लोकसभा चुनाव 2019 : शिरूर लोकसभा सीट के बारे में जानिए
नई दिल्ली: महाराष्ट्र की शिरूर लोकसभा सीट से मौजूदा सांसद शिवसेना के शिवाजी आढलराव पाटील हैं। उन्होंने साल 2014 के लोकसभा चुनाव में यहां पर एनसीपी के देवदत्त निकम को 301, 814 वोटों से हराया था। शिवाजी आढलराव पाटिल को यहां पर 643, 415 वोट मिले थे तो वहीं देवदत्त निकम को मात्र 341, 601 मतों पर संतोष करना पड़ा था। इस सीट पर मनसे प्रत्याशी को 36,448 वोट मिले थे, वो तीसरे स्थान पर थे तो वहीं बसपा प्रत्याशी 19,783 वोट पाकर चौथी पोजिशन हासिल हुई थी।

शिरूर संसदीय सीट का इतिहास
शिरूर संसदीय सीट 2008 के परिसीमन के बाद पुणे में बनी दो सीटों में से एक है। इस वक्त शिरूर संसदीय सीट के अंतर्गत विधानसभा की 6 सीटें आती हैं। परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई इस सीट पर 2009 में हुए पहले आम चुनावों में शिवसेना के शिवाजी आढलराव पाटील जीते थे और उन्हें तब 57.53 फीसदी वोट मिले थे, उनका जलवा साल 2014 में भी बरकरार रहा और पाटिल यहां से दोबारा विजयी हुए। हाल ही में पाटील अपनी ऑटोबॉयोग्राफी की वजह से काफी चर्चित थे, उन्हें साल 2014 और 2016 में संसद रत्न अवार्ड से नवाजा जा चुका है।
शिरूर, परिचय-प्रमुख बातें-
शिरूर महाराष्ट्र के पुणे जिले का एक प्रशासनिक उपखंड है, यह शहर, घोड़ नदी के तट पर पुणे जिले की पूर्वी सीमा पर स्थित है, यह एक औद्योगिक क्षेत्र हैं और यहां पर बहुत सारी लोकप्रिय निर्माण कंपनियां स्थापित हैं, बहुत सारी ऐतिहासिक चीजों को अपने आंचल में संजोए शिरूर की जनसंख्या 25,87,920 है, जिसमें से 58 प्रतिशत लोग गांव में और 41 प्रतिशत लोग शहरों में निवास करते हैं। यहां की 10 प्रतिशत आबादी SC वर्ग की और 8 प्रतिशत आबादी ST वर्ग की है। यहां 76 प्रतिशत लोग हिंदू और 14 प्रतिशत लोग इस्लाम धर्म में यकीन रखते हैं।
शिवाजी आढलराव पाटील का लोकसभा में प्रदर्शन
दिसंबर 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 5 सालों के दौरान लोकसभा में इनकी उपस्थिति 68 प्रतिशत रही है और इस दौरान इन्होंने 34 डिबेट में हिस्सा लिया है और 1009 प्रश्न पूछे हैं और 13 प्राईवेट बिल पेश किया है। साल 2014 के चुनाव में इस सीट पर नंबर 2 पर NCP और नंबर 3 पर MNS थी। उस साल यहां पर कुल मतदाताओं की संख्या 18,24,112 थी, जिसमें से मात्र 10,89,506 लोगों ने अपने मतों का प्रयोग किया, जिसमें पुरुषों की संख्या 6,13,828 और महिलाओं की संख्या 4,75,678 थी। यहां आपको बता दें कि साल 2014 का चुनाव शिवसेना और भाजपा ने मिलकर लड़ा था।
शिरूर लोकसभा सीट पर शिवसेना का कब्जा है और तमाम कोशिशों के बावजूद विरोधीदल उसे यहां हरा नहीं पाए हैं, ऐसे में इस बार जहां शिवसेना की पूरी कोशिश यहां पर जीत की हैट्रिक पूरी करने की होगी, वहीं दूसरी ओर विरोधी दलों का पूरा प्रयास इस सीट को जीतने का होगा, बताते चलें कि इस बार एनसीपी और कांग्रेस साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे लेकिन इस सीट का सिकंदर तो वो ही बनेगा, जिसे यहां की जनता का साथ और प्यार मिलेगा, देखते हैं कि इस बार यहां की जनता फिर से अपने पुराने साथी को चुनती है या फिर कुछ चौंकाने वाले नतीजों से हमें रूबरू कराती है, फिलहाल इसका जवाब जानने के लिए हमें चुनावी नतीजों का इंतजार करना होगा, कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि इस सीट पर मुकाबला काफी जबरदस्त होने वाला है।
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