लोकसभा चुनाव 2019: सोनीपत लोकसभा सीट के बारे में जानिए
नई दिल्ली: हरियाणा की सोनीपत लोकसभा सीट से मौजूदा सांसद रमेश चंद्र कौशिक हैं। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर में कौशिक पहली बार संसद पहुंचे थे। बीते चुनाव में कौशिक को कुल 347,203 वोट मिले थे जबकि कांग्रेस के जगबीर सिंह मलिक को 269,789 वोट। 77,414 वोटों के मार्जिन से जीतने वाले कौशिक का वोट शेयर 35 प्रतिशत रहा। हरियाणा का सोनीपत उन स्वर्णप्रस्थों में से एक है, जिनकी मांग पांडवों ने दुर्योधन से महाभारतकाल में की थी। महाभारत काल से ही यह क्षेत्र राजनीति का गढ़ बना रहा है। 2014 में इस सीट पर कुल 1,417,188 लोगों का नाम वोटर लिस्ट में था, जिनमें से 985,637 लोगों ने वोट दिया। मत का प्रयोग करने वालों में 551,168 पुरुष और 434,469 महिलाएं शामिल थीं। 2019 के आम चुनाव में यह वोट प्रतिशत बढ़ेगा या घटेगा यह तय करने वाले किसान और छोटे कामगार होंगे। सोनीपत संसदीय क्षेत्र की कुल जनसंख्या 2,207,027 है। इसमें से 69.19 फीसदी लोग ग्रामीण इलाकों में रहते हैं, जबकि 30.81 फीसदी लोग शहरी इलाकों में रहते हैं।

रमेश चंद्र कौशिक का लोकसभा में प्रदर्शन
सोनीपत से सांसद रमेश चंद्र कौशिक की संसद में पिछले पांच सालों में उपस्थिति 100 फीसदी रही। वो एक दिन भी संसद में अनुपस्थित नहीं हुए। उन्होंने 2014 से लेकर दिसम्बर 2018 तक लोकसभा में 18 परिचर्चाओं में हिस्सा लिया। जबकि राज्य का औसत 58.5 और राष्ट्रीय औसत 58.5 है। उन्होंने पांच सालों में संसद में केवल एक प्राइवेट मेंबर बिल प्रस्तुत किया। वहीं पिछले पांच सालों में उन्होंने 213 सवाल लोकसभा में पूछे, जबकि राज्य का औसत 250 था और राष्ट्रीय औसत 273 था।
गौरतलब है कि साल 1999 के बाद से यहां भाजपा ने तीन बार जीत दर्ज की है। भाजपा के किशन सिंह सांगवान यहां सबसे लंबे समय तक सांसद रहे हैं। सांगवान 1998 से 2009 तक सांसद रहे थे। 2009 में कांग्रेस के जितेंदर सिंह मलिक जीते और फिर 2014 में कौशिक। बीते चुनावों की बात करें तो आईएनएलडी का वोटबैंक भी यहां अच्छा है। पिछले चुनाव में कांग्रेस भले ही दूसरे स्थान पर रही हो, लेकिन तीसरे स्थान पर रहने वाली आईएनएलडी का वोटशेयर उससे केवल एक प्रशित कम रहा। कांग्रेस 27 और आईएनएलडी का वोट शेयर 26 फीसदी रहा। पिछली बार कांग्रेस का वोटशेयर भाजपा की तरफ खिसका था। इस साल भाजपा का वोटबैंक बढ़ेगा या घटेगा यह कौशिक के कामकाज पर निर्भर करेगा। यहां के किसान मोदी सरकार की नीतियों से कितने खुश हैं ये आने वाले लोकसभा चुनाव में दिखेगा।












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