चुनाव में भाजपा ने जीत का परचम लहराया था और पंडित शिव शर्मा यहां से सांसद बने थे। इसके बाद 1971 के चुनाव में भी यहां भगवा पताका ही फहराई लेकिन 1977 का चुनाव यहां से जनता पार्टी ने जीता। इसके बाद 1980 और 1984 के चुनाव में यहां से कांग्रेस जीती लेकिन 1989 के चुनाव में यहां भाजपा की जीत हुई और तब से लेकर आज तक केवल यहां भाजपा का राज रहा है। साल 1991 के चुनाव में यहां से देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने जीत दर्ज की थी, अटल बिहारी ने उस साल विदिशा के साथ-साथ लखनऊ से भी चुनाव लड़ा था और वो दोनों जगह से विजयी हुए थे। लेकिन बाद में उन्होंने लखनऊ को चुना और विदिशा को छोड़ दिया था। इसी के चलते बीजेपी ने शिवराज सिंह चौहान को विदिशा से उपचुनाव लड़ाया और शिवराज सिंह चौहान 1991 से लेकर 2005 तक विदिशा के सांसद रहे लेकिन मध्य प्रदेश के सीएम बनने के बाद शिवराज सिंह को लोकसभा सीट से इस्तीफा देना पड़ा, जिसके बाद यहां उपचुनाव हुए भाजपा के रामपाल सिंह यहां से सांसद बने। साल 2009 का चुनाव यहां से सुषमा स्वराज ने जीता और वो लगातार दो बार से इस सीट पर सांसद हैं।

विदिशा लोकसभा सीट, परिचय प्रमुख बातें-

ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण विदिशा हिंदू,बौद्ध और जैन धर्म के समृद्ध केन्द्र के रूप में जाना जाता है और कैलाश सत्यार्थी को नोबेल शांति पुरस्कार मिलने के बाद तो यह शहर विश्नस्तर पर लोकप्रिय हो गया है। बता दें कि कैलाश सत्यार्थी का जन्मस्थान विदिशा ही है। यहां की जनसंख्या 25 लाख 35 हजार 632 है, जिसमें से 76 प्रतिशत लोग गांवों में और 23 प्रतिशत शहरों में निवास करते हैं। विदिशा की 88 प्रतिशत आबादी हिंदू धर्म में और 10 प्रतिशत लोग इस्लाम धर्म में भरोसा रखते हैं।

जहां विदिशा भाजपा का गढ़ बन गई है वहीं कांग्रेस अरसे से यहां जीत के लिए तरस रही है, हालांकि विधानसभा चुनावों के नतीजे के बाद उसके आत्मविश्वास में वृद्धि हुई है क्योंकि साल 1977 से लगातार जीतती आ रही विदिशा विधानसभा सीट पर इस बार कांग्रेस ने बड़ी जीत दर्ज की थी , जिसके बाद उसे लगता है कि यही जादू लोकसभा चुनावों में भी देखने को मिल सकता है, तो वहीं सुषमा स्वराज ने चुनाव ना लड़ने का ऐलान कर दिया है, ऐसे में भाजपा कैसे इस सीट को अपने पास बचाकर रख पाएगी, ये एक देखने वाली बात होगी, फिलहाल इस सीट पर जबरदस्त मुकाबला देखने को मिलेगा, ऐसी उम्नीद की जा सकती है, देखते हैं इस बार विदिशा की सत्ता किसके हाथ में आती है।

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