लोकसभा चुनाव 2019- सीवान लोकसभा सीट के बारे में जानिए

नई दिल्ली: बिहार की सीवान लोकसभा सीट पर वर्तमान सांसद भाजपा के ओम प्रकाश यादव हैं। उन्होंने आरजेडी उम्मीदवार को शिकस्त दी थी। सीवान की पहचान कभी देशरत्न डॉ राजेंद्र प्रसाद से थी, मगर अब यह मोह्म्मद शहाबुद्दीन के नाम से अधिक जाना जाता है। दबंग शहाबुद्दीन ने 1996, 1998, 1999 और 2004 में सीवान से लोकसभा का चुनाव जीता। जेल में रहकर भी वे सीवान की राजनीति पर अपना प्रभाव डालते हैं।

profile of Siwan lok sabha constituency

सीवान लोकसभा सीट का इतिहास

सीवान लोकसभा सीट में 6 विधानसभा की सीटें हैं। सीवान, जीरादेई, दरौली, रघुनाथपुर, दरौंदा और बरहरिया। बीजेपी के पास केवल एक सीट सीवान की है, जबकि सीपीआईएमएल के पास भी एक सीट है दरौली। इसी तरह रघुनाथपुर की सीट आरजेडी के पास है। जेडीयू के पास बाकी तीन विधानसभा की सीटे हैं। साल 2004 में ओम प्रकाश यादव ने जेडीयू के टिकट पर चुनाव लड़ा था और मोहम्मद शहाबुद्दीन से चुनाव हार गये थे। 2009 के चुनाव में ओम प्रकाश निर्दलीय सांसद चुने गये और 2014 का चुनाव उन्होंने बीजेपी के टिकट पर जीता था। उन्होंने आरजेडी उम्मीदवार को शिकस्त दी थी। इस सीट की खासियत ये है कि यहां सीपीआईएमएल भी एक शक्ति हुआ करती है। यहां से जेडीयू उम्मीदवार भी चुनाव लड़ता आया है। एकतरह से चतुष्कोणीय मुकाबले के लिए सीवान जाना जाता है।

ओमप्रकाश का लोकसभा में प्रदर्शन

एक सांसद के रूप में अगर ओमप्रकाश की परफॉर्मेंस देखें तो उन्होंने 55 बार बहस में हिस्सा लिया। अपने कार्यकाल के दौरान कुल 401 सवाल पूछे। 24 प्राइवेट बिल लेकर आए। संसद में उपस्थिति 85 फीसदी रही।

सीवान में विगत लोकसभा चुनाव में 57 फीसदी वोट पड़े थे। सीवान में कुल 15 लाख 63 हजार से ज्यादा वोटर हैं। इन मतदाताओँ में 93 फीसदी से ज्यादा ग्रामीण हैं। पूरा इलाका पिछड़ा माना जाता है। खेतिहर मजदूरों की दशा अच्छी नहीं है। इलाके में विकास की गतिविधियां अधिक दिखलायी नहीं पड़ती। सीवान लोकसभा सीट के संदर्भ में यह बात भी महत्वपूर्ण है कि यहां जेडीयू की ओर से मनोज कुमार सिंह ने भी पिछला चुनाव लड़ा था और लगभग 9 फीसदी वोट हासिल किया था। मनोज कुमार सिंह कभी शहाबुद्दीन के जिगरी दोस्त थे मगर बाद में संबंध दुश्मनी का हो गया। शहाबुद्दीन की पत्नी हिना शहाब इस बार भी आरजेडी की ओर से महागठबंधन की उम्मीदवार होंगी। मगर, देखने वाली बात ये होगी कि क्या मनोज सिंह चुनाव मैदान में हटने को तैयार होंगे? या वे जेडीयू से भी बगावत कर चुनाव लड़ने को तत्पर दिखेंगे? अगर मनोज सिंह चुनाव मैदान से हट जाते हैं तो बीजेपी की राह बिल्कुल आसान हो जाएगी। मगर, उनके चुनाव मैदान में होने से आरजेडी को राजनीतिक फायदा हो सकता है।

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