लोकसभा चुनाव 2019: टोंक-सवाई माधोपुर लोकसभा सीट के बारे में जानिए

नई दिल्ली: राजस्थान की टोंक-सवाई माधोपुर लोकसभा सीट से मौजूदा सांसद भाजपा के सुखबीर सिंह जौनापुरिया हैं। साल 2014 के चुनाव में उन्होंने यहां कांग्रेस के स्टार प्रचारक और जानेमाने क्रिकेटर मोहम्मद अजहरूद्दीन को हराया था। सुखबीर सिंह जौनपुरिया को इस चुनाव में 54,81,79 वोट मिले थे वहीं कांग्रेस के मोहम्मद अजहरूद्दीन को 41,28,68 वोटों पर संतोष करना पड़ा था। साल 2014 के चुनाव में इस सीट पर नंबर 2 पर कांग्रेस और नंबर 3 पर NPEP थी |

profile of Tonk–Sawai Madhopur lok sabha constituency

टोंक-सवाई माधोपुर लोकसभा सीट का इतिहास

टोंक-सवाई माधोपुर लोकसभा सीट परिसीमन के बाद 2008 में अस्तित्व में आई थी, जिसके बाद साल 2009 में यहां आम चुनाव हुए थे। इस चुनाव में कांग्रेस को विजय हासिल हुई थी और नमो नारायण मीणा सांसद बने थे लेकिन साल 2014 के चुनाव में यहां भाजपा जीत गई और सांसद की कुर्सी पर सुखबीर सिंह जौनापुरिया बैठे। बताते चलें कि परिसीमन के बाद टोंक जिले के चार और सवाई माधोपुर के चार विधानसभा क्षेत्रों को मिलाकर टोंक-सवाई माधोपुर लोकसभा सीट बनाई गई है। गौरतलब है कि सवाई माधोपुर जिला अपने रणथम्‍भौर राष्‍ट्रीय उद्यान के लिए जाना जाता है, जो कि बाघों के लिए प्रसिद्ध है। इस शहर की स्थापना सवाई माधो सिंह प्रथम ने की थी जो जयपुर के महाराजा थे इसलिए इस जगह का नाम सवाई माधोपुर पड़ा, इस जिले का इतिहास रणथंभौर दुर्ग के आस-पास भी घूमता है, जिसे देखने के लिए लाखों की संख्या में लोग यहां आते हैं। बहुत सारी ऐतिहासिक इमारतों को समेटे इस शहर की जनसंख्या 27,56,877 है, जिसमें से 78 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है और 21 प्रतिशत शहरों में, जबकि टोंक जिले में राजस्थान की सबसे बड़ी मिर्च मंडी है।

सुखबीर सिंह जौनापुरिया का लोकसभा में प्रदर्शन

सुखबीर सिंह जौनापुरिया का नाम हाल ही में इसलिए सुर्खियों में आया था क्योंकि उन्होंने टोंक को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए हजारों की संख्या में पेड़ लगवाए थे, वो भी अपने खर्चे पर, जिसकी कीमत लाखों के आस-पास थी, दिसंबर 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 5 सालों के दौरान उनकी लोकसभा में उपस्थिति 97 प्रतिशत रही थी और इस दौरान उन्होंने 71 डिबेट में हिस्सा लिया और 309 प्रश्न पूछे हैं। 2014 के आम चुनाव में कुल मतदाताओं की संख्या 17 लाख 10 हजार 775 थी, जिसमें से मात्र 10 लाख 43 हजार 40 लोगों ने अपने मतों का प्रयोग किया था, जिनमें पुरुषों की संख्या 5 लाख 83 हजार 685 और महिलाओं की संख्या 4 लाख 59 हजार 355 थी।

सवाई माधोपुर में मुख्य रूप से मुस्लिम, मीणा और गुर्जर वोटों का प्रभाव है, इनके अलावा एससी, ब्राह्मण, माली और राजपूत समाज भी यहां निर्णायक वोटों की लिस्ट में आते हैं, मीणा वोटों को अपनी ओर करने के लिए ही कांग्रेस ने यहां साल 2009 में नमो नारायण मीणा को टिकट दिया था, जिसमें वो सफल हुई थी और मुस्लिम वोट को ध्यान में रखते हुए उसने साल 2014 में मोहम्मद अजहरूद्दीन को यहां से चुनाव लड़वाया था लेकिन उसका गणित यहां फेल हो गया और मोदी लहर में सुखबीर सिंह जौनापुरिया यहां पर बाजी मार ले गए, फिलहाल इस बार सियासी हवा राजस्थान में बदली हुई है, राज्य की सत्ता से भाजपा आउट हो गई है, ऐसे में क्या कांग्रेस की वापसी यहां हो पाएगी, यह एक देखने वाली बात होगी तो वहीं बीजेपी इस सीट को अपने पास बचाने के लिए क्या दांव चलती है इस पर भी सबकी नजर है, कुल मिलाकर इस सीट का मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है।

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